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टॉप उतारे बगैर स्तन छूना पॉस्को अपराध नहीं…इस फैसले से आहत महिला ने जज को भेजे 150 कंडोम

अहमदाबाद की महिला ने कंडोम भेज कर कहा - जज को हटाया जाना चाहिये

New delhi: बच्ची का टॉप उतारे बिना स्तन छूना और बच्ची का हाथ पकड़कर पैंट की चेन खोलना पॉस्को के तहत अपराध नहीं है. यह फैसला सुनाकर कुछ दिन पूर्व चर्चा में आई बॉम्बे हाई कोर्ट की अतिरिक्त न्यायाधीश पुष्पा वी गनेडीवाल को अहमदाबाद की एक महिला ने 150 कंडोम भेजे हैं.

 

प्राप्त जानकारी के अनुसार कंडोम भेजने वाली महिला देवश्री त्रिवेदी का कहना है कि उन्होंने जस्टिस पुष्पा के फैसले का विरोध जताने के लिए उनके घर और दफ्तर के पते पर कंडोम के 150 पैकेट भेजे हैं. देवश्री ने कहा, जस्टिस पुष्पा का मानना है कि अगर स्किन को नहीं छुआ है, तो फिर यौन शोषण नहीं है. मैंने उनको कंडोम भेजकर बताया है कि इसका इस्तेमाल करने पर भी स्किन टच नहीं होता तो इसे क्या कहा जाएगा? देवश्री का कहना है कि मैंने एक चिट्ठी भी जस्टिस पुष्णा को लिखी है और उनके फैसले पर विरोध दर्ज कराया है. उन्होंने जस्टिस गनेडीवाला को निलंबित किए जाने की भी मांग की है.

 

कानून विशेषज्ञ का मानना है कि महिला की इस हरकत को अदालत की अवमानना करार दी सकती है. उक्त महिला के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिये. जस्टिस पुष्पा गनेडीवाला बॉम्बे हाईकोर्ट में एडिशनल जज हैं. हाल ही में जस्टिस पुष्पा गनेदीवाला ने पोक्सो एक्ट के तहत दो फैसले दिए थे, जिस पर जमकर विवाद हुआ है.

 

पुष्पा गनेडीवाला महाराष्ट्र के अमरावती की रहने वाली हैं. वर्ष 2007 में वह जिला जज बनी थीं. इसके बाद नागपुर में मुख्य जिला और सेशन जज बनीं. फिर बॉम्बे हाईकोर्ट की रजिस्ट्रार जनरल नियुक्त की गईं. फरवरी 2019 में उन्हें बॉम्बे हाईकोर्ट में अस्थाई जज बनाया गया. इस बीच सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 20 जनवरी को जस्टिस पुष्पा को हाईकोर्ट का स्थायी न्यायाधीश बनाने की सिफारिश की थी, लेकिन अब दो विवादित फैसलों के बाद इस सिफारिश को वापस लिया जा सकता है.

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