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सुनिये और वीडियो देखिये सरकार, झारखंड-बिहार के 53 सांसद: कर्नाटक में कैसे मजदूरों को मिल रही धमकी

Ranchi: दक्षिण भारत के बेंगलुरू शहर से न्यूज विंग को एक मजदूर ने एक वीडियो भेजा है. वीडियो में साफ सुना जा सकता है कि कैसे वहां की कंपनियों के मालिक झारखंड व बिहार के मजदूरों को डरा रहे हैं. बकायदा एक मिनी ट्रक में बड़े-बड़े साउंड बॉक्स लगाकर अनाउंस कर रहे हैं कि

“अगर कोई भी मजदूर वापस अपने राज्य झारखंड जाएगा, तो उसे वहां छाती और पेट के बल 21 दिनों तक के लिए जमीन पर लेटने को मजबूर किया जाएगा. ना आपके हाथ में मोबाइल होगा और ना ही आपको आपके परिवार वालों से मिलने दिया जाएगा. ना ही आप कोई काम कर सकते हैं और ना ही कहीं जा सकते हैं. 21 दिनों तक ऐसे ही रहना होगा.

21 दिन सरकारी जेल में रहना आसान है. लेकिन क्वॉरेंटाइन में रहना बहुत ही मुश्किल है. गिनी-चुनी रोटी मिलेगी और खाना मिलेगा. वापस गये तो अपने-आप को गाली देते रहना कि क्यों वापस आये. इसलिए जो जहां हैं, वहीं रुके.

कुछ ही दिनों में यहां की कंपनियां शुरू हो जाएगी. जिसके बाद सभी को काम मिलेगा. फिलहाल प्रशासन की मदद कीजिए. कोई भी दिक्कत हो तो पुलिस थाना जाइए. पुलिस वाले आपकी मदद करेंगे. बस कहीं भी बाहर जाने की कोशिश ना करें. अपने गांव जाने की कोशिश ना करें. इसी में आप लोगों की भलाई है. धन्यवाद”

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घटना रूरल बेंगालुरू जिले की है. इस जिले में 5000 से ज्यादा मजदूर झारखंड के हैं. वहां फंसे एक मजदूर ने न्यूज विंग को बताया कि यहां से अपने घर वापस लौटने की वो हर संभव प्रयास कर चुका है. लेकिन कुछ नहीं हो पा रहा है. उसने कहा कि झारखंड सरकार की तरफ से जो प्रवासी मजदूरों के घर वापसी के लिए ऐप लॉन्च हुआ था, उसपर कब का रजिस्टर्ड कर चुके हैं. पीडीएफ फाइल भी डाउनलोड कर ली है. लेकिन कोई संदेश अभी तक नहीं आया है.

कर्नाटक सरकार की तरफ से सेवा सिंधू डॉट कॉम पर भी घर वापसी के लिए रजिस्ट्रेशन कर चुका हूं. लेकिन कोई संदेश अभी तक नहीं आया है. करीब 20 दिनों से झारखंड सरकार के कर्नाटक नोडल पदाधिकारी अजय कुमार सिंह को फोन कर रहा हूं. लेकिन उनका फोन लगता ही नहीं है. अपने जामताड़ा विधायक इरफान अंसारी का फोन मिलाते-मिलाते थक चुका हूं. व्हाट्सएप पर कई बार मैसेज कर चुका हूं. लेकिन कोई जवाब नहीं आया है.

मजदूर ने कहा कि यहां जितने भी मजदूर फंसे हैं सभी का मेडिकल चेकअप हो चुका है. फिलहाल सभी स्वस्थ हैं. लेकिन यहां कोरोना तेजी से फैल रहा है. हमें डर है कि कहीं यहां हम संक्रमित ना हो जाएं. इसलिए हम जल्द से जल्द घर वापस जाना चाहते हैं. बात करते-करते मजदूर का गला भारी हो गया. उसने आखिर में अपना फैसला सुना दिया. उसने कहा कि अगर सरकार हमारी सुध नहीं लेती है, तो हमलोग यहां से पैदल ही निकल पड़ेंगे. अधमरा ही सही अपने घर वापस तो पहुंच सकेंगे. ऐसा करना यहां मरने से बेहतर है.

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