
3,84,641 रुपए में लगने वाली जलमीनार को आसानी से सिर्फ 1.5 लाख रुपए में उपलब्ध कराया जा सकता है
सरकार ने लगायी दोगुना दाम, आधी कीमत पर वेंडर लगाने को तैयार
Ranchi: न्यूजविंग की एक और खबर का असर देखने को मिला है. जलमीनार निर्माण में किसी तरह की अनियमितता को रोकने के लिए उचित कदम उठाने के निर्देश ग्रामीण विकास विभाग ने दिये हैं. विभाग ने सभी जिला के पंचायत राज पदाधिकारियों को लिखा है.
विभाग ने आदेश जारी कर कहा है कि यह सुनिश्चित किया जाये कि योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की अनियमितता न बरती जाये.
दरअसल, गुरुवार को न्यूजविंग ने ‘पंचायतों में लगने वाली 3.84 लाख की जलमीनार को 1.5 लाख में लगवा रहे हैं वेंडर, बाकी राशि कमीशनखोरी की भेंट’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी. जिसके बाद विभाग ने यह आदेश जारी किया है.
विभाग ने योजनाओं में हो रहे कमीशनखोरी रोकने के लिए तकनीकी अफसरों के सहयोग प्राप्त करने के आदेश दिये हैं.
साथ ही स्पष्ट कहा कि सौर उर्जा आधारित पेयजल योजनाओं में पंचायत स्तर पर भारी अनियमितता की शिकायतें विभाग को मिल रही है. साथ ही पेयजल विभाग के तकनीकी पदाधिकारियों के परामर्श के बिना ही योजना क्रियान्वित की जा रही है.
इसपर निर्देश दिया कि इस प्रकार की योजनाओं में संबंधित विभाग के तकनीकी पदाधिकारियों से अनिवार्य रुप से सहयोग लिया जाए ताकि अनियमितता सामने न आये.
क्या है मामला
राज्य के सभी पंचायतों में जलमीनार लगने हैं. एसटी-एससी एरिया में यह जलमीनार PHED विभाग लगा रहा है. वहीं नॉन एसटी-एससी एरिया में इस काम को लाभुक समिति बनाकर पंचायत स्तर पर प्रखंड कार्यालय की देखरेख में करना है.
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इस मामले को लेकर झारखंड सरकार के ग्रामीण विकास विभाग ने सात जून को एक समीक्षा बैठक की. बैठक के बाद सभी जिलों को निर्देश भेज दिया गया.
निर्देश में कहा गया कि नॉन एससी-एसटी एरिया में जो जलमीनार लाभुक समिति बना कर लगने हैं. उसकी कीमत और स्वरूप दोनों को बदल दिया गया है.
कहा गया कि अब जो जलमीनार बनेगी, उसकी लागत पांच लाख तक हो सकती है. इसे तीन तरह के बजट में बांटा गया. पहला 3,84,691, दूसरा 4,26,122 और तीसरा 4,56,208 रुपए का. ऐसा देखा जा रहा है कि ज्यादातर पंचायतों में 3,84,691 के बजट वाली जलमीनार ही लगायी जा रही है.
सरकार ने लगाया दोगुना दाम, आधी कीमत पर वेंडर लगाने को तैयार
सरकार की कीमत के उल्ट जब न्यूज विंग ने अपनी पड़ताल शुरू की, तो इस पूरी योजना में करोड़ों रुपए का घोटाला सामने आ रहा है.
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नाम ना बताने की शर्त पर कुछ वेंडरों का कहना है कि 3,84,641 रुपए में लगने वाली जलमीनार को आसानी से सिर्फ 1.5 लाख रुपए में उपलब्ध कराया जा सकता है.
इस काम के लिए राज्यभर में करीब 200 वेंडर प्रखंड कार्यालय से लेकर जिला कार्यालय तक के चक्कर लगा रहे हैं. वेंडर का कहना है कि क्वालिटी से किसी तरह का कोई समझौता किये बिना बिल्कुल योजना के मुताबिक, यह जलमीनार आधे से कम कीमत पर खड़ी की जा सकती है.
इन लोगों में बंटेगा कमीशन
वेंडरों ने जलमीनार लगाने के लिए जुगाड़ लगाना भी शुरू कर दिया है. जिला कार्यालय के अधिकारियों से लेकर प्रखंड स्तर तक के अधिकारी, कर्मी और जनप्रतिनिधियों के बीच आधे पैसे का बंदरबांट होना है.
इनमें बीडीओ, जेई, एई, पंचायत सचिव, प्रमुख, उपप्रमुख, मुखिया के अलावा वैसे लोग शामिल हैं, जिनके बीच से योजना होकर जानी है.
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