
Dhanbad: 25 अगस्त को लक्की सिंह के आवास में तोड़फोड़, निर्दोष लोगों के साथ मारपीट, हथियार चमकाने व पुलिस पर हमला करने आदि के मामले में पुलिस ने जहां गिरफ्तारी शुरू कर दी है. दूसरी तरफ गिरफ्तारी और पुलिस की सख्त कानूनी कार्यवाही शुरू होने से बौखलाए इस हिंसक शक्ति प्रदर्शन के सूत्रधार और प्रायोजक सोशल मीडिया के सहारे हिंसक तांडव को जायज बताते हुए समर्थन मांग रहा है. आरोपी उपद्रवियों के समर्थन में मार्क्सवादी समन्वय समिति (मासस) के सभी ईकाई सोशल मीडिया के सहारे घटना के समर्थन में कसीदे पढ़ रहा है. घटना को जायज ठहराते हुए पुलिस पर एकतरफा कार्रवाई का आरोप मढ़ रहा है. और तो और हिंसक शक्ति प्रदर्शन को आंदोलन बता रहा है. हालांकि, इसके राजनीतिक मायने भी है.

इधर, पुलिस इस मामले को लेकर बेहद गंभीर है, मिशन मोड में जहां घटना के उपद्रवियों को सलाखों के पीछे भेजा जाएगा. वहीं सिंदरी में पनपे छुटभैये रंगबाजों को भी नहीं बख्शा जाएगा. पुलिस घटना के प्रायोजक को ढुंढ रहा है और साक्ष्य जुटा रहा है. मामले में तीन एफआईआर दर्ज की गई है, 60 नामजद समेत दो हजार के करीब अज्ञात आरोपी बनाए गए हैं. उधर, घटना में घायल भौंरा थाना प्रभारी को घटना के चार दिन बाद भी होश नहीं आया है. इनके सिर में गंभीर जख्म है. दुर्गापुर मिशन अस्पताल में सफल ऑपरेशन के 108 घंटे बाद भी बेहोश हैं. यह युवा जांबाज पुलिस अधिकारी हिंमाशु कुमार मिलनसार हैं और इनकी दिसंबर में शादी होने वाली थी.
बहरहाल, पुलिस ने गिरफ्तारी वहां से शुरू की है जहां से 25 अगस्त की प्रायोजित टारगेटेड तांडव की पृष्ठभूमि तैयार हुई. बलियापुर थाना क्षेत्र के सिंदरी टाउन अंतर्गत रांगामाटी स्थित संतोष चौधरी के आवास में लक्की सिंह व उनके समर्थकों द्वारा गत 18 अगस्त की रात को हमला किए जाने के मामले में 29 अगस्त, सोमवार को बलियापुर पुलिस ने रांगामाटी में छापामारी कर लक्की समर्थक कन्हाई कुमार सिंह व गोविंद कुमार सिंह को गिरफ्तार कर भादवि की धारा 149, 323, 348, 349, 387, 504 के तहत जेल भेज दिया है. थाना प्रभारी श्वेता कुमारी का कहना है कि अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार छापामारी कर रही है. ज्ञात हो कि 19 अगस्त को फर्टिलाइजर वर्कर्स यूनियन के महामंत्री संतोष चौधरी ने लक्की सिंह व उनके समर्थकों के खिलाफ 50 हजार रुपए महीने रंगदारी मांगने, गले से सोने की चेन छीनने, मारपीट करने, फायरिंग करने आदि का आरोप लगाते हुए बलियापुर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराया था.
वहीं, पिछले 25 अगस्त को लक्की सिंह के आवास में तोड़फोड़, निर्दोष लोगों के साथ मारपीट, हथियार चमकाने व पुलिस पर हमला करने आदि के मामले में सिंदरी पुलिस ने बलियापुर से धनंजय गुप्ता को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. सिंदरी एसडीपीओ अभिषेक कुमार ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि सभी गिरफ्तार किए गए आरोपियों को जेल भेज दिया गया है.
सोशल मीडिया पर दुष्प्रचार कर हिंसक तांडव के लिए मांगा जा रहा समर्थन
25 अगस्त को लक्की सिंह के आवास में तोड़फोड़, निर्दोष लोगों के साथ मारपीट, हथियार चमकाने व पुलिस पर हमला करने आदि के मामले में पुलिस की सख्त कार्यवाही शुरू होने से मामले के आरोपियों में बैचेनी छा गई है. अपने सुनियोजित और संगठित प्रायोजित किए गए अपराध को लेकर सफाई दी जा रही. घटना को अपनी जमीन से बाहरियों को खदेड़ने आंदोलन बड़े बेबाकी और बेशर्मी से बताया जा रहा है. एक वीडियो जारी कर अपने को तोपचांची का बताने वाला युवक कह रहा है कि सिंदरी की धरती से बाहरियों को भगाने के आंदोलन का शंखनाद हुआ है. खूब वायरल किए जा रहे इस वीडियो का हेडलाइन मे धनबाद एसएसपी को कहा जा रहा है कि इतनी धाराएं तो किसी पेशेवर अपराधी पर नहीं लगती है जितना सिंदरी में घटना के आरोपियों पर लगाया गया है. झारखंड के मूलवासी लोगों से अपील करते हुए कहा गया है कि सिंदरी में तांडव नहीं आंदोलन की आगाज है.
