
Ranchi : झारखंड कांग्रेस प्रदेश अध्य़क्ष डॉ अध्यक्ष कुमार के इस्तीफा के बाद नये अध्यक्ष के नामों पर चर्चा जोरों पर है. पुख्ता सूत्रों का मानना है कि पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और वर्तमान में लोहरदगा से विधायक सुखदेव भगत को शीर्ष नेतृत्व नया प्रदेश अध्यक्ष बना सकता है.
सुखदेव भगत को प्रदेश अध्यक्ष बनाये जाने के पीछे कांग्रेस पार्टी की मंशा विधानसभा चुनाव देख आदिवासी कार्ड खेलने की है. शनिवार को सीडल्ब्यूसी की दिल्ली में होने वाली बैठक में नये प्रदेश पर निर्णय लिया जाना है.
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आलमगीर हैं दूसरे विकल्प
बताया यह भी जा रहा है कि अगर सुखदेव भगत पर शीर्ष नेतृत्व एकमत नहीं होता है, तो पार्टी विधायक दल के नेता (सीएलपी नेता) आलमगीर आलम को भी प्रदेश अध्य़क्ष बनाया जा सकता है. इसके अलावा चुनाव देख नये प्रदेश अध्य़क्ष बनाये जाने के साथ तीन कार्यकारी अध्यक्ष बनाये जाने की चर्चा भी जोरों पर है.
बता दें कि वर्तमान प्रदेश अध्य़क्ष डॉ अजय कुमार ने पार्टी के सहयोगियों नेताओं पर गंभीर आरोप लगाते हुए इस्तीफा दे दिया है. इस्तीफे में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि डॉ. अजय कुमार ने अपने कांग्रेस सहयोगियों की तुलना संगीन अपराधियों से की है.
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आदिवासी समाज का एक बड़ा चेहरा
सुखदेव भगत के नाम की चर्चा इसलिए जोरों पर है, क्योंकि प्रदेश के पूर्व अध्य़क्ष रहने के साथ ही वे राज्य में आदिवासी समाज का एक बड़ा चेहरा माने जाते हैं. पार्टी के सभी विंग (यूथ कांग्रेस, महिला कांग्रेस, अल्पसंख्यक) पर उनकी काफी अच्छी पकड़ मानी जाती है.
विधानसभा सत्र के दौरान भी कई मुद्दों को लेकर उनकी सक्रियता भी देखी जाती रही है. लोकसभा चुनाव के दौरान जब मोदी लहर में महागठबंधन के लगभग सभी उम्मीदवारों के हार का अंतर काफी ज्यादा था, उस वक्त भी सुखदेव भगत केवल 7000 वोटों से ही चुनाव हारे थे. हालांकि इस बीच प्रदेश विधायक दल के नेता (सीएलपी नेता) आलमगीर आलम पर भी पार्टी प्रदेश अध्य़क्ष के रूप में दांव खेल सकती है. डॉ अजय कुमार ने अपने सौंपे इस्तीफा में आलमगीर आलम की जमकर तारीफ की है. पत्र में अजय कुमार ने उन्हें अपना एक प्रतिष्ठित सहयोगी बताया है.
कार्यकारी अध्यक्षों में युवा नेता को मिल सकती हैं जगह
नये प्रदेश अध्य़क्ष बनाए जाने के साथ इस बार तीन कार्यकारी अध्यक्षों को बनाये जाने की चर्चा जोरों पर है. पुख्ता सूत्रों का कहना है कि बनाये जाने वाले इन कार्यकारी अध्यक्षों में युवा और महिला नेता को जगह दी जा सकती है. इसके पीछे का उददेश्य महिला और युवा कांग्रेसी नेताओं को आगे बढ़ाना है. इन नेताओं में पूर्व और वर्तमान प्रदेश अध्य़क्ष सहित कई तेजतर्रार नेता शामिल है.
बता दें कि लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद जब पार्टी के सभी विंग के नेता हतोत्साहित हो चले थे, तो उस दौरान इन युवा और महिला विंग की नेता ऐसे थे, जो लगातार सरकारी विरोधी नीतियों के खिलाफ कार्यक्रम करते रहे. इसमें मुख्यमंत्री आवास और विधानसभा का घेराव प्रमुखता से शामिल हैं.
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