
Akshay Kumar Jha
Ranchi: बीआर चोपड़ा वाली महाभारत की स्क्रिप्ट से ज्यादा रोचक और उलझाने वाली है, झारखंड में गठबंधन की कहानी. चाहे ये गठबंधन बीजेपी के साथ दूसरी पार्टी की हो या कांग्रेस वाली महागठबंधन की कहानी हो.
इस लोकसभा चुनाव या इससे पहले के चुनावों में इनकी भूमिका देखी जाए तो कमाल के समीकरण देखने को मिलेंगे. लेकिन जब एक-दूसरे पर बयानबाजी करनी हो तो वार बीआर चोपड़ा वाली महाभारत से भी ज्यादा खतरनाक होता है. झारखंड में गठबंधनों की पोल खोलने से पहले यह जानना जरूरी है कि दोनों एक दूसरे के लिए कैसा विचार रखते हैं.
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हमें ठगबंधन कहने वाले ठ्गस ऑफ हिंदुस्तान हैः राजेश ठाकुर (प्रवक्ता, कांग्रेस)
कल तक जिस सुदेश महतो बीजेपी सरकार को पूरे झारखंड में घूम-घम कर सरेआम गाली देने का काम किया, आज वो कैसे सगे हो गए. जिस सुदेश महतो और आजसू के खिलाफ सिर्फ छह महीना पहले गोमिया में बीजेपी ने अपना उम्मीदवार उतारा वो आज कहीं ना कहीं हमारे महागठबंधन से सीख लेकर कर अपने गठबंधन का स्वरूप तैयार कर रहे हैं.
हकीकत यह है कि जिनको कोई नहीं पूछता, कहीं कोई बिसात नहीं है वैसी एलजेपी और जदयू जैसी पार्टी के साथ बीजेपी को मंच साक्षा करना पड़ रहा है. महागठबंधन जो बना है, उसके डर और दबाव से ही इन्होंने अपना गठबंधन तैयार किया है. और जिन्हें भारत की जनता ने ठ्गस ऑफ हिंदुस्तान की उपाधि दे दी है वो हमें ठगबंधन बोल रहे हैं.
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उपाधि भी हम से ही चुरायी, ठगने के अलावा कुछ नहीं आताः प्रतुल शाहदेव (प्रवक्ता, बीजेपी)
ये जो ठ्गस ऑफ हिंदुस्तान बोल रहे हैं, ये उपाधि भी इन लोगों ने हम लोगों से ही चुरायी है. बताइए उपाधि तक कॉपी कर रहे हैं. कम से कम इस मामले में तो अपनी क्रिएटीविटी दिखानी चाहिए.
कांग्रेस तो जनता को शुरू से ठगती आ रही है. सालों से गरीबी हटाओ का नारा कांग्रेस देती आ रही है और गरीबी उसी रफ्तार से बढ़ती जा रही है. अब कांग्रेस के साथ कई सारे पार्टी मिलकर जनता को ठगने का काम कर रही हैं.
ठगने की आदत ऐसी है कि अब एक-दूसरे को भी ठगने का काम कर रहे हैं. चतरा, गोड्डा और पलामू देखने के बाद यह साफ हो चुका है कि इनके आपस के बीच कितना अविश्वास है.
कहानी महागठबंधन की
सबसे पहले बात झारखंड में महागठबंधन की कहानी की. लोकसभा चुनाव की घोषणा से पहले महागठबंधन की नींव रखने वालों में से एक अन्नपूर्णा देवी चुपके से बीजेपी में शिफ्ट हो जाती हैं.
इस मामले में गिरिनाथ सिंह नंबर टू पर रहे. महागठबंधन का सात-चार-दो-एक का फॉर्मूला जनता समझ पाती उससे पहले ही झोली में आयी एक सीट पलामू की बजाय चतरा से सुभाष यादव को राजद ने मैदान में उतार दिया.
शुक्रवार को चतरा से कांग्रेस ने भी मनोज यादव के उम्मीदवारी की घोषणा कर दी. राजद और कांग्रेस के यदुवंशी अब आमने-सामने ताल ठोकेंगे. एक-दूसरे को भला-बुरा कहेंगे. फिर बयानों में फ्रेंडली मैच खेलने की दुहाई देंगे.
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गोड्डा में फुरकान अंसारी की सीट क्या कटी. उनके बेटे ने राहुल गांधी के मंच से कह दिया कि यह ठीक नहीं हो रहा है. बाप-बेटे दोनों दिल्ली दौड़ लगाते रहे. बात नहीं बनी तो राजनीति का जवाब राजनीति से दिया.
बेटी शबाना खातून को बसपा के टिकट से लड़ाने की बात मार्केट में आ गयी. फुरकान ने सधे हुए नेता की तरह बयान भी दे दिया कि वो बेटी को समझाने की कोशिश करेंगे.
राजद के बागी होने के बाद भला पलामू की सीट अब कांग्रेस क्यों जाने दे. निश्चित तौर से कांग्रेस पलामू से अपना उम्मीदवार उतारने जा रही है.
कहानी गठबंधन की
बीजेपी वाले गठबंधन की कहानी काफी रोचक है. पूरे देश में आजसू एक ऐसी पार्टी है जिसके विधायक कैबिनेट में मंत्री के तौर पर सदस्य हैं और सरकार की नीतियों के खिलाफ राज्य में पार्टी की संघर्ष यात्रा होती है.
सरकार में गठबंधन का धर्म निभाते हैं और गोमिया के उपचुनाव में दोनों पार्टी एक-दूसरे आमने-सामने होती है. चुनाव में आपसी लड़ाई की वजह से तीसरी पार्टी को जीत मिल जाती है.
वहीं गोमिया के साथ सिल्ली में हो रहे उपचुनाव में बीजेपी-आजसू के खिलाफ अपना उम्मीदवार नहीं उतारती है. पूछे जाने पर गठबंधन की बात होती है.
बीजेपी के साथ दूसरी पार्टी जदयू का गठबंधन है. जदयू एनडीए फोल्डर की एक ऐसी पार्टी है, जिसके पास झारखंड में एक भी सीट नहीं है. तीसरी पार्टी लोजपा का भी वही हाल है. लोजपा की हालत तो इतनी बुरी है कि झारखंड में उन्होंने सीट की डिमांड भी नहीं की.
14 में से 13 सीट पर चुनाव लड़ने वाली बीजेपी का झारखंड में तीन पार्टियों के साथ गठबंधन है. राजनीतिक पंडितों का इस मामले पर कहना है कि ऐसा बीजेपी के साथ वाली पार्टियों के साथ होना कोई बहुत ताज्जुब की बात नहीं.
इति श्री…
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