
Ranchi : झारखंड के पूर्व सीएम रघुवर दास की मुसीबत बढ़ने वाली है. कथित मैनहर्ट घोटाला मामले में एसीबी ने गुरुवार को श्री दास के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है. जान लें कि रांची शहर में सीवरेज-ड्रेनेज निर्माण का डीपीआर तैयार करने के लिए मैनहर्ट परामर्शी की नियुक्ति की गयी थी. इसमें हुई अनियमितता और भ्रष्टाचार मामले में एसीबी ने तत्कालीन नगर विकास मंत्री रघुवर दास सहित अन्य के खिलाफ मामला (प्रिलिमनरी इंक्वायरी) दर्ज कर लिया है. मामले की जांच शुरू कर दी गयी है.
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सरयू राय द्वारा एसीबी में लिखित शिकायत की गयी थी
थोड़ा पीछे जायें तो 31 जुलाई को पूर्व मंत्री और विधायक सरयू राय द्वारा एसीबी में लिखित शिकायत की गयी थी. एसीबी ने जांच की अनुमति के लिए यह मामला मंत्रिमंडल निगरानी विभाग के पास भेज दिया था. बता दें कि हाल ही में सरकार ने इस मामले की जांच की अनुमति दी थी. खबर है कि शुरुआती जांच में भ्रष्टाचार और गड़बड़ी से संबंधित तथ्य मिले तो एसीबी प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई करेगी.
जैसा कि सामने आया है, सरयू राय ने अपनी शिकायत में इस बात का जिक्र किया था कि मैनहर्ट परामर्शी की निविदा निष्पादन की प्रक्रिया में हर स्तर पर गड़बड़ी हुई है. इस कारण सरकारी राजस्व में करोड़ों का नुकसान हुआ. कहा कि निविदा अनावश्यक रूप से विश्व बैंक की क्यूबीएस पर आमंत्रित की गयी थी. यह एक षड्यंत्र के तहत हुआ था.
एक अक्टूबर को हेमंत सोरेन ने जांच का आदेश दिया था
हेमंत सोरेन ने 1 अक्तूबर को मैनहर्ट परामर्शी की नियुक्ति में घोटाले की जांच भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) से करने का आदेश दिया था. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने यह आदेश भाजपा के पूर्व कद्दावर नेता व वर्तमान में निर्दलीय विधायक सरयू राय की मांग पर दिया था. सरयू राय ने कहा था कि मैनहर्ट परामर्शी की नियुक्ति में अनियमितता, भ्रष्टाचार व षड्यंत्र हुआ है. ऐसे में उच्च न्यायालय के आदेश के आलोक में प्रासंगिक धाराओं में मामला दर्ज कर सरकार जांच करें.
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मैनहर्ट की नियुक्ति को अवैध पाया गया था
सरयू राय की शिकायत पर निगरानी विभाग के तकनीकी परीक्षण कोषांग की जांच में साबित हुआ था किस तरह मैनहर्ट का चयन अधिक दर पर अनुचित तरीके से किया गया. शिकायत में इसका भी जिक्र था कि विधानसभा की कार्यान्वयन समिति ने मामले की गहन जांच में पाया कि मैनहर्ट की नियुक्ति अवैध है.
आरोप हो कि रघुवर दास ने कार्यान्वयन समिति की जांच को प्रभावित और बाधित करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखा. पूर्व में भी इस मामले में निगरानी जांच के लिए वर्ष 2009 में राज्यपाल के तत्कालीन सलाहकार ने निगरानी आयुक्त को आदेश दिया था.
सरयू राय ने अपनी ही पार्टी नेताओं के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया था.
जान लें कि मैनहर्ट मामले की जांच की मांग पिछले 11 वर्षों से की जा रही थी. उस समय भाजपा के विधायक रहे सरयू राय ने अपनी ही पार्टी नेताओं के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया था. आरोप है कि निविदा मूल्यांकन में यह पाया गया कि कोई भी निविदा शर्त के अनुरूप नहीं थी. इसलिए, तत्कालीन नगर विकास सचिव ने इसे रद्द कर नयी निविदा का प्रस्ताव दिया. आरोप है कि तत्कालीन विभागीय मंत्री रघुवर दास के दबाव में आखिरकार इसी कंपनी को योग्य करार दिया गया.
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