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पी चिदम्बरम ने  माना, पांच ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी अचरज की बात नहीं,  यह साधारण गणित

NewDelhi : पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता पी चिदम्बरम ने  राज्यसभा में  बजट पर चर्चा के दौरान कहा कि पांच  ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी अचरज की बात नहीं,  यह साधारण गणित है. पी चिदम्बरम ने भी यह बात स्वीकार की है कि अगले पांच साल में भारतीय अर्थव्यवस्था 5 ट्रिलियन डॉलर यानी 5 लाख करोड़ डॉलर की हो जायेगी.कहा कि यह स्वाभाविक रूप से हो जायेगा. उन्होंने कहा कि हर 6-7 साल में अर्थव्यवस्था डबल हो जाती है, यह साधारण गणित है, इसमें बड़ी बात क्या है. 

 पी चिदम्बरम  के अनुसार 5 ट्रिलियन डॉलर कोई चंद्रयान लॉन्च करने जैसी बात नहीं है, यह बहुत ही साधारण गणित है.  1991 में भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार 325 अरब डॉलर का था, साल 2003-04 में यह डबल होकर 618 अरब डॉलर का हो गया. अगले चार साल में यह फिर डबल हो गया 1.22 ट्रिलियन डॉलर तक. सितंबर 2017 तक यह फिर डबल हो गया 2.48 ट्रिलियन डॉलर तक. यह फिर डबल हो जाएगा अगले पांच साल में. इसके लिए किसी प्रधानमंत्री या वित्त मंत्री की जरूरत नहीं है. यह कोई साधारण साहूकार भी जानता होगा. इसमें बड़ी बात क्या है.

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प्रधानमंत्री इसको संभालने के लिए साहसी कदम उठायेंगे

 उन्होंने कहा कि नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ 12 फीसदी के आसपास है, इसलिए इसमें कोई अचरज की बात नहीं है कि अगले पांच साल में अर्थव्यवस्था 5 ट्रिलियन डॉलर का आकार छू ले. उन्होंने कहा कि इससे भी बड़ी बात यह है कि अर्थव्यवस्था कमजोर है. मुझे उम्मीद है कि प्रधानमंत्री इसको संभालने के लिए साहसी कदम उठाएंगे. वे संरचनात्मक सुधार करेंगे, निवेश को बढ़ाने का उपाय करेंगे. भारत की जीडीपी ग्रोथ को इस साल 8 फीसदी और आगे 10 फीसदी तक ले जाने की कोशिश करेंगे.

 लोगों की बचत बढ़ाने का बजट में कोई उपाय नहीं

पूर्व वित्त मंत्री  पी चिदम्बरम ने कहा कि इस बार के बजट में लोगों की बचत बढ़ाने का कोई उपाय नहीं दिख रहा है, फिर भला विकास कैसे होगा. उन्होंने कहा, सरकार ने निवेश और निर्यात को विकास के लिए सबसे जरूरी बताया है. लेकिन आपने परिवारों की बचत के लिए इस बजट में कोई उपाय किये नहीं है और इससे मध्यम वर्ग को काफी नुकसान होने वाला है. अगर परिवारों में बचत नहीं बढ़ेगी तो घरेलू बचत को आप कैसे बढ़ायेंगे. घरेलू बचत नहीं बढ़ेगी तो घरेलू निवेश भी नहीं बढ़ेगा, ऐसे में 8 फीसदी विकास दर कहां से लायेंगे. 

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