
Giridih : उत्पाद विभाग ने रविवार सुबह गिरिडीह के सिहोडीह स्थित जिस नकली शराब फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया, वह माइका के बंद पड़े कारखाने में चल रहा था.
गिरफ्तार हुए मजदूरों ने यह भी खुलासा किया कि बंद पड़े कारखाने में नित्यदिन माइका के बुरादों की बोरियां उतारी जाती थीं और उन्हीं बोरियों में तैयार नकली शराब की पेटियों को भर कर बिहार व यूपी भेजा जाता था.
बंद पड़ा कारखाना सिहोडीह के प्रसिद्ध बंद पड़े सीमेंट फैक्ट्री के समीप है. छापेमारी के दौरान हजारों बोरे माइका के बुरादे मिले हैं जिससे इस बात का खुलासा हुआ कि बंद कारखाने को चालू दिखाते हुए वहां नकली शराब का गोरखधंधा किया जा रहा था.
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232 पेटी नकली शराब बरामद, अन्य सामान भी
उत्पाद विभाग और पुलिस पदाधिकारियों ने छापेमारी के दौरान नकली शराब से भरी 232 पेटियों के साथ बड़े पैमाने पर महंगे ब्रांड्स के कॉर्क, स्टिकर, स्प्रिट, पैकेंजिग करने वाले समान जब्त किये हैं.
हैरानी की बात यह है कि शहर से सटे सिहोडीह इलाके में बन रहे नकली शराब के फैक्ट्री की जानकारी उत्पाद विभाग को होनी चाहिए थी, लेकिन गिरिडीह पुलिस को यह जानकारी मिली.
12 घंटे चली छापेमारी

एसपी सुरेंद्र झा को मिली गुप्त सूचना के आधार पर उत्पाद अधीक्षक अवधेश सिंह और सदर एसडीपीओ जीतवाहन उरांव ने शनिवार देर रात 11 बजे सिहोडीह के बंद पड़े कारखाने में छापेमारी शुरू की जो रविवार की सुबह 11 बजे तक लगातार जारी रही.
देर रात छापेमारी के दौरान जब्त शराब पेटियों को ढोने के लिए जब मजदूर नहीं मिले, तो अधिकारियों ने सुबह होने का इंतजार किया. इसके बाद जब मजदूर मिले, तो बरामद शराब पेटियों को जब्त करने की कार्रवाई शुरू हुई.
इस दौरान उत्पाद अधीक्षक अपने जवानों के साथ कारखाने में ही मौजूद रहे. छापेमारी के दौरान टीम ने तीन मजदूरों को हिरासत में लिया जो बिहार के मुजफ्फरपुर, मोतिहारी और मोतीपुर के रहने वाले बताये जा रहे हैं. इन मजदूरों ने पूछताछ में कई बातों का खुलासा किया.
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किसी रामबाबू का है कारखाना
जबकि आसपास के लोगों ने बताया कि बंद पड़ा कारखाना किसी रामबाबू का है. वैसे इस रामबाबू का दूसरा नाम मुन्ना के रूप में भी सामने आया.
जानकारी के अनुसार सिहोडीह के इस नकली शराब फैक्ट्री के संचालन में बिहार के सिडिंकेटरों के नाम सामने आ रहे हैं जिसमें मुज्जफरपुर निवासी टुन्ना सिंह, वीरेन्द्र भगत और गोंविद साव के साथ स्थानीय सदस्य के रूप में पंकज मंडल के नाम की भी चर्चा है.
बहरहाल, छापेमारी के बाद अब उत्पाद विभाग तमाम सिडिकेंट सदस्यों के खिलाफ केस दर्ज करने की तैयारी में जुट गयी है. इसकी पुष्टि भी उत्पाद अधीक्षक ने की है.
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