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चार साल में भी पूरी नहीं हो सकी 55 करोड़ की पाकुड़ शहरी जलापूर्ति योजना

Ranchi/Pakur: 55 करोड़ से अधिक की लागतवाली पाकुड़ शहरी जलापूर्ति योजना तय अवधि में भी पूरा नहीं हो सकी है. नयी दिल्ली की टहल इंजीनियरिंग योजना को क्रियान्वित कर रही है. पांच वर्षों में भी योजना पूरा नहीं होने पर अब कांट्रैक्टर कंपनी पेयजल और स्वच्छता विभाग के अफसरों और इंजीनियरों पर आरोप मढ़ने लगी है. जानकारी के अनुसार फरक्का बराज से पाकुड़ शहर के लिए पीने का पानी मुहैया कराने की योजना को 2013-14 में ही स्वीकृति दी गयी थी. तत्कालीन अपर मुख्य सचिव सुधीर प्रसाद के कार्यकाल में योजना को मंजूरी दी गयी थी. इसके बाद निकाली गयी निविदा में टहल इंजीनियरिंग को कार्यादेश दिया गया. पहले 55 किलोमीटर दूरी तक पानी लाने का विवाद चला. इसके सुलझने पर काम शुरू किया गया. टहल इंजीनियरिंग का कहना है कि योजना से संबंधित ड्राइंग और डिजाइन समय पर स्वीकृत नहीं किये गये और न ही योजना के लिए पाकुड़ शहर में पानी की टंकी निर्माण करने की जमीन मुहैया करायी गयी.

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तीन लाख की आबादी को मिलता पानी

विभाग के अधीक्षण अभियंता (सीडीओ) प्रमोद भट्ट ने कहा कि कांट्रैक्टर कंपनी जानबूझ कर योजना में विलंब कर रही है. सरकार की तरफ से दिये गये एक्सटेंशन के बावजूद योजना को पूरा नहीं किया गया. पेयजल और स्वच्छता विभाग के सेंट्रल ड्राइंग आरगनाइजेशन (सीडीओ) की तरफ से जलापूर्ति योजना की सारी इंजीनियरिंग ड्राइंग और डिजाइन एप्रूव कर दी गयी है. ऐसे में अफसरों पर गलत इल्जाम लगाना ठीक नहीं है. उन्होंने कहा कि योजना को लेकर 70 फीसदी से अधिक का भुगतान भी कंपनी ले चुकी है.योजना के पूरा होने से पाकुड़ शहर की तीन लाख की शहरी आबादी को पीने का पानी मुहैया हो पाता. अब तक टहल इंजीनियरिंग की तरफ से पाइपलाइन बिछाने का काम पूरा कर लिया गया है. गंगा नदी पर इंटेक वेल और अन्य का निर्माण भी पूरा कर लिया गया है. शहरी इलाकों में पानी की टंकी बनाने का काम अब तक लटका हुआ है.

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