Ranchi

हुसैनाबाद विधायक शिवपूजन मेहता ने दिया इस्तीफा, कहा – याचना नहीं अब रण होगा

Ranchi : हुसैनाबाद विधायक कुशवाहा शिवपूजन मेहता ने शुक्रवार को विधानसभा में स्पीकर को अपना इस्तीफा सौंप दिया.

मॉनसून सत्र के अंतिम दिन दूसरी पाली में कुल 31 अभिस्ताव लाये गये जिसमें शिवपूजन कुशवाहा ने जपला में सीमेंट फैक्ट्री के स्थान पर दूसरी फैक्ट्री स्थापित करने की मांग की. इससे पहले भी वे यही मांग करते रहे हैं. पिछली बार मुख्यमंत्री ने आश्वासन भी दिया था, इसके बावजूद कुछ नहीं हुआ. इसका जिक्र शिवपूजन ने शुक्रवार को भी किया.

इस पर विभागीय मंत्री सीपी सिंह ने जवाब देते हुए कहा कि सरकार कोई उद्योग नहीं लगाती. उसके बाद अभिस्ताव वापस लेने को कहा गया. वे नहीं माने तो स्पीकर ने कहा- आप वापस लेंगे या नहीं? इस पर शिवपूजन ने कहा कि अभिस्ताव वापस नहीं लूंगा, इस्तीफा दूंगा. स्पीकर ने कहा- आप अपना इस्तीफा लिखकर दीजिये. कुशवाहा ने लिखित इस्तीफा सौंप दिया.

शिवपूजन मेहता के सवाल पर सीपी सिंह ने कहा कि सरकार उद्योग नहीं लगाती,आप निवेशक लायें तो उद्योग लगा दी जायेगी. इसपर शिवपूजन ने जवाब तलब करते हुए कहा कि हम मोमेंटम नहीं करा सकते. साथ ही कहा कि शराब बेचकर सरकार ने करोड़ों कमाया.

वो भी तो उद्योग है. इस बात पर हेमंत सोरेन ने मेहता को विधानसभा में बैठने की अपील की. लेकिन दो-तीन मिनट सदन में बैठने के बाद शिवपूजन मेहता सदन के बाहर निकले और परिसर में ही बैठ गये. मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि इस्तीफा स्पीकर को दे दी गयी है.साथ ही कहा –अब याचना नहीं रण होगा.

वहीं शिवपूजन मेहता के इस्तीफा देते ही स्पीकर दिनेश उरांव ने उनसे अभिस्ताव प्रस्ताव लेने को कहा. लेकिन विधायक नहीं माने और अपना इस्तीफा स्पीकर को देकर चल दिये. साथ ही कहा कि वे अब अपना इस्तीफा वापस नहीं लेगें, स्पीकर चाहें तो उसे स्वीकार करें या ना करें.

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मुख्यमंत्री करते हैं घोषणा का होता है सदन का अपमान

हुसैनाबाद विधायक शिवपूजन मेहता ने दिया इस्तीफा, कहा - याचना नहीं अब रण होगा
शिवपूजन मेहता का इस्तीफा

 

इस्तीफा देते हुए मेहता ने कहा कि बहुत दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि विधायक बनने के बाद लगा कि अपने क्षेत्र का विकास करूंगा. कई बार विभिन्न मामलों को विधानसभा में उठाया भी गया. मुख्यमंत्री ने सदन में उन समस्याओं के समाधान की घोषणा भी की. लेकिन फिर भी किसी समस्या का समाधान नहीं हो पाया.

जपला सीमेंट फैक्ट्री को पूर्ण स्थापित करने की बात सदन में पिछले साल उठायी गयी. आरक्षण 2001 के आधार पर 73 प्रतिशत देने पर भी ध्यान आकृष्ट किया गया. लेकिन सदन का अपमान है कि मुख्यमंत्री घोषणा करने के बाद भी कार्य पूरा नहीं करते. जपला सीमेंट फैक्ट्री नीलाम कर दी गयी. सरकार के आश्वासन का कोई भरोसा नहीं.

