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लघु कुटीर बोर्ड की उदासीनता से नहीं बने कलस्टर, लोगों को नहीं मिला केंद्र की राशि का लाभ

  • केंद्र की स्फूर्ति योजना के तहत शहद, बैम्बू और बांस के लिए ग्रामीणों के बीच बनाये जाने थे कलस्टर
  • दस प्रतिशत राशि कलस्टर के लोग और 90 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार देती

Ranchi :  केंद्र सरकार की ओर से ग्रामीणों के बीच अलग-अलग लघु उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए स्फूर्ति योजना चलायी गयी. योजना के तहत ग्रामीणों के बीच अलग-अलग कलस्टर निमार्ण कर लोगों को जोड़ना था. भले केंद्र सरकार की ओर से यह योजना साल 2017 में शुरू की गयी. लेकिन राज्य सरकार की ओर से इसपर काम साल 2018 में शुरू किया गया.

लघु कुटीर उद्यम विकास बोर्ड की ओर से कार्यरत जिला संयोजकों को मार्च 2019 में योजना के तहत कलस्टर निमार्ण करने का लक्ष्य दिया गया. इस बारे में जिला संयोजकों से जब बात की गयी. तो उनका कहना था कि बोर्ड की ओर से लक्ष्य तो नर्धारित कर दिया गया.

लेकिन उसके बाद कभी कलस्टर निर्माण की मॉनिटरिंग नहीं की गयी. साथ ही बताया कि बोर्ड के जिला और प्रखंड संयोजकों से समन्वय की कमी की वजह से राज्य में कलस्टर निमार्ण नहीं हो पाया. जबकि उद्योग विभाग की ओर से प्रत्येक जिला में एक कलस्टर का निमार्ण किया जाना था.

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कलस्टर निमार्ण होने पर 90 प्रतिशत पैसे लोगों को मिलते

स्फूर्ति योजना का उद्देश्य कलस्टर के जरिये शहर, बैम्बू और खादी में काम करने वाले लोगों का कलस्टर या समूह बनाना था. समूह बनाने के बाद लघु कुटीर बोर्ड की ओर से कलस्टर से जुड़े ग्रामीणों का उद्योग आधार बनाता और लोगों को इंरोलमेंट नंबर दिया जाता.

जिला संयोजकों की ओर से कलस्टर बनाने की कोशिश तो की गयी. लेकिन बोर्ड की ओर से न ही इन लोगों को उद्योग आधार दिया गया और न ही इंरोलमेंट नंबर. जिसकी वजह से योजना धरी की धरी रह गयी.

लघु कुटीर बोर्ड की ओर से अगर इसपर सही तरीके से पहल की जाती, तो इन ग्रामीणों को उत्पाद निमार्ण के लिए केंद्र सरकार की ओर से लागत की 90 प्रतिशत राशि दी जाती. बाकी दस प्रतिशत राशि कलस्टर के लोगों को आपस में मिलाकर बोर्ड को देना होता. जिसके बाद केंद्र की ओर से राशि दी जाती. कुछ संयोजकों ने बताया कि बोर्ड के अधिकारियों ने इसमें रूचि ही नहीं ली.

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उद्योग विभाग ने दिया बोर्ड को काम

योजना के तहत ग्रामीणों के बीच कलस्टर निमार्ण का कार्य उद्योग विभाग से होना था. लेकिन मैन पावर की कमी के कारण विभाग ने यह योजना लघु कुटीर उद्यम विकास बोर्ड को दे दिया.

बोर्ड की ओर से मार्च 2019 में इसपर काम की पहल की गयी. लेकिन दस माह बाद भी राज्य में एक भी कलस्टर नहीं बनाये गये. हर जिला में एक कलस्टर बनाये जाते. इसमें न्यूनतम 250 से अधिकतम एक हजार तक लोगों को जोड़ा जा सकता है.

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