
Pravin kumar
Ranchi: रांची का जेपी उद्यान अतिक्रमण की भेंट चढ़ चुका है. इससे भी बड़ी चिंता की बात ये है कि शिकायत के बाद भी अतिक्रमण को लेकर कार्रवाई नहीं हो रही है.
अशोक वर्मा ने मुख्यमंत्री सचिवालय में 8 मई 2019 को शिकायत की थी. इस पर जांच के लिए राजस्व निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग ने रांची उपायुक्त को पत्र भी लिखा था. लेकिन आठ माह होने को हैं, रांची उपायुक्त ने किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की है.
क्या था मामला
रांची-गुमला हाईवे पर डीएवी के पास जेपी उद्यान हुआ करता था. इसकी देख-रेख वन विभाग द्वारा की जाती थी. पर यह उद्यान अपनी जगह से लापता हो गया है.
उसकी तलाश करने पर वहां ऊंची-ऊंची इमारतें दिखीं. डीएवी स्कूल के समीप जेपी उद्यान की आधारशिला 1978 -79 में रखी गयी थी. यह उद्यान 7.8 एकड़ में फैला हुआ था.
उद्यान बजरा मौजा के खाता न.113 में बना हुआ था. उस दौरान रांची के लोग पिकनिक मनाने के लिए जेपी उद्यान जाया करते थे.
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क्या है डीसी रांची को लिखे विभाग के सचिव के पत्र में
रांची डीसी को लिखे पत्र में विभाग के सचिव केके सोन ने कहा है- अशोक वर्मा, प्रदेश सचिव, लोकतंत्र सेनानी संघ, झारखंड प्रदेश, राज्य के पत्रांक 28/2019 प्राप्त हुआ है, जिसमें मौजा बजरा खाता नंबर 113 रकबा 7.80 एकड़ सरकारी भूमि पर जेपी उद्यान को उजाड़ कर सुधार मोटर के मालिक द्वारा अवैध रूप से हटाने का उल्लेख है.
इस संबंध में विभागीय पत्रांक 2164 स्मार पत्रांक 3046 एवं पत्रांक 3046 , अंतिम पत्र 4071 आपको स्मारित भी किया गया है. अत: विषयगत मामले की ओर ध्यान आकृष्ट कराते हुए आशा है कि इसमें व्यक्तिगत अभिरुचि लेते हुए अविलंब नियम अनुसार यथोचित कार्यवाही करेंगे एवं कृत कार्रवाई प्रतिवेदन 20 नवंबर 2019 तक उपलब्ध कराना सुनिश्चित करेंगे.
74 आंदोलन के जननयाक के नाम पर बना था रांची में पर्क
77 के जनआंदोलन के बाद बिहार में सता परिवर्तन हुआ था. उसके बाद जेपी के नाम पर 7.8 एकड़ में सुंदर पार्क बनाया गया था. कटहल मोड़ के समीप यह उद्यान हुआ करता था.
इस उद्यान के बगल से एक नदी बहती थी लोग वहां पिकनिक मनाने के लिए जाते थे. लेकिन अभी उद्यान नहीं है. वहां पर दुकानें खुल गयी हैं. जमीन का निजी तौर पर बंदोबस्त करा लिया गया है.
इससे राज्य सरकार के भू राजस्व विभाग के क्रियाकलाप पर भी प्रश्न खड़ा होता है.
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क्या कहते हैं जेपी उद्यान के बारे में जानकार
1991-92 में बिहार विधानसभा और विधान परिषद की संयुक्त कमेटी सरकारी जमीन और तालाबों पर कब्जा होने का मामला उजागर होने के बाद बनी थी. इसके अध्यक्ष गौतम सागर राणा थे. कमिटी की सिफारिश के बाद कई अधिकारियों पर कार्रवाई हुई और दोषी अधिकारियों को बर्खास्त भी कर दिया गया.
लेकिन वर्तमान समय में झारखंड बनने के बाद अवैध रूप से जमीन पर कब्जा बढ़ गया है. भू राजस्व विभाग के सचिव के द्वारा व्यक्तिगत पत्र लिखे जाने के बाद भी रांची डीसी द्वारा कार्यवाई नहीं की जा रही है.
न्यूजविंग ने रांची डीसी का पक्ष जानने के लिए सम्पर्क का प्रयास किया लेकिन सम्पर्क नहीं हो सका.
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