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#DoubleEngine की सरकार में बेबस छात्र-5 : 556 प्रोफेसर बनाने का सपना 4 साल दिखाया, फिर तोड़ दिया

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Kumar Gaurav

Ranchi : डबल इंजन की सरकार. सबका साथ सबका विकास का नारा. लाखों सरकारी नौकरियों का वादा. शिक्षा और स्वास्थ्य की स्थिति को उंचाई तक ले जाने का भरोसा. ये बातें सरकार लगातार कहती रहती है.

पर बेरोजगार और बेरोजगारी की कहानी सारी असलियत खोलती नजर आती है. सरकार की तरफ से सरकारी नौकरियों के लिए विज्ञापन तो निकाला जाता है पर वह सिर्फ विज्ञापन तक ही सीमित रह जाता है.

जेपीएससी ने अप्रैल 2016 में अस्सिटेंट प्रोफेसर और प्रोफेसर के कुल 556 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया था. राज्य के पांच विश्वविद्यालयों में प्रोफेसरों को नियुक्त करना था.

चार साल छात्रों को सरकार ने प्रोफेसर बनने के सपने दिखाये, छात्रों ने सपने देखे. सपनों को हकीकत में बदलने के लिए छात्रों ने जीतोड़ मेहनत भी की.

पर चार साल पूरा हो जाने के बाद सरकार ने अपरिहार्य कारण बताकर उन हजारों छात्रों के सपने को तोड़ दिया.

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दो बार निकाला विज्ञापन, तीसरी बार में कर दिया रद्द

जेपीएससी की अधिकतर परीक्षाओं की कहानी का हाल यह है कि एक परीक्षा के लिए दो बार कम से कम विज्ञापन जरूर निकलता है. परीक्षा की अवधि न्यूनतम तीन साल मानी जा सकती है.

अस्सिटेंट प्रोफेसर की परीक्षा के लिए भी सबसे पहले अप्रैल 2016 में विज्ञापन निकाला गया. उसे 2018 में स्थगित किया गया. फिर 2018 में दोबारा आवेदन मांगे गये.

तीसरी बार 15 जनवरी को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर जेपीएससी ने परीक्षा को फिर से स्थगित कर दिया. सरकार के पांच साल होने को हैं.

जेपीएससी द्वारा डबल इंजन वाली सरकार के कार्यकाल में गिनती मात्र की परीक्षाओं को पूरा कर नियुक्ति की गयी है. अधिकतर परीक्षाओं को प्रक्रिया में ही छोड़ दिया गया है.

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प्रोफेसर की कमी से जूझ रहे राज्य के विश्वविद्यालय

राज्य के अधिकतर सरकारी विश्वविद्यालयों में प्रोफेसरों की भारी कमी है.

नियुक्ति के लिए विज्ञापन को देखा जाये तो ही 556 प्रोफेसरों की सीट खाली है. और अगले एक साल और खाली रहेगी, वो भी अगर जेपीएससी सरकार प्रक्रिया चालू कर देती है.

पिछली बार हुई जेपीएससी अस्सिटेंट प्रोफेसरों की बहाली भी संदेह के घेरे में है. पिछली परीक्षा से नियुक्त 65 प्रोफेसरों पर सीबीआइ ने चार्जशीट भी कर दिया है.

इन विश्वविद्यालयों में होनी थी बहाली

रांची विश्वविद्यालय – 148

बिनोवा भावे विश्वविद्यालय – 145

सिदो-कान्हू विश्वविद्यालय – 110

नीलांबर पितांबर विश्वविद्यालय – 50

कोल्हान विश्वविद्यालय – 107

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