
Ranchi : अपने स्रोतों से बिजली आपूर्ति के लिए राज्य ऊर्जा संचरण निगम ने एक और कदम बढ़ाया है. संचरण निगम की ओर से रविवार को एक और ग्रिड सब स्टेशन और ट्रांसमिशन लाइन निमार्ण की नींव रखी गयी. यह ग्रिड सब स्टेशन साहेबगंज के बरहेट में बनाया जा रहा है.
बरहेट में ग्रिड सब स्टेशन बनाने के लिए 70.64 करोड़ रूपये आवंटित किया है. इसके साथ ही राज्य में 48 ग्रिड सब स्टेशन बनाये जा रहे है. जो अलग अलग स्कीम के तहत बनाये जा रहे है. राज्य ऊर्जा संचरण निगम की मानें तो वर्तमान में 49 ग्रिड सब स्टेशन राज्य में है. आने वाले समय में अन्य 48 ग्रिड सब स्टेशन बन रहे है. फिलहाल इसमें वक्त लगेगा. लेकिन 24 7 बिजली के लिए राज्य को इन संसाधनों की जरूरत है.
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एनटीपीसी से बिजली लेने के लिए बन रही लाइन
राज्य में जल्द ही एनटीपीसी पावर प्लांट चतरा में बिजली उत्पादन शुरू हो जायेगा. मार्च में इसके ट्रायल होने की संभावना है. जिससे राज्य को 500 मेगावाट बिजली मिलेगी. राज्य सरकार की ओर से पकड़ी बरवाडीह के बीच ट्रांसमिशन लाइन बनाया जा रहा है.
वहीं चतरा से लातेहार के बीच भी ट्रांसमिशन लाइन बनाया जा रहा है. जिससे राज्य के अन्य हिस्सों को बिजली मिलें. इस लाइन के बनने के बाद इटखोरी चतरा स्थित ग्रिड सब स्टेशन शुरू कर दिया जायेगा. ऊर्जा संचरण निगम का दावा है कि ऐसा करने से डीवीसी पर निर्भरता कम होगी.
साहेबगंज के लोगों को वोल्टेज समस्या से राहत
फिलहाल बरहेट में ग्रिड सब स्टेशन की नींव रखी गयी. यहां सब स्टेशन बनने से यहां के लोगों को बिजली समस्या से राहत मिलेगी. इस क्षेत्र में बोल्टेज की समस्या रहती है. खुद संचरण निगम की मानें तो क्षेत्र में साहेबगंज स्थित ग्रिड सब स्टेशन से बिजली आपूर्ति होती थी. जिसकी क्षमता 60 किमी है.
ऐसे में लोगों को कम वोल्टेज की बिजली मिलती थी. वहीं ट्रांसमिशन लाइन पाकुड़ राजमहल के बीच बनायी जायेगी. यह सब स्टेशन 18 से 24 महीने में बन कर तैयार होगा. इलाके में बारिश तुफान के दौरान अक्सर बिजली गुल होने की समस्या होती थी. जिससे न सिर्फ बरहेट बल्कि आस पास के इलाकों के लोगों को भी परेशानी होती थी. इस ग्रिड सब स्टेशन के बनने से लोगों को निर्बाध बिजली मिलेगी.
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छह ग्रिड सब स्टेशनों का किया गया उद्घाटन
इसके पहले 18 अगस्त को छह ग्रिड सब स्टेशनों का उद्घाटन किया गया था. जिसमें गढ़वा, जसीडीह, गोड्डा, गिरिडीह, सरिया और जमुआ है. इन क्षेत्रों में ट्रांसमिशन लाइन शुरू होने से डीवीसी पर निर्भरता कम हुई. वहीं डीवीसी से हर महीने 225 करोड़ रूपये की बिजली खरीद से भी जेबीवीएनएल को राहत मिली. फिलहाल मात्र 150 करोड़ रूपये की बिजली हर महीने खरीदी जाती है.
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