
Ranchi: झारखंड में किसानों के विकास का दावा खोखला साबित हो रहा है. सिंचाई की मध्यम और बड़ी परियोजनाओं में आज की तारीख तक 6302 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं. लेकिन 12 फीसदी ही सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है. 88 फीसदी खेतों में पानी नहीं पहुंच पाया है. राज्य में 38 लाख हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि है. लेकिन सिंचाई सुविधा नहीं होने के कारण 18.04 लाख हेक्टेयर में ही खेती होती है. जबकि कृषि कार्य में 67 फीसदी लोग लगे हैं.
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वही झारखंड के साथ बने उत्तराखंड में 45 फीसदी से अधिक सिंचाई की व्यवस्था है. पड़ोसी राज्य बिहार में 43.86 लाख हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है. झारखंड में वर्षा जल संरक्षण पर भी काम नहीं हो पाया है.
दो विभागों के बीच आंकड़ों की बाजीगरी भी
सिंचाई को लेकर दो विभाग जलसंसाधन और कृषि विभाग के बीच आंकड़ों की बाजीगरी भी है. दोनों विभागों के आंकड़ों में विरोधाभाष है. जलसंसाधन विभाग के अनुसार, प्रदेश में कुल कृषि योग्य भूमि पर 35.60 फीसदी सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है. जबकि कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार सिर्फ 12 फीसदी ही सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है. प्रदेश में औसत वर्षा 1400 मिलीलीटर होने के बावजूद सिंचाई सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाई है.
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अंतराज्यीय अड़चन भी बड़ी बाधा
अंतरराज्यीय समझौते के कारण झारखंड के जलाशयों में जमा पानी, पड़ोसी राज्यों को देना पड़ता है. प्रदेश का अधिकांश हिस्सा पठारी है. नदियों में बराज, डैम, चेकडैम के उचित स्थान में निर्माण नहीं होने के कारण पानी बह जाता है. वहीं चार नदियों को जोड़ने वाली योजना भी ठंढ़े बस्ते में चली गई. कई जलाशयों के पानी को लेकर पड़ोसी राज्यों से अब तक विवाद बना हुआ है.
नदियां हो गई है अतिक्रमित
प्रदेश की कई नदियों के किनारे की जमीन पर अतिक्रमण हो गया है. इस पर जलसंसाधन मंत्री सीपी चौधरी ने विभागीय सचिव को पीत पत्र लिख कर कहा था कि नदियां जल संसाघन विभाग की संपदा है. नदियों के किनारे की जमीन पर अवैध कब्जा किया जा रहा है. औद्योगिक घरानों द्वारा अवैध तरीके से पानी का दोहन हो रहा है. मंत्री ने पानी के अवैध दोहन व अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया था. लेकिन स्थिति अब तक जल की तस बनी हुई है.
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कौन परियोजना कितने करोड़ की
स्वर्णरेखा परियोजना- 6613.74 करोड़
अजय बराज- 331 करोड़
गुमानी- 162 करोड़
कोनार- 348.38 करोड़
पुनासी- 185 करोड़
अमानत- 341 करोड़
सुकरी- 07 करोड़
सोनुआ- 83 करोड़
अपर शंख- 141.19 करोड़
सुकरी- 9.35 करोड़
रैसा- 67.68 करोड़
सोनुआ- 8.92 करोड़
सुरंगी-41.17 करोड़
पंचखेरा- 75.68 करोड़
भैरवा- 118.30 करोड़
नकटी- 31.5 करोड़
रामरेखा- 53.86 करोड़
केसो- 131 करोड़




