
Ranchi: झारखंड में नक्सली हथियार डाल रहे हैं. पिछले तीन महीने के दौरान राज्य के अलग-अलग जिले में 7 नक्सलियों ने पुलिस के समक्ष सरेंडर कर दिया. मुठभेड़ में चार नक्सलियों को पुलिस ने मार गिराया है.
सरेंडर करने वाले नक्सलियों में पांच लाख के चार, दो लाख का एक इनामी नक्सली और दो ऐसे नक्सली थे जिनके ऊपर कोई इनाम घोषित नहीं था. झारखंड पुलिस के आंकड़े के मुताबिक अब भी झारखंड पुलिस की रडार पर कुल 199 नक्सली हैं. पुलिस लगातार नक्सलियों के खिलाफ जंगलों में सर्च ऑपरेशन चला रही है.
राज्य के 24 में से 19 जिले उग्रवाद प्रभावित
झारखंड विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग ने गृह मंत्रालय द्वारा 5 फरवरी 2019 को नक्सल प्रभावित राज्यों की जारी अधिसूचना के आधार पर राज्य में पांच चरणों में चुनाव कराने का फैसला किया था. अधिसूचना में कहा गया है कि राज्य के 24 में 19 जिले उग्रवाद प्रभावित हैं.
इनमें 13 जिले अति उग्रवाद प्रभावित हैं. केंद्र सरकार द्वारा उग्रवाद प्रभावित राज्यों को दी गई 775 करोड़ की विशेष आर्थिक सहायता में भी झारखंड को 340 करोड़ रुपये दिये गये थे. हालांकि इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास और अन्य मंत्रियों-नेताओं के द्वारा लगातार बयान दिया जाता रहा कि झारखंड में उग्रवाद में 45 फीसदी की कमी आयी है.
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चुनौतियां भी कम नहीं
नक्सल उन्मूलन के लिए झारखंड सरकार को व्यवहारिक दृष्टिकोण से से कई कठिनाइयों और चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. कुछ माओवादियों ने संगठन छोड़कर अपना दूसरा संगठन तैयार कर लिया है, जो हिंसात्मक कार्रवाई व लेवी वसूलने में संलिप्त हैं.
इन स्पिलिंटर ग्रुप में मुख्य रूप से टीपीसी, जेपीसी, पीएलआइएफ एवं जेजेएमपी शामिल हैं. इन संगठनों द्वारा विकास कार्य में लगी एजेंसी से लेवी वसूल किये जाने, मशीनों में आगजनी और मजदूरों के साथ मारपीट की घटनाएं होती रहती है. कुछ माओवादी लूट, डकैती, रंगदारी वसूलने जैसे आपराधिक कार्यो में शामिल हो गये हैं. हालांकि, सुरक्षा बलों द्वारा ऐसे आपराधिक तत्वों की पहचान कर कई स्थानों पर ठोस व कारगर कार्रवाई की जा रही है.
आकर्षक सरेंडर नीति के कारण कई बड़े नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण
उल्लेखनीय है कि झारखंड सरकार नक्सलवाद के खात्मे के लिए कई साल से प्रयास कर रही है. राज्य से नक्सलवाद के दंश को मिटाने के लिए पूर्ववर्ती सरकार ने सरेंडर पॉलिसी बनायी थी. सरकार की आकर्षक सरेंडर नीति के कारण कई बड़े नक्सलियों ने सरेंडर कर दिया.
जिन लोगों ने सरेंडर नहीं किया, उनमें से बहुत से नक्सलियों को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया और कई को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. पुलिस और प्रशासन मिलकर नक्सलियों से परिवार से संपर्क कर रही है. पुलिस उनसे अपील कर रही है, कि वे अपने भटके हुए परिजनों को मुख्यधारा में शामिल करने में प्रशासन की मदद करें. इसका भी लाभ उन्हें मिल रहा है.
गौरतलब है कि नक्सलियों के सफाये के लिए राज्य के उग्रवाद प्रभावित जिलों में लगातार नक्सल विरोधी अभियान चलाये जा रहे हैं. इस दौरान पुलिस के साथ मुठभेड़ में काफी संख्या में नक्सली मारे गये हैं. प्रदेश में सक्रिय नक्सलियों और उनके ठिकानों को नष्ट करने के लिए सुरक्षा बलों के जवानों के साथ मिलकर राज्य की पुलिस जंगलों से लेकर शहर तक लगातार दबिश दे रही है. इससे घबराकर भी कई नक्सली सरेंडर कर रहे हैं.
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पिछले 3 महीने में 7 नक्सलियों ने किया सरेंडर
23 जनवरी 2020: आत्मसमर्पण पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर लातेहार जिले में आतंक के पर्याय बने टीपीसी सब जोनल कमांडर गोपाल उर्फ वासुदेव गंझू ने रांची एसएसपी के समक्ष हथियार डाल दिया.
24 जनवरी 2020: झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत दुमका पुलिस के प्रयास नयी दिशा के तहत दुमका के तीन हार्डकोर नक्सली राजेंद्र राय, छोटा श्यामलाल देहरी और रिमिल दा ने दुमका पुलिस के सामने आत्मसर्पण किया था.
6 मार्च 2020: सिमडेगा में दो नक्सलियों ने आत्मसमर्पण नीति के तहत पुलिस के सामनेसरेंडर किया था. दोनों भाकपा माओवादी संगठन से जुड़े थे. इनमें भाकपा माओवादी का जोनल कमांडर विनोद पंडित उर्फ विनोद दास और एरिया कमांडर गणेश लेहरा उर्फ भगवान शामिल थे. विनोद पंडित पांच लाख और गणेश लोहरा पर दो लाख रुपए का इनाम था.
16 अप्रैल 2020: लोहरदगा में भाकपा माओवादी दस्ता के सब जोनल कमांडर ने सरेंडर किया था. वह जिले के पेशरार के रोरद गोमिया टोली का रहने वाला है. 24 वर्षीय रामजीत गनेशिया उर्फ रामू ने जिला पुलिस मुख्यालय में आत्मसमर्पण किया था.
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