Read Next
27/10/2026
वीटो पावर के बिना UNSC के स्थायी सदस्य दूसरे दर्जे के समान : भारत
27/10/2026
गुवाहाटी : होटल के मालिक और लीजधारक के बीच विवाद, 5 लोगों की गोली मारकर हत्या
26/10/2026
चुनाव से पहले इजरायल की सेना ने ईरान पर हमले से किया इनकार
21/12/2025
भारत के पुल : कठिनाइयों पर स्थापत्य की विजय
30/11/2025
रांची : किंग कोहली के विराट शतक और कुलदीप के 4 विकेटों से जीता भारत, 17 रनों से मिली जीत
26/11/2025
क्रिकेटर विराट कोहली पहुंचे रांची, 30 नवंबर को होने वाले वनडे मुकाबले में आएंगे नजर
23/11/2025
ED के 44 ठिकानों पर हुई रेड में मिले 14 करोड़ से अधिक नकद और कोयला घोटाला के बड़े सबूत
20/11/2025
नीतीश कुमार ने 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, 26 मंत्रियों में तीन महिला और एक मुस्लिम चेहरा शामिल
18/11/2025
अल फलाह यूनिवर्सिटी के फाउंडर जावेद सिद्दीकी मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार, ईडी की रेड के बाद हुई गिरफ्तारी
18/11/2025
एक करोड़ का इनामी नक्सली कमांडर हिडमा और उसकी पत्नी हुई ढेर
Back to top button
New Delhi: भारत और चीन सेनाओं के बीच मंगलवार को लेफ्टिनेंट जनरल स्तर पर तीसरे दौर की बातचीत हुई. इस वार्ता केंद्र में पूर्वी लद्दाख के टकराव वाले क्षेत्रों से सैनिकों को पीछे करने के तौर-तरीकों को अंतिम रूप देना था.
सरकारी सूत्रों ने बताया कि वार्ता पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास चुशूल सेक्टर में भारतीय जमीन पर हुई. पहले दो दौर की वार्ताओं में भारतीय पक्ष ने यथास्थिति की बहाली और गलवान घाटी, पैंगोंग सो और अन्य क्षेत्रों से चीनी सैनिकों की तत्काल वापसी पर जोर दिया था.
इसे भी पढ़ें- जल जीवन मिशन का हाल: अबतक 10 फीसदी लोगों को भी नहीं मिल सका है नल कनेक्शन
भारतीय सैन्यकर्मियों के शहीद हो जाने के बाद और बढ़ गया है तनाव
पूर्वी लद्दाख में कई जगहों पर पिछले सात सप्ताह से भारत और चीन की सेनाएं आमने-सामने हैं. गलवान घाटी में 15 जून को हुए संघर्ष में 20 भारतीय सैन्यकर्मियों के शहीद हो जाने के बाद तनाव और बढ़ गया है. चीनी पक्ष के जवान भी हताहत हुए हैं, लेकिन उसने इस बारे में जानकारी नहीं दी है.
दोनों पक्षों के बीच 22 जून को हुई वार्ता में पूर्वी लद्दाख में तनाव वाले सभी स्थानों पर ‘‘पीछे हटने’’ को लेकर ‘‘परस्पर सहमति’’ बनी थी. पहले दो दौर की बातचीत एलएसी के पास चीनी जमीन पर मोल्दो में हुई थीं.
वार्ता में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व 14वीं कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह ने किया, जबकि चीनी पक्ष का नेतृत्व तिब्बत सैन्य जिला के मेजर जनरल लियु लिन ने किया. गलवान घाटी में हुई हिंसा के बाद सरकार ने सशस्त्र बलों को एलएसी के पास चीन के किसी भी दुस्साहस का ‘‘मुंहतोड़’’ जवाब देने की ‘‘पूरी छूट’’ दे दी है.
इसे भी पढ़ें- बर्खास्त इंजीनियर राम विनोद सिन्हा से आज ED करेगी पूछताछ, मनी लॉन्ड्रिंग मामले में है आरोपी
सेना ने अग्रिम स्थानों पर हजारों अतिरिक्त बल भेजे हैं
सेना ने पिछले दो सप्ताह में सीमा के पास अग्रिम स्थानों पर हजारों अतिरिक्त बल भेजे हैं. वायुसेना ने भी अहम वायुसेवा अड्डों पर हवाई रक्षा प्रणालियां, लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टर तैयार रखे हैं. लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की छह जून को हुई पहले दौर की वार्ता में दोनों पक्षों ने उन बिंदुओं से बलों को धीरे-धीरे पीछे हटाने पर सहमति जताई थी, जहां दोनों देशों की सेनाओं के बीच गतिरोध की स्थिति है.
गलवान घाटी में हुए संघर्ष के बाद हालांकि स्थिति बिगड़ गयी और दोनों पक्षों ने एलएसी से लगे इलाकों में अपने सैनिकों की तैनाती बढ़ा दी. दोनों देशों के करीब 250 सैनिकों के बीच गत पांच और छह मई को पूर्वी लद्दाख के पैंगोंग सो क्षेत्र में झड़प हुई थी. इसके बाद नौ मई को सिक्किम सेक्टर में नाकू ला दर्रे के पास भारतीय और चीनी सैनिक आपस में भिड़ गये थे.
इसे भी पढ़ें- 1200 करोड़ को लेकर DVC और JBVNL में विवाद, विभाग कह रहा पेमेंट एडजेस्ट करें, कंपनी बिजली काटने पर अड़ी