Palamu: तीन साल तक अनुबंध पर डयूटी करने वाले सहायक पुलिस के जवान स्थायीकरण की मांग पर अड़ गये हैं. कई दिनों तक अवकाश पर रहकर हड़ताल और धरना प्रदर्शन करने के बाद गुरुवार को रांची में मुख्यमंत्री का घेराव करने के लिए पैदल ही कूच कर गये. पलामू के करीब 200 सहायक पुलिस जवान पूरी तैयारी के साथ गुरुवार को रांची के लिए निकले. इसकी जानकारी जैसे ही पुलिस पदाधिकारियों को मिली, उन्हें इस तरह से रांची जाने से रोकने की मुहिम में लग गये.
बता दें कि 12 सितंबर को राज्यभर के सहायक पुलिस जवानों का रांची में प्रदर्शन होना है. पलामू के सभी जवान इसी में शामिल होने के लिए निकले थे. सुबह 9.30 बजे महिला-पुरुष सहायक पुलिस जवान पुलिस लाइन से रांची जाने के लिए पैदल निकले.
पूरा पुलिस तंत्र सिस्टम से नाराज सहायक पुलिस जवानों को समझाने के प्रयास में लग गया. दोपहर में पुलिस पदाधिकारियों को इसमें सफलता मिली. बाद में तीन बसों से भरकर सभी को मेदिनीनगर पुलिस लाइन में लाना पड़ा.
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चौथी बार में मिली सफलता
सबसे पहले चियांकी स्थित सोहसा स्कूल के पास ट्रैफिक प्रभारी रुद्रानंद सरस ने जवानों को रोकना चाहा. लेकिन जवान आगे बढ़ गये. फिर हवाई अड्डा के पास सदर एसडीपीओ संदीप गुप्ता ने जवानों को रोकना चाहा. लेकिन वह भी सफल नहीं हुए.
चियांकी चेकनाका के पास भी जवानों से वार्ता का प्रयास हुआ, लेकिन यहां भी जवान नहीं रुके. वे रांची जाने की जिद पर अड़े थे. आखिरकार होमगार्ड ट्रेनिंग सेंटर के पास चौथे प्रयास में अधिकारियों को जवानों से बात करने में सफलता मिली.
एसडीपीओ ने भरोसा दिलाकर लाया वापस
सहायक पुलिस जवानों का कहना था कि उन्होंने तीन वर्षों में पूरी मेहनत व निष्ठा के साथ कार्य किया है. तीन साल काम कराने के बाद उन्हें हटाने की साजिश हो रही है. एसडीपीओ श्री गुप्ता ने सहायक जवानों को समझाया कि उनके मामले में वार्ता चल रहा है. थोड़ा धैर्य रखें.
लेकिन जवान किसी के बात से संतुष्ट नहीं हो रहे थे. एसडीपीओ ने जवानों को आश्वस्त किया यदि एक दिन में कोई निष्कर्ष नहीं निकलता है तो शनिवार को वाहन से उन्हें रांची भेजा जाएगा. पैदल जाना उनकी सुरक्षा की दृष्टिकोण से उचित नहीं है.
क्यों कर रहे सहायक पुलिस जवान आंदोलन
गौरतलब है कि राज्यभर के सहायक पुलिसकर्मी अपनी मांगों को लेकर मंगलवार से हड़ताल पर हैं. पलामू प्रमंडल में 700 सहायक पुलिसकर्मियों की भर्ती वर्ष 2017 में हुई थी. जिसमें लातेहार में 300, जबकि पलामू व गढ़वा में 200-200 जवान बहाल हुए थे. प्रत्येक वर्ष एसपी के स्तर से सहायक पुलिस के कार्यो की समीक्षा होनी थी. जबकि तीन वर्ष के बाद डीआईजी स्तर पर सेवा आगे बढ़ाने को लेकर फैसला लेना है.
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