
Dumka: एक ओर जहां पूरी दुनिया कोरोना महामारी से जंग लड़ रही है. इस वैश्विक महामारी से बचने के लिये बार-बार साबुन से हाथ धोने की सलाह दी जा रही है. वहीं दूसरी ओर झारखंड के कुछ इलाकों में पानी की इतनी कमी है कि पीने का पानी ही नसीब नहीं हो रहा.
कुछ ऐसी ही हालत है दुमका के शिकारीपाड़ा प्रखंड के झुनकी पंचायत के कुरूमटाड़ गांव स्थित नदी टोला (छोटा कुरूमटाड़) की. जहां 70 परिवारों वाला टोला पीने के पानी की समस्या से जूझ रहा है. यह आदिवासी बाहुल्य टोला है.
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एकमात्र चापाकल की हालत दयनीय
पानी के स्त्रोत के लिए मात्र एक चापाकल और एक छोटा कुआं है, लेकिन दोनों की स्थिति दयनीय है. चापाकल से पर्याप्त पानी नहीं निकलता है. एक बार चापाकल चलाने से मात्र 3 से 5 बाल्टी पानी निकलता है और उसके बाद पानी निकलना बंद हो जाता है. एक घंटा के बाद कुछ बाल्टी पानी निकलता है फिर पानी निकलना बंद हो जाता है.
गांव का कुआं भी है जर्जर
टोला में मौजूद कुआं की स्थिति भी ठीक नहीं है. ग्रामीणों का कहना है कि कुआं करीब 100 साल पुराना है. और गर्मी के समय इसमें पानी नहीं रहता है. 5-6 बाल्टी पानी निकालने से ही कुआं के पानी ख़त्म हो जाता है. अक्सर इसमें सांप आदि गिरते रहते हैं. उससे भी पानी प्रदूषित हो जाती है.
चापाकल और कुआं से पर्याप्त मात्रा में पीने का पानी नहीं होने के कारण ग्रामीण छोटी सी नदी जिसे स्थानीय भाषा में जोरिया कहा जाता है, उसका गंदा पानी पीने को मजबूर है. इसी जोरिया में एक तरफ मवेशी स्नान करते है तो दूसरी तरफ इंसान इस गंदे जोरिया का पानी पीने व खाना बनाने में इस्तेमाल करने के लिये मजबूर हैं.
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क्या कहते हैं ग्रामीण
ग्रामीण कहते हैं कि टोला में पानी की विकराल समस्या है. यह जानते हुए कि ये पानी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, इसका उपयोग कर रहे हैं. ग्रामीणों ने कहा कि जन प्रतिनिधि आंखे बंद किये हुए है, वोट के समय नेता बोलते हैं कि वोट दिजीये पानी की समस्या का समाधान हो जायेगा. लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं.

युवाओं का कहना है कि जब से आंख खोले हैं हमलोग के गांव की स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है. ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से पानी की समस्या दूर करने का अनुरोध किया है. और गांव में डीप बोरिंग के साथ ही जल मीनार भी बनाने की मांग की है.
ग्रामीणों द्वारा पेयजल की समस्या को रखने वालों में वार्ड रुबिलाल मुर्मू, प्राणिक चरण मुर्मू, भक्तो गोविन्द टुडू,शंतिलता मुर्मू,मांडो मरांडी,जोशोमती मरांडी,मति हेम्ब्रोम,महिला मुर्मू,मेरी हेम्ब्रोम,बाले टुडू,सालोमी मुर्मू, सुशीला पवरिया,पानसुरी मरांडी,रमेश मरांडी,जीतन टुडू,कालिदास सोरेन,नोरेन सोरेन,सोनातन सोरेन,सोमय किस्कू,दासमत मरांडी,बुदू किस्कू, कालिदास किस्कू आदि मौजूद थे.
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