
Anita Gupta
Ranchi: कोविड से ठीक होने के बाद कई लोग डायबिटीज और किडनी से संबंधित बीमारी के शिकार हो रहे हैं. वैसे लोग जिन्हें कोविड की चपेट में आने से पूर्व डायबिटीज व किडनी से संबंधित कोई परेशानी नहीं थी, वह कोविड से उबरने के बाद डायबिटीज व किडनी की बीमारी से पीड़ित पाये गये हैं. इस समस्या को दूर करने के लिए रिम्स क्रिटिकल केयर व ट्रॉमा सेंटर के एचओडी डॉ प्रदीप भट्टाचार्या की टीम ने ऐसे 200 मरीजों पर कीटोन्युरिया रिसर्च किया. लगातार 8 महीनों तक चले रिसर्च में इसका मुख्य कारण कोरोना की वजह से मरीजों के शरीर में डेवलप हुए कीटोन बॉडीज पाया गया. कीटोन बॉडीज डेवलप होने के कारण साधरण मरीज भी डायबिटीज के चपेट में आ जाते हैं,जिसकी वजह से उसे किडनी से संबंधित समस्या होती है.
रिसर्च के बाद डॉ भट्टाचार्या की टीम ने बताया है कि कोविड के इलाज के दौरान हर मरीज को कीटोन्युरिया की जांच करवानी जरूरी है, चाहे वह संक्रमित मरीज डायबिटिक हो या फिर नॉन डायबेटिक. इलाज के दौरान इस जांच के जरिए नॉन डायबेटिक मरीज को डायबेटिक और उसकी स्थिति गंभीर होने से बचा सकते है. हाल ही में इस रिसर्च का प्रकाशन अंतराष्ट्रीय स्तर पर इंटरनेशनल जर्नल ऑफ साइंटिफिक रिसर्च में हुआ है.
कई कोरोना संक्रमित मरीज इलाज के दौरान डायबिटिक हुए, जो पहले से नहीं थे
रिसर्च में मुख्य भूमिका निभाने वाले बायोकेमिस्ट डॉ साकेत वर्मा और पैथोलॉजिस्ट डॉ पुष्पांजलि ने बताया कि आमतौर पर कोविड के वैसे मरीजों का ही कीटोन जांच की जाती है,जो पहले से ही डायबिटिक रहते हैं. इसके कारण नॉर्मल मरीजों में कोविड के कारण होने वाले प्रभावों के बारें में पता नहीं चल पाता.वैसे में नॉन डायबेटिक संक्रमित मरीज कब डायबेटिक हो जातें है और उसकी स्थिति गंभीर हो जाती है,इसका पता नहीं चल पाता. उन्होंने बताया कि रिसर्च के दौरान कोरोना के मरीजों में यह पाया गया कि कीटोन बॉडीज की मात्रा उन मरीजों के पेशाब में पाई गई, जो पहले से डायबिटिक नहीं थे. मगर इलाज के दौरान डायबिटिक हो गए. चूँकि कीटोन बॉडीज की बढ़ी हुई मात्रा की जानकारी खून की जांच से पहले पेशाब जांच में पता चल जाता है,जो कि काफी सरल है. ऐसे में कीटोन्युरिया जांच से कोरोना संक्रमित मरीजों में उत्पन्न होने वाले डायबिटीज और किडनी से संबंधित बीमारी की जानकारी हम पहले लगा सकते है. इससे मरीज का उचित समय पर इलाज कर के उसे डायबिटीज और किडनी से संबंधित बीमारी होने से बचा सकते है.
कीटोन बढ़ जाने से क्या होता है खतरा
डॉ पुष्पांजलि ने बताया कि शरीर में किटोन बॉडीज का आना मतलब डायबिटीक होना डायबिटीक होने के बाद कोरोना संक्रमित मरीजों के किडनी पर बुरा प्रभाव पडता है इसके कारण कई मरीजों की किडनी खराब हो जाती है और कुछ मरीजों के कोमा में भी जाने की संभावना रहती है.
ये टीम में शामिल थे
क्रिटिकल केयर एंड ट्रॉमा सेंटर एचओडी के डॉ प्रदीप भट्टाचार्या (टीम लीडर), बायोकेमेस्ट्री एंड ट्रॉमा सेंटर के डॉ साकेत वर्मा (मुख्य भूमिका),पैथोलॉजी डिपार्टमेंट की डॉ पुष्पांजलि (मुख्य भूमिका), एनेथेसिया डिपार्टमेंट की डॉ प्रियंका श्रीवास्तव ( सहायक भूमिका).




