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वित्त मंत्री के ‘दैवीय घटना’ वाले बयान पर चिदंबरम का तंजः क्या ईश्वर की दूत हैं निर्मला सीतारमण

बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी भी निर्मला सीतारमण के बयान पर भड़के

New Delhi: GST काउंसिल की बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कोविड-19 को दैवीय आपदा बताया था. जिसके बाद से वो विपक्ष के निशाने पर हैं. अब देश के पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने भी निर्मला सीतारमण पर तंज कसा है. उन्होंने कहा कि महामारी इश्वरीय प्रकोप है तो क्या ईश्वर की दूत हैं वित्त मंत्री.

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क्या ईश्वर की दूत हैं वित्त मंत्री- चिदंबरम

मामले को लेकर कांग्रेस नेता चिदंबरम ने ट्वीट कर वित्त मंत्री पर हमला बोला है. उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, ‘अगर महामारी ‘दैवीय घटना’ है तो हम वर्ष 2017-18, 2018-19 और 2019-2020 के दौरान अर्थव्यस्था के कुप्रबंधन की कैसे व्याख्या करेंगे? क्या वित्त मंत्री ईश्वर की दूत के तौर पर जवाब देंगी?’

बीजेपी सांसद ने भी कसा तंज

अपने बयान को लेकर वित्त मंत्री अपनी ही पार्टी के सांसद के निशाने पर भी है. मामले को लेकर बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने सवाल उठाये कि क्या जीडीपी रेट घट जाना भी एक्ट ऑफ गॉड है.

सुब्रमण्यम स्वामी ने ट्वीट कर कहा, ‘मुझे इस बात की पुख्ता जानकारी मिली है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कोविड-19 को एक्ट ऑफ गॉड बताया है. मैं इसका वीडियो जल्द ही पोस्ट करूंगा. क्या सालाना जीडीपी रेट वित्त वर्ष 2015 के 8 फीसदी से 2020 की पहली तिमाही में 3.1 फीसदी पर आ जाना भी एक्ट ऑफ गॉड है? ‘

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वामदलों के भी निशाने पर वित्त मंत्री

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण वामदलों के भी निशाने पर है. वामदलों ने जीएसटी राजस्व की कमी के मामले को लेकर ‘दैवीय घटना’ वाले बयान पर शुक्रवार को सरकार पर निशाना साधा और राज्यों पर इसका बोझ डालने का आरोप लगाया.

सीतारमण के बयान पर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा, ‘यदि आवश्यक हो तो केन्द्र सरकार कर्ज लेकर राज्यों के बकाए का भुगतान करे. राज्य सरकारें कर्ज क्यों लें? क्या इसे सहकारी संघवाद कहते हैं? भारतीय अर्थव्यवस्था को बर्बाद करने के बाद राज्यों को लूटा जा रहा है. दैवीय कारण बताकर?’ उन्होंने कई ट्वीट में कहा, ‘उद्योगपतियों से मिलीभगत, अक्षमता और असंवेदनशीलता की वजह से महामारी से काफी पहले ही लोगों की आजीविकाएं और जिंदगियां बर्बाद हो गई थीं. अब भगवान को कोसा जा रहा है.’’

वहीं भाकपा के नेता डी राजा ने कहा कि जीएसटी क्षतिपूर्ति राज्य सरकारों का एक वैध अधिकार है जैसा कि केंद्र सरकार ने जीएसटी अधिनियम को लागू करते समय वादा किया था. उन्होंने कहा, वित्त मंत्री का यह कहना कि महामारी ‘दैवीय घटना’ है और इसलिए, मुआवजे का भुगतान करने के लिए केंद्र सरकार उत्तरदायी नहीं है, यह गलत और अनैतिक है.

राजा ने कहा, ‘‘ऐसे समय में जब राज्य सरकारों पर पहले से ही अर्थव्यवस्था में मंदी के कारण बोझ हैं और महामारी से निपटने की जिम्मेदारियों के कारण अतिरिक्त खर्च के बीच राज्य सरकारों को बाजार से उधार लेने के लिए कहना राज्य के वित्त पर अतिरिक्त वित्तीय देनदारियों को बढ़ा रहा है.’’

क्या कहा था वित्त मंत्री ने

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जीएसटी परिषद की 41वीं बैठक के बाद पत्रकारों से कहा था कि अर्थव्यवस्था कोविड-19 महामारी से प्रभावित हुई है, जो कि एक ‘दैवीय घटना’ है और इससे चालू वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था में संकुचन आएगा.

केंद्र के आकलन के अनुसार चालू वित्त वर्ष में क्षतिपूर्ति के रूप में राज्यों को तीन लाख करोड़ रुपये की जरूरत होगी. इसमें से 65,000 करोड़ रुपये की भरपाई जीएसटी के अंतर्गत लगाये गये उपकर से प्राप्त राशि से होगी. इसीलिए 2.35 लाख करोड़ रुपये का कुल घाटा रहने का अनुमान है.

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