
Ranchi : रांची नगर निगम में बड़ी इमारतों, मॉल, शापिंग कांप्लेक्स का नक्शा तय समय में पारित नहीं होता है. छह से दस महीनों तक बड़े भवन प्लान निगम में लटके रहते हैं. रियल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन के कुमूद झा का कहना है कि रांची में वास्तुकारों (आर्किटेक्ट) को बड़ी इमारतों के नक्शे में आयी त्रुटी को सुधारने का मौका नहीं दिये जाने से नक्शा पास होने में काफी समय लग रहा है.
उनके अनुसार अमूमन महीने में 25 से 30 नक्शे निगम में जमा होते हैं. इसमें से अधिकतर नक्शे ऑटो डेव्हलपमेंट कंट्रोल रेग्युलेशन (डीसीआर) के नियमों की वजह से बार-बार खारिज होते हैं. नगर निगम में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है, जिससे समय पर टाउन प्लानर के यहां भवन प्लान की प्रति समय पर स्वीकृति के लिए पहुंच सके.
यहां यह बताते चलें कि महीने में 300 से 350 नक्शे (भवन प्लान) निगम में स्वीकृति के लिए जमा होते हैं. इसमें से 85 प्रतिशत छोटे भवनों से संबंधित होते हैं. अपार्टमेंट कैटेगरी और जनरल कैटेगरी के नक्शे की स्वीकृति का आंकड़ा नगर निगम की तरफ से जारी नहीं होने से परेशानी और बढ़ती है.
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पूर्व के दागदार टाउन प्लानरों की वजह से छवि हुई है धूमिल
रांची नगर निगम और तत्कालीन रांची क्षेत्रीय विकास प्राधिकार में दागदार टाउन प्लानरों की वजह से नक्शा शाखा की छवि धूमिल हुई है. नक्शा शाखा से जुड़े कई अभियंता और पूर्व टाउन प्लानरों पर भवन प्लान में विचलन को लेकर निगरानी थाना समेत, सीबीआइ तथा अन्य न्यायालयों में मुकदमे भी हुए हैं.
इसमें पूर्व टाउन प्लानर शंकर प्रसाद भी शामिल हैं, जो अरोमा कंस्ट्रक्शन, होटल लीलैक के मामले में दोषी साबित हुए थे. इतना ही नहीं निगरानी में नक्शा शाखा के उमेश सिंह, बिल्डर विभूति भूषण प्रसाद समेत अन्य पर मुकदमा भी चल रहा है. निगरानी की टीम ने सहायक अभियंता कमलेश राय को नगदी के साथ गिरफ्तार भी किया था. ये सभी नक्शा शाखा से जुड़े रहे हैं. पूर्व टाउन प्लानर घनश्याम अग्रवाल भी नोटबंदी के समय काफी विवादित रहे हैं.
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आर्किटेक्ट, अफसर और बिल्डरों का बना हुआ है नेक्सस
रांची नगर निगम में नक्शा पास कराने के लिए आर्किटेक्ट, अफसर और बिल्डरों का एक बड़ा नेक्सस बना हुआ है. कुछ आर्किटेक्ट अपने हिसाब से अफसरों के साथ मिल कर बड़ा नक्शा पारित करा लेते हैं, जो ऑटो डीसीआर से प्रभावित नहीं होता है.
सूत्रों का कहना है कि समय पूर्व नक्शा पारित करने की सारी औपचारिकताएं दूसरी विधि से पूरी की जाती हैं. रांची के दो-तीन बड़े आर्किटेक्ट के प्रतिनिधि इस काम को लेकर हमेशा नगर निगम के ईद-गिर्द मंडराते रहते हैं. इसमें टाउन प्लानर की महति भूमिका रहती है. टाउन प्लानर की सहमति मिलने के बाद भवन प्लान पर नगर आयुक्त और संबंधित सहायक अभियंता और कनीय अभियंता का अनुमोदन (हस्ताक्षर सहित) प्राप्त किया जाता है.