भ्रष्टाचार, भवन निमार्ण ध्यान आकृष्ट किया लेकिन कोई पहल नहीं

हुसैनाबाद विधायक शिवपूजन मेहता ने दिया इस्तीफा, कहा - याचना नहीं अब रण होगा
शिवपूजन मेहता का लिखा पत्र

इस पत्र में उन्होंने कहा कि विधायक बनने के बाद से लगातार कई मुद्दे उठाये गये. लेकिन किसी पर भी सरकार ने कोई पहल नहीं की. पलामू जिला में बटाने जलाशय योजना सालों से बनकर तैयार है. कुछ असामजिक तत्वों ने डैम का फाटक उठाकर बेल्ड कर दिया है. इसी तरह भ्रष्टचार, भवन निर्माण से सबंधित मामले भी सदन में उठाये गये. वर्तमान सत्र में भी इन मामलों पर ध्यान आकृष्ट किया गया. लेकिन कोई हल नहीं निकल पाया.

सरकार के कार्यकाल में अधिकारी बेलगाम हो गये हैं

अधिकारियों का जिक्र करते हुए इन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में अधिकारी बेलगाम हो गये हैं. हुसैनाबाद अनुमंडल पदाधिकारी, हुसैनाबाद थाना प्रभारी और अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी की ओर से प्रेस कांफ्रेंस कर मुझे उग्रवादी और अपराधी बताया गया. ऐसे में सरेआम एक जनप्रतिनिधि का अपमान अधिकारी कर रहे हैं. विषेशाधिकार लगाने के बाद भी इसपर कुछ नहीं किया गया. राज्य की गिरती कानून व्यवस्था पर सरकार कुछ नहीं कर रही.

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नीरा यादव ने सदन में प्रश्न करने पर धमकी दी

वहीं उन्होंने शिक्षा मंत्री नीरा यादव का जिक्र करते हुए पत्र में लिखा है कि वर्तमान सत्र में गुरूवार को मेरी ओर से सूचना के माध्यम से ध्यान आकृष्ट किया गया. इसपर शिक्षा मंत्री नीरा यादव ने बुलाकर मुझे धमकी दी. और कहा कि आप सदन में सवाल क्यों उठा रहे हैं. विधायक ने कहा कि  मंत्री नीरा यादव ने कहा था कि आपके विधानसभा क्षेत्र के डिग्री कॉलेज एके सिंह डिग्री कॉलेज का विज्ञान संकाय में विधिकरण नहीं दूंगी.

उन्होंने पत्र में लिखा है कि बहुत दुख के साथ बताना पड़ रहा है कि निदेशक माध्यमिक दिलिप झा काफी तानाशाह और हिटलरशाही रवैया अपनाते हैं. कुछ सूचना मांगी गयी थी, जो वो दे नहीं रहे, वहीं मिलने के लिए जाने पर कहते हैं नहीं मिलेंगे. उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिती में साफ है कि अधिकारियों के सामने जनप्रतिनिधियों को बेअसर और लाचार होना पड़ता है. तो इस्तीफा ही एक विकल्प है.

ऐसे सदन में रहने का कोई औचित्य नहीं

इस्तीफा पत्र में विधायक शिवपूजन मेहता ने कहा कि समस्या का समाधान नियमन देकर करायें या आसन मजबूर है. विधायक ने स्पीकर से कहा कि जैसा कि सदन में आपने कल भी मजबूरी प्रकट की थी, तो त्याग पत्र स्वीकार करें. उन्होंने इसे झारखंड विधानसभा का काला अध्याय बताया. और कहा कि ऐसे सदन में रहने का कोई औचित्य नहीं. जहां जनप्रतिनिधि और सरकार अधिकारियों के सामने घुटने टेकते हैं.

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