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ओपेन जेल में बंद सरेंडर नक्सलियों के परिजनों ने पुलिस अफसरों से कहा- सरेंडर पॉलिसी से उठ रहा विश्वास

Ranchi: हज़ारीबाग़ ओपेन जेल में पिछले 4-5 सालों से बंद आत्मसमर्पित नक्सलियों के परिजनों ने राज्य के पुलिस मुख्यालय में सोमवार को आला पुलिस अधिकारियों से मिलकर आठ सूत्री मांग पत्र सौंपा.

मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, डीजीपी, हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस, एडीजी नक्सल अभियान और एडीजी विशेष शाखा को नक्सलियों के परिजनों ने पत्र लिखते हुए कहा है कि सरकार द्वारा के केस पैरवी के लिए सारा खर्च देने की बात कही गयी है.

लेकिन कुछ आत्मसमर्पित बंदियों के लिए कहीं-कहीं सरकार के द्वारा वकील नियुक्त किये गये हैं, लेकिन उन्हें पैसा नहीं मिल पा रहा है. अभी तक कहीं किसी जिले में आत्मसमर्पित बंदियों के केस को फास्ट ट्रैक कोर्ट के द्वारा निष्पादन नहीं कराया जा रहा है. सामान्य न्यायालयों द्वारा केस निष्पादन प्रक्रिया चलायी जा रही है.

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न्यायालय में करना पड़ रहा है परेशानियों का सामना

आत्मसमर्पण किये नक्सलियों के परिजनों का कहना है कि न्यायालय में वकील, पीपी, पेशकार के द्वारा हम सभी को बहुत अनावश्यक तरीके से परेशान किया जा रहा है.

पीपी, पेशकार के व्यवहार के कारण कहीं-कहीं न्यायधीश महोदय के द्वारा केस निष्पादन पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है. इस कारण 4 से 8 साल से जेल कस्टडी के बाद भी केस का निष्पादन नहीं हो पा रहा है.

हम सभी के परिवार जनों को बच्चे के देखभाल, पढ़ाई-लिखाई करवाने तथा अन्य घरेलू समस्याओं से जूझना पड़ रहा है.

सरकार की सरेंडर नीति से उठता जा रहा है भरोसा

आत्मसमर्पण किये नक्सलियों के परिजनों द्वारा लिखे पत्र में कहा गया है कि आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत समर्पित नक्सलियों के लिए जो प्रावधान बनाये गये हैं, उसके मुताबिक फास्ट ट्रैक कोर्ट के द्वारा केसों की शीघ्र गति से निष्पादन नहीं होना, लंबे समय तक जेल में रहना तथा अन्य पुनर्वास नीति का लाभ नहीं मिलना, इस स्थिति से अन्य सरेंडर करने वाले माओवादी एवं आम जनता को सरकार की सरेंडर नीति से भरोसा उठता जा रहा है.

आत्मसमर्पण, पुनर्वास एवं प्रोत्साहित नीति राज्य एवं देश हित के लिए अत्यंत सुनियोजित और खून-खराबा से निजात एवं शांति-व्यवस्था बहाल करने वाली कारगर पॉलिसी है इस पॉलिसी पर ध्यान देना अति आवश्यक है यदि संभव हो तो बंगाल तथा आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना राज्य के तर्ज पर नीति बनाने की कृपा करें.

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समस्या के समाधान के लिए इन बिंदुओं पर ध्यान देने का आग्रह

  • आत्मसमर्पित बंदियों को केस फास्ट ट्रैक कोर्ट के द्वारा शीघ्र गति से निष्पादन करा दिया जाये.
  • आत्मसमर्पित बंदियों को अपना परिचित वकील नियुक्त करा दिया जाये तथा उन्हें सरकार के द्वारा पैसा दिया जाये.
  • आत्मसमर्पित बंदियों को केसों से संबंधित न्यायालयों में पीपी, पेशकार तथा न्यायाधीश महोदय के द्वारा केस शीघ्र गति से निष्पादन हो, इस पर ध्यान दें.
  • समर्पित बंदियों के बच्चे को शिक्षा एवं हॉस्टल खर्च दिया जाये. अभी तक किसी के बच्चे को शिक्षा खर्च नहीं दिया गया है.
  • गृह निर्माण हेतु सुरक्षित स्थान पर जमीन जल्द दिया जाये तथा मकान बनाने हेतु राशि दी जाये.
  • आत्मसमर्पण के एक 2 वर्ष बाद मिलने वाली वार्षिक पुनर्वास राशि जिन्हें नहीं मिली है उन्हें दी जाये.
  • प्रत्यर्पण बंदियों की पत्नी को जीविकोपार्जन तथा तत्काल रहने हेतु रेंट रूम खर्च दिया जाये.
  • प्रत्यर्पित बंदियों को जीवन बीमा प्रत्यर्पण प्रमाण पत्र एवं अन्य पुनर्वास लाभ देने की कृपा की जाये.

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