
- झारखंड समेत 11 राज्यों में रोजी-रोटी अधिकार अभियान के हंगर वॉच सर्वे में सामने आयी बात
Ranchi : कोरोना संकट और लॉकडाउन ने लोगों के जीवन को गहरे तक प्रभावित किया है. रोजी-रोटी अधिकार अभियान के अनुसार लॉकडाउन के दौरान झारखंड सहित दूसरे राज्यों के लोगों को भूख की कठिन स्थिति से गुजरना पड़ा है. अभियान की ओर से सितंबर, 2020 में कुछ राज्यों में भूख की स्थिति जानने के लिए हंगर वॉच की शुरुआत की गयी थी. इन राज्यों में झारखंड के अलावा यूपी, मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, छत्तीसगढ़, दिल्ली, तेलंगाना, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल समेत 11 राज्य शामिल हैं. हंगर वॉच के जरिये हुए सर्वे में पाया गया कि अनलॉक प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद आर्थिक संकट जारी है.
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अभियान के अनुसार, सर्वे में शामिल लोगों में से 45 फीसदी ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान भोजन के लिए उन्हें दूसरों से उधार लेना पड़ा. सर्वे में अलग-अलग राज्यों से लगभग 4000 लोगों को शामिल किया गया था. इनमें से 56 फीसदी लोग ऐसे थे, जिन्हें लॉकडाउन से पहले कभी भूखे रहने की नौबत नहीं आयी थी. 27 फीसदी ऐसे थे, जिन्हें सितंबर-अक्टूबर के दौरान बगैर खाना खाये सोना पड़ा.
71 फीसदी लोगों को पौष्टिक भोजन की कमी झेलनी पड़ी
अभियान ने बुधवार को सर्वे रिपोर्ट की प्राइमरी सूचना ऑनलाइन जारी की. इसके मुताबिक 17 फीसदी लोग ऐसे थे जो लॉकडाउन से पहले अक्सर अंडा, नॉन वेज का सेवन लगातार कर लेते थे. पर, सितंबर-अक्टूबर में ऐसी स्थिति हो गयी कि 91 फीसदी लोगों को पैसे के अभाव में मांस, मछली, अंडा का सेवन न्यूनतम करना पड़ा. 71 फीसदी लोग ऐसे थे, जिन्हें इसी अवधि में पौष्टिक खाना की कमी का सामना करना पड़ गया.
57 प्रतिशत परिवारों को मिला मिड डे मील का लाभ
सर्वे के अनुसार स्कूल जानेवाले बच्चों (2531 घर) में से 57 प्रतिशत के परिजनों ने कहा कि उनके बच्चों को सितंबर-अक्टूबर में मिड डे मील या वैकल्पिक सूखा राशन मुहैया कराया गया. 86 फीसदी लोग, जिनके पास कोई राशन कार्ड था, उन्हें अप्रैल से अगस्त तक का खाद्यान्न मिला. छोटे बच्चों, गर्भवती या स्तनपान करानेवाली महिलाओं (2125 घरों) के घरों में से 48 फीसदी ने कहा कि उन्हें सितंबर-अक्टूबर के दौरान आंगनबाड़ियों से पूरक या वैकल्पिक सूखा राशन मिला.
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