वहीं मासस के युवा कार्यकर्ता काजल महतो ने विभिन्न वाट्सएप ग्रुप पर मैसेज डालकर पुलिस की कार्यवाही पर सवाल उठाया है. उसने लिखा है कि शांति पूर्वक आंदोलन हिंसक प्रदर्शन में कैसे बदला इसकी जांच हो. काजल महतो ने लिखा है कि बबलू महतो के नेतृत्व में युवाओं ने वही काम किया है जो 70-80 के दशक में एके रॉय और बिनोद बिहारी महतो करते थे. आम ग्रामीणों के मन से भय को दूर करने के लिए रैली निकालना किसी भी सूरत में गलत नहीं है. झारखंड की वर्तमान सरकार के नेता हेमंत सोरेन के पिता भी उसी राजनीति के उपज है.
सवाल उठाया है कि अगर शांतिपूर्ण रैली के दौरान हिंसा हुई तो प्रशासन ने जरूर अपनी जिम्मेदारी को पूरा नहीं किया। हिंसा क्यों हुई? कैसे हुई? इसकी जांच होनी चाहिए। हिंसा करने वाले कोई अन्य लोग तो नहीं थे? साथ ही मांग की है कि प्रशासन नामजद प्राथमिकी वापस ले. जिला प्रशासन दोनों पक्ष को बैठा कर मामले को खत्म करने पर ध्यान दे.
सवाल, हिसंक तांडव को किस दृष्टिकोण से आंदोलन कहा जा सकता है?
उल्लेखनीय है कि बीते 22 अगस्त की घटना के विरोध में एकजुट होकर ग्रामीण सिंदरी शहर में प्रदर्शन करने के लिए आये थे. ये लोग दोपहर दो बजे रांगामाटी में प्रवेश किये. वहां से पानी टंकी चौक, सूर्यदेव सिंह चौक व हटिया चौक तक गये. दोपहर 2.40 बजे शहरपुरा पहुंचे. वहां लक्की सिंह के ऑफिस पर अचानक हमला बोल दिया. जमकर तांडव मचाया, पुलिस को पीटा, पत्रकार को फोटो और वीडियो बनाने से रोका, धक्का दिया, मोबाइल छीन ली. आम लोगों को भी धमकी दे रहे थे. लोग इतने उग्र थे कि पुलिस को कुछ नहीं समझ रहे थे. बाहरियों तेरी गुंडागर्दी नहीं चलेगी, जय झारखंड, जोहार झारखंड, आतंक फैलाना बंद करो, चलो बदला ले लेंगे नारे भी लगाये गये. लोग रुक-रुक कर पत्थर चला रहे थे. सवाल है कि मासस के लोगों का इस तरह का हिसंक तांडव किस दृष्टिकोण से आंदोलन कहा जा सकता है? यह सरासर अपराध है. दिनदहाड़े डकैती और लूट कहा जा सकता है. पुलिस बल पर हमला कहा जा सकता है लेकिन किसी भी एंगल से आंदोलन नहीं कहा जा सकता.
मालूम हो कि प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व मासस नेता बबलू महतो, जगदीश रवानी, भाषा व खतियानी आंदोलनकारी जयराम महतो, सीताराम महतो, विकास महतो, गणेश महतो, कुमार महतो आदि कर रहे थे. वहीं बताया जा रहा है कि परोक्ष रूप से सिंदरी विधायक प्रतिनिधि तारा देवी, संतोष चौधरी गुट, भौंरा के कालीचरण यादव गुट, एसीसी सिंदरी जयराम सिंह गुट, और हरवे हथियार के साथ सतीश महतो तथा तारकेश्वर यादव गुट सक्रिय थे, जिसकी प्रमाणिकता भी पुलिस को मिली है. हिंसक तांडव प्रदर्शन में 80 फीसदी लोग बलियापुर थाना क्षेत्र के विभिन्न गांवों के महतो युवक थे. जबकि, 20 फिसदी लोग भौंरा, अलकडीहा, तिसरा, पाथरडीह, सुदामडीह थाना क्षेत्र के थे. इस हिंसक घटना के मुख्य नेतृत्वकर्ता मासस नेता बबलू महतो एक शिक्षक हैं. एक शिक्षक होकर हिंसक वारदात को अंजाम देना और कहना कि यह शांतिपूर्ण आंदोलन था पुलिस कसूरवार है, नैतिकता कैसे कहा जा सकता है. ऐसे शिक्षक खुद तो अपराधी बनेगा ही समाज और छात्रों को भी अपराधियों की श्रेणी में खड़ा कर देगा.
लक्की सिंह कार्यालय के चप्पे चप्पे पर लगे सीसीटीवी कैमरे के तोड़ने से पहले की वीडियो फुटेज, वायरल हो रहे घटना की वीडियो, शहरपुरा बाजार से बलियापुर तक के रास्ते में विभिन्न लोगों के द्वारा छुपछुपाते लिए गए वीडियो और फोटो के आधार पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है और आरोपियों की तलाश की जा रही है. पुलिस एक अपाची बाइक पर सवार दो उन दो लोगों की तलाश कर रही है जो हिंसक प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों को जगह जगह गाइड करते नजर आया है. इनदिनों की सीसीटीवी फुटेज के आधार पर तलाशी जारी है. पुलिस दोषियों को किसी सूरत में नहीं छोड़ने के मूड में है. न्याय संगत भी यही है.




