– पोषक स्कूल के भरोसे हो रहा नामांकन
– चक्रधरपुर प्रखंड में सर्वाधिक भवनहीन स्कूल
– 400 स्कूल ऐसे, जहां एक या दो कमरे ही काम के लायक
– प्राथमिक स्तर के स्कूल का है यह हाल
Ranchi : राज्य में प्राथमिक शिक्षा के लिए चल रहे स्कूलों का हाल बेहाल है. राज्य के पश्चिमी सिंहभूम जिला में प्राथमिक शिक्षा की स्थिति तो और भी बदतर स्थिति में है. यहां के 14 प्रखंड में कुल 69 प्राथमिक स्कूल ऐसे हैं, जो बिना भवन के संचालित हो रहे हैं. इन स्कूलों में बच्चों का नामांकन भी हो रहा है. इतना ही नहीं इन स्कूलों में 1200 के करीब बच्चे पढ़ाई भी कर रहे हैं.
इनकी पढ़ाई भवनहीन स्कूलों के पोषक स्कूलों(पोषक स्कूल वैसे स्कूल होते हैं, जिनके जिम्मे उनके नजदीकी स्कूल की व्यवस्था होती है) के भरोसे ही चल रही है. वहीं लगभग 400 प्राथमिक स्कूल ऐसे हैं, जिनके एक या दो कमरे की काम के लायक हैं. बीते छह माह से स्कूल बंद होने से इनकी देखरेख भी नहीं हो पा रही है. ऐसे में साफ-सफाई और दूसरी सुरक्षा व्यवस्था नहीं हो पा रही है. स्कूल भवन जर्जर हो रहे हैं.
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चक्रधरपुर प्रखंड में सर्वाधिक 21 स्कूल भवनहीन
प्राथमिक स्कूलों की व्यवस्था की बात करें तो जिले के 14 प्रखंड में भवनहीन 69 प्राथमिक स्तर के स्कूलों का अनिवार्य रूप से निर्माण होना बहुत ही जरूरी है. जबकि 400 विद्यालयों का भवन के साथ-साथ मौजूद कमरों की देखरेख और रेनोवेशन भी आवश्यक है. 69 भवनहीन स्कूलों में आधा से अधिक स्कूल पारा शिक्षकों के भरोसे संचालित हो रहे हैं.
इन्हीं विद्यालयों में कार्यरत पारा शिक्षकों ने बताया कि विद्यालयों में एक-दो कमरे ही काम लायक हैं. बाकि स्कूलों की स्थिति ऐसी है कि कमरे की छत कभी भी गिर सकती है. जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय के मुताबिक, सबसे ज्यादा भवनहीन स्कूल पश्चिमी सिंहभूम जिला के चक्रधरपुर प्रखंड में है. यहां 21 भवनहीन स्कूल हैं.
वहीं सदर प्रखंड में 9, खूंटपानी प्रखंड में 9, आनंदपुर में 7, मनोहरपुर में 4, गोईलकेरा में 3,सोनुवा में 3, बंदगांव, टोन्टो, तांतनगर तथा मंझारी प्रखंडों में 2-2 तथा झींकपानी, हाट गम्हरिया और जगन्नाथपुर प्रखंडों में 1-1 स्कूल भवनहीन हैं.
कोरोना काल में ही भवन निर्माण पर जोर
डीइओ नीरजा कुजूर के मुताबिक, शिक्षा विभाग पहले उन 69 स्कूलों के भवन का निर्माण कराना चाहती है, जिनका अपना भवन नहीं है. विभाग की कोशिश है कि कोरोना काल में ही इसे लेकर प्रशासनिक स्तर पर बैठक हो. ताकि इसके निर्माण की पहल शुरू हो सके.
जिले में 400 ऐसे स्कूल हैं, जहां भवन की जरूरत है. पर ऐसे स्कूलों में कुछ कमरे हैं, जिनमें क्लासेस की थोड़ी रिपेयरिंग कराकर पढ़ाई करायी जा सकती है. अहम बात यह है कि जिले में 1510 प्राथमिक स्कूल हैं.
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