
Ranchi: आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ अजय कुमार ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है. पत्र में डॉ अजय ने छठी जेपीएससी परीक्षा निरस्त करने की मांग की. साथ ही छठी जेपीएससी के चयन प्रक्रिया में अनियमितता, कदाचार और भ्रष्टाचार के मामले को उठाया गया है.
चिट्ठी में जिक्र है कि परीक्षा की मेरिट लिस्ट में अनियमितता बरती गयी है. इसमें लैंग्वेज न्यूट्रल और स्ट्रीम न्यूट्रल होने के बुनियादी सिद्धांतों का उल्लंघन किया गया है. लिखा है कि प्रश्नपत्र के मामले में कदाचार और आरक्षण नीति का उल्लंघन किया गया है. ऐसे में यह कहकर कैसे बचा जा सकता है कि न्यायालय के आदेश के पालन के लिये रिजल्ट निकाला गया.
आप नेता ने सवाल उठाये कि पिछली सरकार में गठित बाउरी कमेटी के चेयरमैन अमर बाउरी ने कहा था कि जेपीएससी में बिचैलिया तंत्र काम करता है. उस बिचैलिये तंत्र के प्रभाव में हुई परीक्षा और रिजल्ट की प्रक्रिया को आपकी सरकार ने कैसे आगे बढ़ाया. उन्होंने कहा कि मान लिया जाये कि उस तंत्र के आगे आपकी सरकार ने भी घुटने टेक दिये हैं.
नियुक्ति पत्र देने की सरकार को क्या हड़बड़ी है
पत्र में डॉ अजय कुमार ने पूछा है कि लॉकडाउन समाप्त नहीं हुआ है. ऐसे में सरकार को नियुक्ति पत्र देने की क्या हड़बड़ी है. क्या इससे आपके सरकार की नियत पर सवाल खड़ा नहीं होता है. इससे यह धारणा बनती है कि आपने चुनाव के दौरान विद्यार्थियों से किये गए वादे के साथ धोखा किया. क्योंकि आपने पहले इन सारे तथ्यों को लेकर सदन में नेता प्रतिपक्ष रहते हुए आवाज भी उठाई है. आपने सड़क पर आंदोलनरत छात्रों का अनशन भी तोड़वाया था. इनको न्याय दिलाने का भरोसा भी दिलाया था. इस समय में न्याय करना तो दूर, लॉकडाउन की ढाल में पुरानी दोषपूर्ण प्रक्रिया को आगे बढ़ाकर फाइनल रिजल्ट जारी करना विद्यार्थियों की पीठ में छूरा घोंपना है.
नेताओं और नौकरशाहों की होती है बहाली
सवाल उठाते हुए डॉ अजय ने कहा कि पहली जेपीएससी से लेकर छठी जेपीएससी तक में नौकरशाहों और नेताओं के रिश्तेदारों की बहाली होती रही है. यह रिजल्ट भी उसी श्रृंखला की एक कड़ी है. पत्र के माध्यम से उन्होंने मांग की है कि छठी जेपीएससी असैनिक सेवा के रिजल्ट को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाये. सातवीं, आठवीं तथा नौवीं के साथ संयुक्त रूप से छठी जेपीएससी की भी परीक्षा ली जाये. भाषा के प्रश्नपत्र को सिर्फ क्वालीफाइंग रखा जाये. पूरी परीक्षा प्रक्रिया को एक वर्ष की तय अवधि के अंदर करायी जाये. कैलेंडर भी जारी किया जाये.




