
Ranchi : सूचना का अधिकार (आरटीआइ) के तहत आने वाले आवेदनों के प्रति प्रशासनिक महकमा कितना लापरवाह हो सकता है उसका एक हैरान करने वाला नमूना गोड्डा जिले के मेहरमा प्रखंड के बीडीओ ने पेश किया है. उन्होंने झारखंड में बाल विवाह के आंकड़े देने की जगह मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्यों के जनजातीय विभागों की वेबसाइट के लिंक दे दिये.
दरअसल, राज्य में बाल विवाह की स्थिति और आदिम जनजातियों में बाल विवाह के आंकड़े जानने के लिये महिला, बाल विकास एवं कल्याण विभाग को एक आरटीआइ आवेदन दिया गया. कल्याण विभाग से होते हुये यह पत्र जिला कल्याण पदाधिकारियों को मिला और वहां से प्रखंड विकास पदाधिकारियों को पहुंचा.
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क्या लिखा जवाब में
इस संबध में गोड्डा के मेहरमा प्रखंड विकास पदाधिकारी की ओर से जो जवाब दिया गया वो काफी हैरान करने वाला है. प्रखंड विकास पदाधिकारी की ओर से निर्गत पत्र में लिखा है, “… मांगी गयी सूचना जो राज्य (झारखंड) में बाल विवाह से संबधित है. ऐसी समस्त सूचनाएं उल्लेखित वेबसाइट www.tribal.mp.gov.in / tribal.cg.gov.in पर उपलब्ध है.”
जब उक्त दोनों वेबसाइटों को खोलकर देखा गया तो एक मध्य प्रदेश जनजातीय विभाग और दूसरी छत्तीसगढ़ जनजातीय विभाग की वेबसाइट निकली.
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नहीं दी गयी बाल विवाह से संबधित जानकारी
राज्य में औसतन प्रतिवर्ष होने वाले बाल विवाहों की संख्या, 2011 से 2018 तक हुए बाल-विवाह की संख्या, आदिम जनजातियों के बीच बाल विवाह के आंकड़े आदि इस आरटीआइ आवेदन में मांगे गये थे.
इस आवेदन को अप्रैल में लगाया गया था. लेकिन न ही महिला, बाल विकास एवं कल्याण विभाग ने और न ही राज्य बाल सरंक्षण संस्था के पास आंकड़े मिले. आश्चर्च है कि राज्य में बाल संरक्षण संस्था इसी क्षेत्र में कार्य करती है.
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