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नहीं मिले सरकार से 50 करोड़, झारखंड बिजली बोर्ड ने अटल ज्योति योजना व तिलका मांझी योजना की बंद

  • अटल ग्राम ज्योति योजना और तिलका मांझी कृषि योजना बंद हुए.
  • अटल ग्राम ज्योति योजना के तहत दो लाख 50 हजार घरों को मिली निशुल्क बिजली.
  • बजटीय प्रावधान कम होने के कारण योजना को धरातल पर नहीं उतार पा रहा है विभाग.

Ranchi: बजटीय प्रावधान कम होने के कारण उर्जा विभाग की ओर से अटल ग्राम ज्याति योजना और तिलका मांझी कृषि योजना बंद कर दी गयी है.

ग्रामीण क्षेत्रों में निशुल्क बिजली मिलें इसके लिए राज्य सरकार ने अटल ग्राम ज्योति येाजना की शुरूआत की. वहीं किसानों को खेती पंप और खेती फीडर लगाने के लिए तिलका मांझी कृषि योजना की शुरूआत की गयी.

दोनों ही योजना साल 2015-16 में शुरू की गयी. लेकिन अब उर्जा विभाग इस योजना को संचालित नहीं कर पा रही. विभाग की मानें तो सरकार ने अब इस योजना के तहत फंडिंग ही कम कर दी है.

दोनों ही योजना के लिए शुरूआत में विभाग को सरकार ने 50 करोड़ रूपये आवंटित किये थे. अब साल 2019-20 के लिये सरकार की ओर से इस योजना के लिये एक करोड़ रूपये आवंटित किये गये. ऐसे में विभागीय अधिकारियों के बीच काफी असंमजस है. विभाग इतनी कम राशि में योजना क्रियान्वित नहीं कर सकती.

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लगभग दो लाख 50 हजार घरों को मिला निशुक्ल बिजली

अटल ग्राम ज्योति योजना को देखें तो साल 2015-16 से लेकर साल 2018-19 तक लगभग दो लाख पचास हजार ग्रामीण घरों को निशुल्क बिजली दी गयी. इस योजना में एपीएल घरों को भी निशुल्क बिजली दिया गया.

योजना में एपीएल घरों को शामिल करने का उद्देश्य रखा गया. क्योंकि इसके पहले बिजली कनेक्शन के लिये जितनी भी योजनाएं थी उसमें सिर्फ बीपीएल परिवारों को ही निशुल्क बिजली दी जाती रही है.

फिलहाल इस योजना का कार्य दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना से किया जा रहा है. हालांकि दीन दयाल उपाध्याय योजना साल 2017 से संचालित है.

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विभाग की ओर से खर्च नहीं किये जाने पर कम किया गया बजट

अधिकारियों की मानें तो सरकार की ओर से पहले 50 करोड़ रूपये दोनों योजनाओं के लिए दी जाती थी. लेकिन विभाग इन पैसों को सही से खर्च नहीं कर पायी.

विभाग का यह काम झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड की ओर से किया जाता है. ऐसे में विभाग और जेबीवीएनएल की ओर से पैसे खर्च नहीं किये जाने के कारण सरकार ने बजटीय प्रावधान ही कम कर दिया.

अब विभाग के पास स्थिति ये है कि विभाग इन दोनों योजनाओं का क्रियान्वयन नहीं कर पा रही. हालांकि जेबीवीएनएल की ओर से अब तक 116 कृषि फीडर लगाये गये हैं. अब भी 257 कृषि फीडर लगाये जाने बाकी हैं.

अधिकारियों की मानें तो नियमत किसी योजना को बीच में बंद नहीं किया जा सकता और खासकर जब योजना के लिये बजटीय प्रावधान हो. लेकिन विभाग के पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है.

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