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रिटायर्ड फौजी वाराणसी में हुए एकजुट, पीएम मोदी के खिलाफ करेंगे चुनाव प्रचार

Varanasi : पीएम नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में सबकुछ ठीक नहीं है. इन दिनों 100 से ज्यादा  रिटायर्ड या बर्खास्त सेना के साथ ही अर्द्ध सैनिक बलों के जवानों ने वाराणसी में अपना डेरा डाल रखा है.

सेना के ये सभी जवान पीएम के खिलाफ चुनाव प्रचार करेंगे. पीएम का विरोध कर इन फौजियों का कहना है कि मोदी सेना को कमजोर कर रहे हैं और सेना में भ्रष्टाचार को बढ़ावा भी दे रहे हैं.

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इस बात पर है जवानों का विरोध

पीएम का विरोध कर रहे इन जवानों का कहना है कि ये सभी खराब खाने की शिकायत करने पर बर्खास्त किए गए बीएसएफ जवान तेज बहादुर के समर्थन में प्रचार करेंगे. सभी फौजी वाराणसी के मडुआ डीह में रूके हुए हैं. दरअसल वाराणसी से ही तेज बहादुर ने नामांकन किया है.

वहीं टेलीग्राफ में छपी खबर के मुताबिक, यदि संभव हो पाया तो ये सभी फौजी पीएम के नामांकन के दौरान उन्हें काला झंडा भी दिखायेंगे.

वहीं इस बारे में तेज बहादुर का कहना है कि मैं ही सच्चा चौकीदार हूं और फर्जी चौकीदार के खिलाफ लड़ रहा हूं. बीएसएफ के बर्खास्त जवान तेज बहादुर का प्रचार ऐसे समय में किया जा रहा है, जब पीएम मोदी सेना के शौर्य की बातें कर रहे हैं.

क्योंकि पुलवामा हमले के बाद भारत की ओर से पाकिस्तान को जवाबी कार्रवाई में जो हमला किया गया था, मोदी को उसे ही जनता के बीच रखकर वोट मांग रहे हैं. हालांकि इसपर पूर्व सैन्य प्रमुख से लेकर कई रिटायर्ड फौजी राष्ट्रपति से शिकायत भी कर चुके हैं. वहीं

मोदी के सर्जिकल स्ट्राइक का हवाला देने के अलावा अन्य दो कारणों से भी पूर्व व सस्पेंड जवान उनके खिलाफ हैं.

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पीएमओ में भी नहीं होती शिकायत पर कार्रवाई

जनसत्ता के मुताबिक, इन फौजियों की ये शिकायत है कि अपने बड़े अधिकारियों और भ्रष्टाचार का विरोध करने पर ही वे इसकी कीमत चुका रहे हैं. जिसके पीछे सरकार की ओर से भ्रष्ट अधिकारियों पर शिकायत करने के बावजूद उनकी शिकायतों को नजरअंदाज करना है.

इसपर साल 2001 में रिटायर्ड हवलदार ओम प्रकाश सिंह का कहना है कि, साल 2016 से सितंबर की   सर्जिकल स्ट्राइक पहली सर्जिकल स्ट्राइक नहीं थी. इससे आगे उन्होंने कहा कि वे खुद पहले भी पाकिस्तान के इलाके में किए गये सर्जिकल स्ट्राइक का हिस्सा रहे हैं.

वहीं सीआरपीएफ से सस्पेंड किए गए 32 वर्षीय पंकज मिश्रा का कहना है कि, सैनिकों की ओर से 4000 से ज्यादा शिकायतें की गई हैं. जिनमें प्रमुख रूप से अधिकारियों को घरों पर जवानों को छोटे-छोटे काम करने पर मजबूर किया जाता है.

साथ ही कहा कि इस तरह की शिकायतों को किए हुए तीन स,ल बीत गये. पीओमओ में ये सभी शिकायतें पेंडिंग पड़ी हैं और इनपर आजतक ना तो कोई सुनवाई हुई और ना ही कोई कार्रवाई ही हुई.

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