
Ranchi: 18 अप्रैल को न्यूजविंग की टीम कांके के हाथीगोंदा की वैसी गर्भवती महिलाओं के बीच पहुंची थी जिनकी जिंदगी ‘हर दिन कमा कर लाओ, हर दिन पका कर खाओ’ की थ्योरी पर चलती है. ये वैसी गर्भवती महिलाएं थी, जो गर्भ के सातवें तो कई आठवें महीने तक काम पर जाती हैं. इनके लिए बेड रेस्ट जैसा कोई शब्द नहीं होता है.
ये महिलाएं हर दिन काम करती हैं तो बमुश्किल दो सांझ चूल्हा गर्म हो पाता है. गर्भावस्था के दौरान विटामिन, प्रोटीन, आइरन, फल, दूध, हरी सब्जियां जैसी जरूरी खाने-पीने की चीजें इनके सपने में भी नहीं आती.
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जिला प्रशासन ने की मदद
ऐसी गर्भवती महिलाओं के दर्द पर अब मरहम लगा है. ‘लॉकडाउन की पाबंदियों के बीच कराह रही जिंदगियां, पानी में चूड़ा फूला कर खाने को मजबूर गर्भवती’ शीर्षक से खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासन ने इन्हें वो सारी आवश्यक खाने-पीने की वस्तुएं उपलब्ध करायी जो एक गर्भवती के लिए जरूरी है.
प्रशासन ने यह भी माना की महिलाओं को आंगनबाड़ी से 3 माह से राशन नहीं मिल रहा था. इसे देखते हुए सदर एसडीपीओ की ओर से सभी 14 गर्भवती महिलाओं को विशेष राशन किट दिया गया. जिसमें आटा, तेल, दाल, गुड़, चूड़ा, बादाम, नमक और साबुन शामिल था. उन्हें यह स्पेशल सामग्री प्रतिज्ञा नामक राहत कार्य के दौरान दी गयी.
प्रशासन की ओर से महिलाओं को सहायता मिलने के बाद सभी ने तहे दिल से न्यूजविंग को उनका दर्द बयां करने के लिए धन्यवाद कहा. गर्भवती महिलाओं की आंखों की चमक और चेहरे पर बिखरी मुस्कान मानों कह रही हो अब देश का भावी भविष्य तंदरूस्त होगा. राहत सामग्री के साथ ही उन महिलाओं के स्वास्थ्य की जांच कई सामाजिक संगठनों की ओर से की गयी.
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