
रांची: राजभवन के समक्ष किसान मजदूर पड़ाव कार्यक्रम रविवार को भी जारी रहा. राजभवन के समक्ष यह कार्यक्रम आयोजित किया गया है, जिसमें किसान, ट्रेड और जनसंगठन शामिल हो रहे हैं. धरना कृषि बिल के विरोध में दिया जा रहा है जो सोमवार को भी जारी रहेगा.
राज्य में झारखंड राज्य किसान संघर्ष समन्वय समिति की ओर से इसका आयोजन किया गया. रविवार को आयोजित प्रदर्शन में वक्ताओं ने कहा कि किसानों के शोषण के लिये केंद्र सरकार ने कानून बनाया है. जब देश दुनिया कोरोना महामारी झेल रही थी तब केंद्र सरकार ने इस कानून को लाया. ऐसे में केंद्र सरकार की मंशा का अंदाजा लगाया जा सकता है.
वक्ताओं ने कहा कि दिल्ली में किसान सड़कों पर बैठे हैं. लेकिन केंद्र सरकार इनकी मांगों को मानने के बजाय बीच का रास्ता निकालना चाह रही. जबकि किसानों ने स्पष्ट कहा है कि तीनों कृषि कानून वापस लिया जाये. साथ ही एमएसपी का प्रावधान किया जाये.
इसे भी पढ़ेंः ईसाई धर्मप्रचारक पॉल दिनाकरन के ठिकानों पर आईटी की रेड, 118 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति मिली
जारी रहेगा आंदोलन
वक्ताओं ने कहा कि केंद्र सरकार भले बीच का रास्ता निकालना चाहती हो, लेकिन किसान तीनों कानून वापस होने पर ही आंदोलन को विराम देंगे. जब तक केंद्र सरकार आंदोलन वापस नहीं लेगी तब तक आंदोलन जारी रहेगा.
वक्ताओं ने कहा कि 26 जनवरी को देश भर के किसान दिल्ली में जुटेंगे और किसान परेड का आयोजन किया जायेगा. ऐसे में राज्य के किसान उनके समर्थन में अलग अलग जिलों और प्रखंडों में आंदोलन किया जायेगा.
सीटू के महासचिव प्रकाश विप्लव ने कहा कि 26 जनवरी के केंद्रीय किसान परेड में शामिल होने राज्य के छिट पुट लोग गये है. लेकिन संगठित रूप में किसान परेड में शामिल नहीं हो रहे. हालांकि इसकी राज्य में इस दिन भी आंदोलन जारी रहेगा. इन्होंने बताया 23 से 30 जनवरी तक कृषि कानून के विरोध में आंदोलन जारी रहेगा.
इस दौरान दयामनी बारला, आरपी सिंह, बिरेंद्र कुमार, विप्लव चैधरी, के गोराय, महेश मुंडा, सुभाष मुंडा समेत अन्य मौजूद रहे.
इसे भी पढ़ेंः स्वच्छ भारत मिशन के कर्मियों ने जल जीवन मिशन औऱ SBM प्रोजेक्ट-2 की नौकरियों में प्राथमिकता देने की मांग की




