
Ranchi: भारतीय पुनर्वास परिषद (आरसीआइ) की ओर से संचालित किये जानेवाले पाठ्यक्रम में 2017-18 के लिए ली गयी परीक्षा की सीटें नहीं भरी हैं. इससे देशभर के पांच सौ से अधिक केंद्रों में अब भी 8096 सीटें नहीं भर पा रही हैं. अब आरसीआइ ने 2018-19 सत्र के लिए भी एडमिशन की प्रक्रिया शुरू कर दी है.
इससे संस्थानों में असमंजस की स्थिति बरकरार है, क्योंकि बैकलॉग सीटें नहीं भरने से सभी संस्थानों को नुकसान उठाना पड़ेगा. झारखंड के भी 23 संस्थानों में इससे निःशक्त जनों के लिए विशेष पाठ्यक्रमों के लिए नामांकन की प्रक्रिया पूरी करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.
इनमें डिप्लोमा इन कम्युनिटी बेस्ड रीहैबिलिटेशन, डीएड इन स्पेशल एजुकेशन (ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिस्ऑर्डर), डीएड (हियरिंग इंपेयरमेंट), डीएड (मेंटल रिर्टाडेशन, डीएड (विजुअल इंपेयरमेंट) जैसे पाठ्यक्रमों में छात्रों का नामांकन प्रभावित हो रहा है. जानकारी के अनुसार, देश भर में डिप्लोमा स्तरीय कोर्स के 19706 सीटों के लिए आरसीआइ ने परीक्षा ली गयी थीं. इसमें से सिर्फ 10506 सीटें ही भर पायीं.
शेष खाली की खाली रह गयी हैं. इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को भी आरसीआइ के अध्यक्ष डॉ कमलेश कुमार पांडेय नहीं मान रहे हैं. न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता ने रिट याचिका 34064 ऑफ 2018 की सुनवाई के क्रम में 16.11.2018 को यह फैसला दिया था कि आरसीआइ तीन दिसंबर तक सभी बचे सीटों पर नामांकन करने का आदेश देकर न्यायालय को सूचित करे.
तीन दिसंबर तक परिषद की तरफ से इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी है. न्यायालय ने सुनवाई के दौरान यह भी पाया कि 2017-18 सत्र के लिए आरसीआइ ने 12.2.2018 को एक सर्कुलर जारी कर 31.12.2017 तक हुए दाखिले को नियमित करने की बातें कही थीं.
इसके लिए दाखिला लेनेवाले विद्यार्थियों से पांच-पांच हजार रुपये जुर्माना लेने का हवाला दिया गया था. इतना ही नहीं, 18.4.2018 को आरसीआइ की तरफ से यह घोषणा की गयी कि बचे हुए सीटों पर अखिल भारतीय स्तर पर परीक्षा लेकर सीटें भरी जायेंगी. आरसीआइ की 19,706 सीटों के लिए ऑनलाइन परीक्षा दोबारा ली गयी. इस पर भी 45 प्रतिशत सीटें खाली की खाली रह गयीं. अब 2018-19 के लिए भी ऑनलाइन परीक्षा की तैयारियां शुरू कर दी गयी हैं.
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