
Dilip Kumar
Palamu: पांच वर्ष तक झारखंड में रही रघुवर दास की सरकार ने खासमहाल भूमि के लीजधारकों को सिर्फ लॉलीपॉप थमाया. यह मामला उस समय में जितना कड़वा था और आज भी उतना ही पेचिदा बना हुआ है.
राज्य में हेमंत सोरेन की नयी सरकार बनी है. ऐसे में मेदिनीनगर में लीज लैंड पर रहने वाले लोग इस सरकार से अपनी नैया पार लगाने की गुहार लगा रहे हैं.
घोषणा के बाद भी रघुवर सरकार नहीं की थी फ्री होल्ड
रघुवर दास ने अपनी चुनाव यात्रा से कुछ माह पहले यह घोषणा कर दी थी कि मेदिनीनगर में लीजधारियों की लीजभूमि को फ्रीहोल्ड कर दिया गया है.
लीजधारी इस घोषणा से बाग-बाग थे, लेकिन जब राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने आदेश को सार्वजनिक किया, तो लोगों के होश फाख्ता हो गये. फ्री होल्ड की शर्तें जानकर लोगों की नींद उड़ गयी थी.
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कमर तोड़ हैं शर्तें
राजस्व विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार लीजधारी जिस खासमहाल भूमि पर काबिज हैं, उसको फ्री होल्ड में परिवर्तित करने के लिए लीजधारी को पहले अपनी भूमि का लीजनवीकरण कराना अनिवार्य है.
जिनका नवीकरण नहीं हुआ, वे फ्री होल्ड का झुनझुना लेकर घूमते रहेंगे. यहां यह जानना भी जरूरी है कि लीज नवीकरण की शर्तें जटिल एवं क्रूर न होती तो अभी तक 90 प्रतिशत लीजधारी नवीकरण करा चुके होते.
लीज नवीकरण की अति कठोर शर्तों से त्रस्त लीजधारियों ने फ्री होल्ड करने की मांग पर जोर दिया.
किसी संगठन के आग्रह को नहीं सुनी थी रघुवर सरकार
कई व्यवसायिक संगठनों, सामाजिक एवं राजनीतिक संगठनों ने भी मुख्यमंत्री के समक्ष जनता की फरियाद को रखा और सहानुभूति पूर्वक उस पर विचार कर सकारात्मक निर्णय लेने की विनम्र अपील की.
इन संगठनों में पलामू चैंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज का नाम प्रमुखता से लिया जा सकता है. इसके अलावा डालटनगंज के भाजपा विधायक आलोक चौरसिया, सांसद विष्णुदयाल राम, पूर्व विधायक राधाकृष्ण किशोर, मेदिनीनगर नगर निगम की महापौर अरुणा शंकर ने मुख्यमंत्री रघुवर दास पर काफी दबाव बनाया और तत्कालीन सरकार को फ्री होल्ड की घोषणा करने को बाध्य कर दिया.
चुनावी स्टंट रहा ‘फ्री होल्ड’
‘फ्री होल्ड’ चुनावी स्टंट साबित हुआ. जो संगठन फ्री होल्ड के फैसले पर अपनी पीठ थपथपा रहे थे वे भी अब लोगों से नजरें चुरा रहे हैं. उनके चेहरों पर भी मायूसी स्पष्ट दिखायी दे रही है.
केएन त्रिपाठी ने की थी कड़ी आलोचना
झारखंड के वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और पूर्वमंत्री केएन त्रिपाठी ने तत्कालीन भाजपा सरकार द्वारा जारी फ्री होल्ड की अधिसूचना को मूर्ख बनाने वाला बताया था.
त्रिपाठी के अनुसार लीजधारी ‘ताड़ से गिर कर खजूर में अटक गये हैं. उनका आरोप था कि भाजपा सरकार ने लीजधारियों को मूर्ख बनाया है. सरकार ये अच्छी तरह जान रही है कि लीजधारी नई शर्तों के तहत फ्री होल्ड नहीं करा पायेंगे.
स्थिति पहले वाली बनी रह जायेगी. लीजधारियों को ट्रेस पॉसर बता कर भूमि पर सरकार कब्जा कर लेगी. लोगों को बेघर करने की मंशा है भाजपा सरकार की.
लेकिन अब चुकी राज्य में उनकी पार्टी के समर्थन से सरकार चल रही है. ऐसे में उन्हें पहल कर आसान शर्तों पर लीज लैंड को फ्री होल्ड कराना चाहिए.
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फ्री होल्ड की शर्तों आसान बनाए हेमंत सरकार: भाजपा नेता
पलामू चैंबर ऑफ कामर्स के अध्यक्ष दुर्गा जौहरी ने कहा है कि त्रिपाठी जी, आज तो आपकी सरकार है, क्यों नहीं आप फ्री होल्ड के मामले में अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर रहे हैं?
क्या विधानसभा चुनाव में अपनी करारी हार से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के सामने जाने से कतरा रहे हैं या शरमा रहे हैं?
जौहरी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से आग्रह किया है कि फ्री होल्ड की शर्तों को आसान करते हुए लीज नवीकरण की क्रूरतम शर्तों को समाप्त करने की कृपा करें.
मेदिनीनगर में हजारों है लीजधारियों की संख्या
पलामू जिला मुख्यालय मेदिनीनगर में लीज धारियों की संख्या हजारों में है. लीज की अवधि 30 वर्ष होती है और लीज अवधि समाप्त होने से पूर्व लीज नवीकरण कराना अनिवार्य है.
अधिकांश लीजधारी सरकार की फ्री होल्ड घोषणा से खुश हैं और वे नियमानुसार लीजनवीकरण करा कर फ्री होल्ड के लिए तैयार हैं लेकिन उनकी मांग है कि लीज नवीकरण में सलामी की शर्त को समाप्त कर दिया जाये.
बिहार में सलामी लेने पर लगी है रोक
उल्लेखनीय है कि बिहार सरकार ने भी लीज के नवीकरण के लिए सलामी का प्रावधान किया था.. लीजधारियों द्वारा एक लंबी लड़ाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने एक आदेश पारित कर सलामी के प्रावधान को गलत और अन्यायपूर्ण बताते हुए इस पर रोक लगा दी.
अपने आदेश में न्यायालय ने स्पष्ट किया कि लीज नवीकरण के मामले में सलामी लेना गलत है अगर नयी जमीन या लीज के नये मामले आते हैं तो सलामी का प्रावधान हो सकता है.
अव्यवहारिक है सलामी का निर्णय
झारखंड मुक्ति मोर्चा के पलामू जिला अध्यक्ष राजेन्द्र सिन्हा का कहना है कि लीज नवीकरण में सलामी का पूर्व सरकार द्वारा किया गया फैसला बिल्कुल अव्यवहारिक है.
ऐसा प्रतीत होता है कि ये सलामी नहीं रंगदारी है, जो पूर्व सरकार चाबुक के सहारे लीजधारियों से वसूलने की तैयारी में थी.
वर्तमान सरकार के मुखिया हेमंत जी इस मामले में लचीला रूख जरूर अपनाएंगे और पलामू झामुमो उनसे मिल कर लोगों के कष्टों की जानकारी देकर सलामी की शर्त हटवाने के लिए अपील करेगा.
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