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सूबे में प्रदूषण रोकने के लिए बना था 655.5 करोड़ का एक्शन प्लान, नहीं हुआ काम 

माइनिंग और ट्रांसपोर्ट से होने वाले प्रदूषण पर अंकुश के लिए कागजों पर ही सिमट कर रह गई योजना

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  • स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट, इको ट्रांसपोर्टेशन और टाउन प्लानिंग के साथ ट्रैफिक मैनेजमेंट की थी बात
  • ग्रामीण सड़कों से खनिजों का परिवहन करने की भी बनी थी योजना
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Ravi Aditya

Ranchi: सूबे को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए 655.5 करोड़ का एक्शन प्लान बना. इस प्लान को भारत सरकार ने भी स्वीकृति दी. प्लान में कई ऐसे उपाय बताये गये थे, जिससे बढ़ रहे प्रदूषण पर अंकुश पाया जा सकता था, लेकिन प्लान के अनुसार कोई काम नहीं हुआ. माइनिंग क्षेत्र में खनन से होने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए 326 करोड़ के एक्शन प्लान को स्वीकृति मिली थी. जबकि शहरी क्षेत्रों में प्रदूषण रोकथाम के लिए 329.50 करोड़ का प्लान था.

शहरों में नहीं बन पाया इकोफ्रेंडली वातावरण

शहरों में अब तक इको फ्रेंडली वातावरण नहीं बन पाया है. प्लान के अनुसार, शहरों में स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट, पीपीपी मोड में इको ट्रांसपोर्टेशन को बढ़ावा देने और टाउन प्लानिंग भी ट्रैफिक प्लान के अनुसार करने की बात कही गई थी. लेकिन सभी प्लान धरे के धरे रह गये. रेन वाटर हार्वेस्टिंग (वर्षा जल प्रबंधन) पर 182 करोड़ रुपये खर्च करने को भी स्वीकृति मिली थी. लेकिन सरकारी उदासीनता के कारण इस पर भी काम नहीं हुआ.

बदलते वातावरण के अनुसार नहीं बन रही योजनाएं

बदलते वातावरण के अनुसार योजनाएं नहीं बन रही हैं. टाउन प्लानिंग और आवासीय परियोजनाओं का डीपीआर जलवायु परिवर्तन को ध्यान में रखकर बनाया तो जा रहा है. लेकिन एक्शन प्लान पर अब काम नहीं होने के कारण इसकी रिपोर्ट तक तैयार नहीं हो पाई है.

झारखंड में बढ़ रहा प्रदूषण

झारखंड के विभिन्न शहरों में बेंजिन, सल्फर डाईऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड की मात्रा में वृद्धि होती जा रही है. सबसे भयावह स्थिति कोयलांचल की है. कोयलांचल में कार्बन मोनोऑक्साइड की मात्रा 2000 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक हो गई है. पार्टिकुलेट मैटर (धूलकण सहित अन्य धातू) की मात्रा खतरे के निशान से 10 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर अधिक है. ओजोन की मात्रा 6.7 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर आंकी गई है. अगर ओजोन की मात्रा में वृद्धि हुई तो ऑक्सीजन में कमी हो जायेगी.

चार जिलों की स्थिति गंभीर

प्रदेश के चार जिले धनबाद, रामगढ़, चाईबासा और सरायकेला-खरसांवा की स्थिति काफी गंभीर है. इसका प्रमुख कारण अवैध तरीके से चल रहे क्रशर और खनन को बताया गया है. इन जिलों में प्रदूषण का इंडेक्स 70 डेसीबल पार कर चुका है. इस वजह से स्थिति गंभीर हो गई है. धनबाद का इंडेक्स 78.63 तक पहुंच गया है. झारखंड के शेष जिलों का इंडेक्स 60 से कम है. 70 डेसीबल तक इंडेक्स जाने की स्थिति को गंभीर माना जाता है.

माइनिंग क्षेत्र में प्रदूषण रोकने के लिए कितना होता खर्च

ओपेन और अंडरग्राउंड माइनिंग- 5.5 करोड़
ग्रीन ग्रोथ प्लानिंग- 6.5 करोड़
ग्रामीण सड़कों से खनिजों का परिवहन कम करने- 300 करोड़
प्रदूषण कम करने के लिए ट्रांसपोर्टेशन- 3 करोड़
खदान क्षेत्र में रेन वाटर हार्वेस्टिंग व ग्राउंड वाटर रिचार्ज- 12 करोड़
वाटर डिस्चार्ज व खनिजों को धोने के लिए बाउंड्री निर्माण- 2 करोड़

शहरों में प्रदूषण रोकने के लिए अर्बन ट्रांसपोर्टिंग पर कितना होता खर्च

शहरी क्षेत्र में जल प्रबंधन- 0.5 करोड़
बिल्डिंग और अर्बन सेटलमेंट- 0.25 करोड़
सरकार के नियंत्रण में जल स्त्रोतों का प्रबंधन- 15 करोड़
रेन वाटर मैनेजमेंट- 182 करोड़
शहरी क्षेत्र में कार्बन की मात्रा कम करने- 40.25 करोड़
ठोस कचरा प्रबंधन- 02 करोड़
शहरों को प्रदूषण मुक्त करने- 15.75 करोड़
शहरों में ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट- 55.75 करोड़
शहरों में इको-फ्रेंडली को बढ़ावा देने- 14 करोड़

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