
Palamu : पलामू प्रमंडल के गढ़वा जिले के भवनाथपुर में 22 महीने से बंद पड़ी तुलसीदामर डोलोमाइट खदान का मामला संसद में उठा है. पलामू के सांसद विष्णु दयाल राम ने मामले को उठाते हुए माइंस के बंद रहने से उत्पन्न स्थिति और बकाया मजदूरी का भुगतान कराने की मांग की है. सांसद ने यह भी कहा है कि अगर माइंस के खुलने की संभावना नहीं बनती तो रैयतों की जमीन वापस कराने की कार्रवाई की जाए.
सांसद ने लोकसभा में शून्यकाल के दौरान तुलसीदामर डोलामाइट खदान से संबंधित अतिमहत्वपूर्ण मामले को उठाया. कहा कि डोलामाइट खदान की स्थापना वर्ष 1975 में हुई थी और इसका संचालन सेल (स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड) द्वारा किया जाता था. पर्यावरण मंजूरी न मिलने के कारण 16 फरवरी, 2020 से खदान को बंद कर दिया गया है. इस बीच 31 मार्च 2020 को इसका लीज भी समाप्त हो गया है, जिसका विस्तारीकरण झारखंड सरकार नहीं कर रही है.
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खादान में बी. फार्म के अंतर्गत रजिस्टर्ड 730 मजदूर कार्यरत हैं. लीज का विस्तारीकरण नहीं होने के चलते यह सारे मजदूर बेरोजगार हो गए हैं. वर्ष 2013-15 के बीच निर्धारित मात्रा से अधिक पत्थर उत्खनन के कारण माइंस डिपार्टमेंट ने सेल पर करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है. सेल द्वारा उपरोक्त राशि आज तक जमा नहीं की गयी है. नतीजा राज्य सरकार लीज एक्सटेंशन नहीं कर रही है.
सेल का कहना है कि उसकी आर्थिक स्थिति बहुत खराब है. एक मुश्त इतनी बड़ी राशि देने में असमर्थ हैं. भवनाथपुर सेल प्रबंधन का अभी भी प्रतिमाह सुरक्षा बल, बिजली, कर्मचारी, वाहन पर करोड़ों रुपए खर्च हो रहे हैं, लेकिन माइंस के बंद होने के चलते इतने बड़े खर्च का लाभ स्थानीय मजदूरों एवं क्षेत्र की जनता को नहीं मिल रहा है. यहां तक कि माइंस के बंद होने के पहले तक जो मजदूर कार्यरत थे, उनका बकाया वेतन भी नहीं दिया गया है.
सांसद ने मंत्री इस्पात मंत्रालय से अनुरोध किया कि राज्य सरकार को बकाया राशि का एवं मजदूरों के बकाए वेतन का भुगतान कर माइंस को चालू कराया जाए या यदि किन्ही कारणों से माइंस को चालू कराना संभव नहीं हो तो वैसी परिस्थिति में राज्य सरकार से रैयतों की जमीन वापस कराने की कृपा की जाय.
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