Ranchi. झारखंड मनरेगा कर्मचारी संघ की हड़ताल 42वें दिन भी जारी रही. मनरेगाकर्मियों के हड़ताल के कारण ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध करने की सरकार की प्रतिबद्वता प्रभावित हो रही है. 3 सितंबर को विभागीय मंत्री के साथ मनरेगाकर्मियों की शिष्टमंडल की वार्ता हुई. जिसका कोई परिणाम समाने नहीं आया.
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मनरेगाकर्मियों वर्ता में सहमति बनी बिंदुओं पर लिखित समझौता चहते हैं जिसे विभाग ने स्वीकार नहीं किया. मनरेगा कर्मचारी संघ के सचिव जॉन पीटर बागे का कहना है कि मनरेगा कर्मियों में 99 प्रतिशत लोग झारखंड के हैं. अब तक पूर्व की सरकारें ने सिर्फ वादे किये थे, जिससे वह मुकरती रही. सरकार से जब तक लिखित समझौता नहीं होता हड़ताल जारी रखा जायेगा. विभाग के रवैये से मनरेगाकर्मी हड़ताल पर जाने को मजबूर हुए हैं.
इन मुद्दों पर हुई चर्चा
400 मेन डे रोजगार सृजन करने का विभाग दे रहा था दबाब. हड़ताल के कारण ग्रामीणों को काम नही मिल पा रहा जिसका हमे भी दुख है झारखड़ी होने के नाते.क्या रखा था प्रतिनिधिमंडल ने विभागीय मंत्री से हुई वार्ता में झारखंड मनरेगा कर्मचारी संघ ने वार्ता में अपनी बातों को मजबूती के साथ रखा जिसमें स्थायीकरण, वेतनमान, सामाजिक सुरक्षा, बर्खास्तगी पर रोक, उम्र सीमा में छूट एवं नियुक्तियों में आरक्षण, हड़ताल अवधि का मानदेय भुगतान तथा हड़ताल अवधि में किए गए दंडात्मक कार्रवाई प्रदेश अध्यक्ष की बर्खास्तगी और अन्य कर्मियों पर की गई कार्रवाई को वापस लेने पर चर्चा हुई.
जॉब सिक्योरिटी हड़ताल का एक बड़ा कारण
मनरेगाकर्मियों की वार्ता में जॉब सिक्योरिटी पर चर्चा हुई, क्योंकि मनरेगाकर्मी विगत 12- 13 वर्षों से सरकार को अपनी सेवा देते आ रहे हैं. इस पर अब अगर बर्खास्त करने जैसी कार्रवाई की जाती है तो मनरेगा कर्मी क्या करेंगे. कहां जाएंगे. मनरेगाकर्मियों का कहना है कि जहां अनियमितता होता है और दोषी पाये जाते हैं. कर्मी ऐसे में प्रखंड विकास पदाधिकारी से लेकर मनरेगा कर्मियों तक कार्रवाई हों, बर्खास्त करने के बजाय इन्हें निलंबित किया जाए या राशि वसूली या अन्य कर्रवाई की जा सकती है.
पूर्व की सरकार ने भी किया था वादा
संघ के महासचिव मोहम्मद इम्तियाज कहते हैं कि पूर्व की सरकार में भी मनरेगा कर्मियों को ठगने का काम किया था. ग्रामीण विकास मंत्री रहे सुदेश महतो, ददई दुबे, केएन त्रिपाठी, नीलकंठ सिंह मुंडा ने भी हमारी मांगों पर सिर्फ आश्वासन ही दिया था. पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा और रघुवर दास के द्वारा भी आश्वासन दिया गया था कि मनरेगा कर्मियों के लिए बहुत अच्छा किया जा रहा है परंतु आज तक मनरेगा कर्मियों की समस्या जस का तस हैं. मनरेगा कर्मियों ने अपनी पीड़ा सरकार तक पहुंचाने का काम किया पर विभाग के कान पर जूं तक नहीं रेंगी. जिस कारण मनरेगाकर्मियों को अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के लिए मजबूर होना पड़ा.




