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‘लूट सके तो लूट’ वाले फॉर्मूले पर सरकारी शराब दुकान, उत्पाद विभाग के सारे नियम ताक पर

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Ranchi: झारखंड में जब से सरकार ने शराब बेचने का काम शुरू किया है, तब से लेकर अबतक की यह सबसे बड़ी मनमानी है, जो शराब दुकान में काम करने वाले ऑउटसोर्स वाली कंपनी के कर्मी कर रहे हैं. जब से कैबिनेट से शराब में प्राइवेट प्लेयर्स की वापसी पर हरी झंडी मिली है, तब से सरकारी शराब दुकानों पर लूट सके तो लूट के फॉर्मूले पर शराब बेचने वाले ऑउटसोर्स की कंपनी के कर्मी काम कर रहे हैं. मनमाने तरीके से लोगों से शराब की कीमत के एवज में पैसे ले रहे हैं. मना करने पर कर्मी शराब नहीं देने की धमकी देते हैं.

दरअसल आने वाले कुछ ही दिनों में शराब दुकान फिर से प्राइवेट प्लेयर्स के हाथों में जाने वाली है. एक अगस्त 2017 से सरकारी दुकानों में शोमुख और फ्रंटलाइन के आउटसोर्स किए कंपनी के कर्मी शराब बेचने का काम कर रहे थे, जिनके सामने प्राइवेट प्लेयर्स के आते ही बेरोजगारी की समस्या आने वाली है. ऐसे में ये इन दिनों में ग्राहकों को मनमाने ढंग से पैसा लूटने की फिराक में मनमानी कर रहे हैं.

ताक पर उत्पाद विभाग के कायदे, कहीं भी प्राइस लिस्ट नहीं

पब्लिक की परेशानी के मद्देनजर उत्पाद विभाग ने बड़े ही सख्त और स्पष्ट नियम सरकारी शराब की दुकानों के लिए बनाए थे. बकायदा आदेश जारी किया गया था कि हर सरकारी शराब दुकान में प्राइस लिस्ट लगनी है. स्टॉक में मौजूद हर ब्रांड की कीमत उस प्राइस लिस्ट पर होनी है. प्राइस लिस्ट पर ही एक फोन नंबर लिखा हुआ था. निर्देश दिया गया था कि अगर प्राइस लिस्ट से ज्यादा कीमत पर सरकारी शराब दुकान में शराब बेची जाती है, तो इस नंबर पर फोन करें.

कार्रवाई होने का भरोसा दिया गया था. इतने कड़े निर्देश के बाद शराब दुकान में काम करने वाले कर्मी सकते में थे. तय कीमत पर ही शराब की ब्रिकी कुछ दिनों तक हुई. लेकिन फिर से आउटसोर्स वाली कंपनियों ने अपनी मनमानी और लूट-खसोट का काम शुरू कर दिया है. राज्य भर में 504 सरकारी दुकानें हैं. फिलवक्त इनमें से एक दुकान पर भी ना तो प्राइस लिस्ट लगी है और ना ही वो नंबर है, जिसपर ग्राहक फोन कर सके.

क्या उत्पाद विभाग के घाटे और ऑउटसोर्सिंग वालों के बेरोजगारी के पीछे जनता 

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शराब दुकान पर तैनात शोमुख और फ्रंटलाइन कंपनी के कर्मियों का बर्ताव ऐसा हो चला है जैसे उनकी आने वाली बेरोजगारी के पीछे ग्राहकों का हाथ है. वो अपना सारा फ्रंस्ट्रेशन ग्राहकों पर निकाल रहे हैं. वहीं उत्पाद विभाग के अधिकारियों से बात करने पर घाटे की दलील इस तरह से दी जा रही है, जैसे घाटे वाली योजना जनता ने सरकार को सुझायी थी. वीडियो पर आकर इस मामले में बयान देने की बात पर ऑउटसोर्सिंग वाली कंपनी के कर्मी तैयार नहीं होते.

गलत करने का अधिकार किसी को नहीः गजेंद्र सिंह, उपायुक्त उत्पाद

इस मामले पर न्यूज विंग से बात करते हुए उपायुक्त उत्पाद गजेंद्र सिंह ने कहा कि गलत करने का अधिकार विभाग में किसी को नहीं है. दुकानों में प्राइस लिस्ट ना होना गलत है. रांची जिले के हर दुकान में प्राइस लिस्ट के साथ फोन नंबर और निर्देश फिर से दोबारा लगे इसके लिए अभियान चलाया जाएगा.

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