
Ranchi : बिजली की टैरिफ के निर्धारण के साथ इससे संबंधित मामलों के निपटारे के लिए बना राज्य विद्युत नियामक आयोग इन दिनों खाली पड़ा हुआ है. इस राज्य विद्युत नियामक आयोग में बीते एक साल से न तो अध्यक्ष हैं और न ही सदस्य. ऐसे में आयोग का काम काज प्रभावित हो रहा है. बिजली की नयी टैरिफ भी निर्धारित होने वाली थी जो नहीं हो सकी है. वहीं कई पीटिशन पेंडिंग पड़े हुए हैं.
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19 फरवरी से डिफंग हुआ आयोग
राज्य विद्युत नियामक आयोग बीते 19 फरवरी से पूरी तरह से डिफंग (निष्क्रिय) हो गया है. 10 महीने के बाद भी सरकार अब तक आयोग को नया चेयरमैन नहीं दे पायी है. 19 फरवरी को आयोग में बचे अंतिम सदस्य (विधि) प्रवास कुमार सिंह ने आयोग केंद्रीय नियामक आयोग के विधि सदस्य के रूप में योगदान दे दिया. इसके बाद से आयोग कोरम विहीन हो चुका है. मालूम हो कि पिछले साल 12 जून को चेयरमैन अरविंद प्रसाद ने इस्तीफा दे दिया था. अरविंद प्रसाद 17 जुलाई 2017 को झारखंड विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष बने थे. जबकि मेंबर तकनीक आरएन सिंह 9 जनवरी को सेवानिवृत्त हो चुके हैं.
न बिजली टैरिफ तय हुई, न हो रही जन सुनवाई
बताते चलें कि आयोग का अध्यक्ष और सदस्य विहीन हो जाने से न तो बिजली की टैरिफ तय हो पा रही है और न ही लोगों की शिकायतें दूर करने के लिए जन सुनवाई की जा रही है. राज्य में नयी बिजली टैरिफ अप्रैल में घोषित होनी थी. हर साल अप्रैल में नियामक आयोग की ओर से बिजली दरें तय की जाती है. बीते साल कोविड की वजह से हुए लॉकडाउन के कारण अक्टूबर में दर तय की गयी. इसके बाद अब तक कुछ काम नहीं हो पा रहा है.
सितंबर में निकला विज्ञापन, पर नहीं हो सकी नियुक्ति
पिछले साल 12 जून को चेयरमैन अरविंद प्रसाद के इस्तीफा दिए जाने के बाद सितंबर महीने में ऊर्जा विभाग ने अध्यक्ष पद की बहाली के लिये विज्ञापन निकाला. आये आवेदनों में से लगभग ग्यारह लोगों को आयोग ने चिन्हित किये गये. जिसके बाद विभाग की तीन सदस्यीय कमेटी भी बनी. जो चयनित लोगों से एक उम्मीदवार के नाम की अनुशंसा अध्यक्ष के लिये करती. इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 के मुताबिक आयोग के अध्यक्ष की ओर से इस्तीफा देने या कार्यकाल पूरा होने की वजह से पद खाली होने के तीन महीने के अंदर नये अध्यक्ष की घोषणा हो जानी है. लेकिन ऊर्जा विभाग ने इसमें देर कर दी.




