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पीएम किसान योजना पोर्टल में 9.15 लाख आवेदन लंबित, सीएम ने कहा- जल्द जोड़ें

  • 15 अगस्त को छूटे किसानों को सरकारी लाभ देने का हेमंत सोरेन ने दिया निर्देश

Ranchi:  प्रधानमंत्री किसान योजना पोर्टल में करीब 9.15 लाख किसानों के रजिस्ट्रेशन के लंबित आवेदनों को लेकर सीएम सोरेन ने नाराजगी जतायी है. उन्होंने कृषि विभाग से पूछा है कि राज्य में करीब 23 लाख किसानों का रजिस्ट्रेशन है, तो फिर आखिर 9 लाख से अधिक आवेदन लंबित क्यों है. अगर छूटे हुए सभी किसानों का भी पोर्टल में रजिस्ट्रेशन का हो जाता है, तो राज्य के 32 लाख किसानों को लाभ होगा.

सीएम ने ये बातें मंगलवार को धान उत्पादन एवं बाजार अभिगम्यता व सुलभता हेतु “सहायता” नामक प्रस्तावित नयी योजना एवं बाजार समिति के प्रस्ताव की समीक्षा बैठक में कही. बैठक में कृषि मंत्री बादल पत्रलेख,  मुख्य सचिव सुखदेव सिंह,  मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव राजीव अरुण एक्का,  कृषि विभाग के सचिव अब्बू बकर सिद्दीकी,  रांची डीसी छवि रंजन सहित कई अधिकारी मौजूद थे.

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छूटे किसानों को आर्थिक मदद देने का निर्देश

बैठक में सीएम हेमंत ने छूटे किसानों को जल्द से जल्द रजिस्ट्रेशन करने का निर्देश दिया. उनका मानना है कि राज्य में हर छोटे, मंझोले और सीमांत किसान को योजना से लाभान्वित करना ही गठबंधन सरकार का लक्ष्य है. उन्होंने 15 अगस्त तक इन सभी छूटे किसानों के खाते में योजना के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता देने की भी निर्देश दिया.

वहीं कोरोना संक्रमण को देखते हुए लघु, सीमांत एवं प्रवासी श्रमिकों को योजना का लाभ देने का निर्देश उन्होंने दिया है.

प्रवासी श्रमिकों को भी योजना से जोड़ें

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में जितने भी प्रवासी श्रमिक वापस लौटें हैं, उनका डाटा जिले के डीसी के माध्यम से तैयार करें. प्रवासी श्रमिक जिनकी जमीन है उन्हें पीएम किसान योजना पोर्टल में रजिस्ट्रेशन करें. नये सिरे से किसानों की पहचान की आवश्यकता है ताकि 15 अगस्त तक छूटे हुए किसानों को लाभान्वित करने का कार्य हो सके.

उन्होंने कहा कि किसान बढ़ नहीं रहे, बल्कि किसान अब घटते हुए खेतिहर मजदूर बनते जा रहे हैं. मौसम की विषमता छोटे और मंझोले किसानों की परेशानी का सबब बन गयी है. किसान पलायन भी कर रहें हैं. ऐसे में स्थिति को बदलने और इस विषय पर विशेष कार्य योजना बनाने की जरूरत है.

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“सहायता” नामक प्रस्तावित नयी योजना की खास बातें

  • वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए धान उत्पादन एवं आर्थिक सहायता हेतु 200 करोड़ का बजट.
  • योजना का उद्देश्य किसानों को प्रति क्विंटल 500 रुपये की आर्थिक सहायता देना, जिन किसानों का धान राज्य सरकार क्रय करेगी.
  • 2017 में हुई गणना के अनुसार, राज्य में 38.14 लाख खेतिहर.

बाजार समिति के प्रस्ताव की ये रही खास बातें

  • पूरे राज्य में “एक राज्य एक बाजार” की जरूरत.
  • किसी भी व्यापारी को उसे एक जिला में ही व्यापार करने की बाध्यता नहीं.
  • निजी बाजार की स्थापना.
  • बाजार यार्ड के बाहर कृषक से थोक प्रत्यक्ष खरीद.
  • घोषित बाजारों के रूप में गोदामों, कोल्ड स्टोरेज की घोषणा करना.
  • ई- बाजार
  • राज्य व केंद्र शासित प्रदेश में बाजार शुल्क एकल..
  • एकल ट्रेडिंग लाइसेंस
  • एकीकृत बाजार क्षेत्र, बाजार समिति का गठन, बाजार शुल्क.

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