
New Delhi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल (7 जुलाई) मंत्रिमंडल का विस्तार कर सकते हैं. इसके मद्देनजर आज अमित शाह के साथ पीएम मोदी की अहम बैठक है. इस विस्तार में एनडीए के चार सहयोगी दलों जदयू, लोजपा, अन्नाद्रमुक और अपना दल को सरकार में प्रतिनिधित्व देने की जोरदार चर्चा है. इसके अलावा वाईएसआर कांग्रेस को भी सरकार में शामिल किया जा सकता है.
सूत्र बता रहे हैं अमित शाह मोदी से बैठक के पूर्व कुछ सहयोगी दलों के नेताओं के साथ बैठक करेंगे. यह भी बताया जा रहा है कि असम के पूर्व मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल को दिल्ली पहुंचने का संदेश दिया गया है. ज्योतिरादित्य सिंधिया, भूपेंद्र यादव को फिलहाल दिल्ली में ही रहने के लिए कहा गया है. इधर, जदयू से बातचीत अंतिम दौर में है. बिहार के सुशील मोदी भी प्रबल दावेदारों में हैं. बिहार से दूसरे नाम के तौर पर लोजपा नेता पशुपति कुमार पारस शामिल हैं.
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मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में शिवसेना और अकाली दल के एनडीए से नाता तोड़ने और रामविलास पासवान के निधन के बाद सरकार में सहयोगियों की भूमिका नहीं के बराबर रह गई है. महज आरपीआई (अठावले) की ही सरकार में भागीदारी है. इसके अध्यक्ष रामदास अठावले बतौर राज्यसभा सदस्य सरकार में बतौर राज्य मंत्री शामिल हैं. जाहिर है सहयोगी दलों की भागीदारी बढ़ाया जा सकता है.
23 मंत्रालयों में बदलाव, नौ मंत्रियों की छुट्टी
सूत्रों के अनुसार, 23 मंत्रालयों में विस्तार और बदलाव संभव है. नौ के करीब मंत्रियों की मंत्रिमंडल से छुट्टी होगी. इनमें दो कैबिनेट और सात राज्य मंत्रियों को हटाए जाने की चर्चा है. फिलहाल नौ मंत्रियों के पास मंत्रालयों का अतिरिक्त प्रभार है. इन मंत्रियों के काम के बोझ को कम किया जाएगा. मालूम हो कि मोदी मंत्रिमंडल में फिलहाल 57 सदस्य हैं. नियमों के तहत मंत्रिमंडल में 81 मंत्री हो सकते हैं.
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चुनावी राज्य रहेंगे निशाने पर
अगले साल उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में विधानसभा चुनाव हैं. विस्तार के जरिए इन राज्यों में भी जातिगत-सामाजिक संतुलन साधा जाएगा. विस्तार के संदर्भ में सबकी निगाहें उत्तर प्रदेश पर टिकी हैं. मालूम हो कि 2019 बागडोर संभालने के बाद मोदी मंत्रिमंडल का यह पहला विस्तार होगा.




