
Dharmenra Pathak
Chatra: विकास योजनाओं के नाम पर अफसर सरकारी खजाने की लूट का रास्ता कैसे बनाते हैं, इसका जीवंत उदाहरण है चतरा जिले के टंडवा में गेरुआ नदी पर निर्माणाधीन पुल का डायवर्सन.
गेरुआ नदी का पुल क्षतिग्रस्त है. इसकी मरम्मत और इसके क्षतिग्रस्त हिस्सों के नये सिरे से निर्माण की योजना एनटीपीसी ने बनायी और इसका ठेका द रियल क्लासिक कंस्ट्रक्शन को सौंपा है. इस योजना की लागत 96 लाख रुपये है. यह तो ठीक है, लेकिन इसी पुल से महज 20 मीटर की दूरी पर पथ निर्माण विभाग द्वारा एक टेम्पररी डायवर्सन बनाया जा रहा है, और इसकी लागत तय हुई है 1 करोड़ 55 लाख रुपये. पुल की लागत से ज्यादा टेम्पररी डायवर्सन की लागत का यह मामला अपने आप में विचित्र है. पथ निर्माण विभाग ने यह काम सौंपा है पूजा कंस्ट्रक्शन को.
कैसे और किसने पास की योजना
स्वाभाविक तौर पर सवाल उठ रहा है कि पथ निर्माण विभाग के अफसरों ने आखिरकार टेम्पररी डायवर्सन के लिए डेढ़ करोड़ रुपये की योजना कैसे पास कर दी, जबकि पुल को दुरुस्त की मुख्य योजना की लागत मात्र 96 लाख रुपये है. क्या यह सरकारी पैसे की लूट नहीं है? आरोप लग रहा है कि पूजा कंस्ट्रक्शन को निजी तौर पर फायदा पहुंचाने के लिए ही इतनी बड़ी लागत से डायवर्सन का निर्माण कराया जा रहा है.
झामुमो के केंद्रीय सदस्य संतोष नायक का आरोप है कि गेरुआ पुल से महज 20 मीटर की दूरी पर बनाए जा रहे डायवर्सन में पथ निर्माण विभाग के अफसरों और संवेदक के मिलीभगत से सरकार के पैसे का दुरुपयोग किया जा रहा है. उन्होंने इसे खजाने पर अफसरों और ठेकेदार द्वारा डाका बताते हुए इसकी जांच कराने की मांग है.
नौ महीने पहले क्षतिग्रस्त हुआ था पुल
बता दें कि गेरुवा नदी पर बना पुल नौ महीने पहले क्षतिग्रस्त हो गया था. इससे प्रखंड के लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही थी. सिमरिया विधानसभा क्षेत्र के भाजपा विधायक किशुन दास ने मामले को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात की थी और पुल का निर्माण कराने की मांग की थी. मुख्यमंत्री के निर्देश पर पथ निर्माण विभाग द्वारा इसकी मरम्मत के लिए जो प्राक्कलन तैयार किया गया, वह 96 लाख का था. इसी प्राक्कलन के अनुसार एनटीपीसी इस पुल के क्षतिग्रस्त हिस्सों का निर्माण करा रहा है.
क्या कहते हैं चतरा के डीसी
इस बाबत चतरा के डीसी दिव्यांशु झा ने पूछे जाने बताया कि यह योजना राज्य से स्वीकृत है. ऐसे में इस बाबत उनके द्वारा किसी टिप्पणी का कोई औचित्य नहीं है.




