
Ranchi: चर्च ऑफ नार्थ इंडिया (सीएनआइ) के छोटानागपुर डायसिस (चर्च की प्रशासनिक ईकाई) का विवाद सुलझाने सीएनआइ के पूर्व मॉडरेटर और पटना डायसिस के बिशप (धार्मिक अगुआ) पीपी मरांडी गुरूवार को रांची पहुंचे. इस अवसर पर डायसिस के सदस्यों ने उन्हें विवाद के संबंध में विस्तृत जानकारी दी. बिशप मरांडी को बीते 3 महीने में घटित घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी दी गयी. बैठक में उपस्थित पुरोहितों और चर्च के सदस्यों ने इस विवाद को सुलझाने के लिए अपने सुझाव दिए.
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इस अवसर पर बिशप पीपी मरांडी ने कहा कि चर्च से जुड़े सभी लोग आपसी एकता बनाये रखें. प्रार्थना करें और एक दूसरे को प्रेम और माफी दें. उन्होंने उम्मीद जतायी कि ईश्वर बहुत जल्द छोटानागपुर डायसिस के बिशप बीबी बास्के, अन्य पुरोहितों और प्रभु के विश्वासियों को जागृत करेगा. मौके पर पुरोहित जोलजस कुजूर, सूभाष नाग सहित अन्य उपस्थित थे.
क्या है विवाद
चर्च ऑफ नार्थ इंडिया उत्तर भारत के विभिन्न चर्च संगठनों का समूह है. यह 1970 के दशक में अस्तित्व में आया था. इस समूह के सदस्य चर्च सीएनआइ के संविधान और रिवाजों के साथ बंधे हैं. छोटानागपुर डायसिस भी सीएनआइ की स्थापना के साथ ही इसमें शामिल हुआ था. लगभग तीन महीने पहले छोटानागपुर डायसिस के धार्मिक अगुआ बिशप बीबी बास्के और उनके समर्थकों ने सीएनआइ से स्वायत (ऑटोनोमस) होने की घोषणा कर दी थी.
हालांकि छोटानागपुर डायसिस के कई सदस्यों ने स्वायतता को समर्थन नहीं दिया. इन गतिरोध के बीच डायसिस में दो गुट हो गये हैं और बीते तीन महीने में कई बार उनका गतिरोध सामने आ चुका है. अब सीएनआइ की ओर से इस गतिरोध को समाप्त करने की पहल की गयी है. पटना डायसिस के बिशप पीपी मरांडी का रांची दौरा इसी कड़ी में है.
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