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झारखंड में पिछले 10 महीने में 10 जवान हुए शहीद

Ranchi: झारखंड में नक्सलियों के खात्मे के लिए लगातार सुरक्षाबलों के द्वारा अभियान चलाया जा रहा है. लेकिन इसके बावजूद झारखंड में सक्रिय नक्सली सुरक्षाबलों के लिए चुनौती बने हुए हैं.

नक्सली समय-समय पर उपस्थिति भी दर्ज करवा रहे हैं. पिछले 10 महीनों की बात करें तो झारखंड में पुलिस और नक्सलियों के बीच 28 से अधिक मुठभेड़ हुई जिनमें सुरक्षाबल के 10 जवान शहीद हो गये और इस दौरान मुठभेड़ में 22 नक्सली भी मारे गये.

झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा है राज्य में नक्सली अपनी अंतिम सांसे गिन रहे हैं. नक्सलियों को कड़ी चेतावनी देते हुए यहां कहा कि राज्य में अंतिम सांस ले रहे उग्रवादी आत्मसमर्पण करें और मुख्यधारा से जुड़ें, अन्यथा उन्हें पाताल से भी खोजकर मार दिया जायेगा.

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झारखंड में बचे हैं सिर्फ 550 माओवादी

झारखंड पुलिस का दावा है कि झारखंड में अब सिर्फ 550 माओवादी बचे हैं. लेकिन 550 माओवादियों से लड़ने के लिए भारी संख्या में सुरक्षाबल लगे हुए हैं.

जिनमें सीआरपीएफ की 122 कंपनी, आइआरबी की 5 कंपनी और झारखंड जगुआर की 40 कंपनी फोर्स लगी हुई है. इतनी भारी संख्या में सुरक्षा बल के तैनात होने के बावजूद भी झारखंड से पूरी तरह से माओवाद का खात्मा नहीं हो पा रहा है. समय-समय पर माओवादी छोटी-बड़ी घटना को अंजाम देकर अपनी उपस्थिति भी दर्ज करवा रहे हैं.

झारखंड में 10 महीने में मारे गये 22 नक्सली

झारखंड में जनवरी 2019 से लेकर अब तक पुलिस और नक्सली संगठनों के बीच 28 बार मुठभेड़ हुए हैं. मुठभेड़ में 22 उग्रवादियों और नक्सलियों की मौत हुई है.

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इस मुठभेड़ में सबसे अधिक पीएलएफआइ के उग्रवादी मारे गये हैं. 22 मारे गये नक्सली और उग्रवादियों में पीएलएफआइ के 11 उग्रवादी मारे गये हैं. वहीं भाकपा माओवादी के पांच, जबकि टीपीसी व जेजेएमपी के तीन-तीन उग्रवादी मारे गये हैं.

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देश के 30 अति नक्सल प्रभावित जिलों में 13 झारखंड के जिले

झारखंड में भले नक्सली कमजोर पड़ गये हैं और झारखंड पुलिस लगातार नक्सलियों के खात्मे की अभियान चला रही है. इसके बावजूद भी देश के 30 नक्सल प्रभावित जिलों में 13 जिले झारखंड के हैं, जो सर्वाधिक नक्सल प्रभावित जिलों की सूची में हैं.

सर्वाधिक नक्सल प्रभावित जिले के मामले में झारखंड पहले स्थान पर है, तो वहीं छत्तीसगढ़ के 8 जिले सर्वाधिक नक्सल प्रभावित जिलों के साथ दूसरे स्थान पर है.

झारखंड के सर्वाधिक नक्सल प्रभावित जिलों में खूंटी, गुमला, लातेहार, सिमडेगा, पश्चिम सिंहभूम, रांची, दुमका, गिरिडीह, पलामू, गढ़वा, चतरा, लोहरदगा और बोकारो है. सरायकेला,पूर्वी सिंहभूम, हजारीबाग,धनबाद, गोड्डा भी नक्सलवाद की समस्या से जूझ रहे हैं.

वहीं कम संवदेनशील जिलों में कोडरमा,जामताड़ा, पाकुड़ और रामगढ़ है. जबकि देवघर-साहेबगंज नक्सल प्रभावित नहीं माना गया है.

माओवादियों के खिलाफ चल रहा पुलिस का डेवलपमेंट एक्शन प्लान

सारंडा एक्शन प्लान, सरयू एक्शन डेवलपमेंट प्लान, झुमरा एरिया डेवलपमेंट एक्शन प्लान, पारसनाथ एरिया डेवलपमेंट प्लान, चतरा एरिया डेवलपमेंट एक्शन प्लान, बानालात इंटीग्रेटेड एक्शन प्लान, गिरिडीह-कोडरमा बॉर्डरिंग एरिया डेवलपमेंट प्लान, दुमका-गोड्डा बॉर्डरिंग एरिया डेवलपमेंट प्लान, खूंटी-सरायकेला-चाईबासा बॉर्डरिंग एरिया एक्शन प्लान, सिमडेगा खूंटी बॉर्डरिंग एरिया एक्शन प्लान, जमशेदपुर एरिया एक्शन प्लान, पलामू-चतरा एरिया एक्शन प्लान व गढ़वा लातेहार-पलामू बॉर्डरिंग एरिया एक्शन प्लान.

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पिछले 10 महीनों में 10 जवान हुए शहीद

  • 15 अप्रैल 2019: झारखंड के उग्रवाद प्रभावित जिला गिरिडीह में हुए मुठभेड़ में तीन माओवादी मारे गये. इस दौरान केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल का एक जवान विश्वजीत चौहान भी शहीद हो गया.
  • 2 जून 2019: दुमका के रानेश्वर थाना क्षेत्र स्थित कठलिया गांव में अहले सुबह चार बजे नक्सलियों और पुलिस के बीच मुठभेड़ हुई जिसमें एसएसबी एक जवान नीरज छेत्री शहीद हो गया.
  • 28 मई 2019: सरायकेला-खरसावां में मंसुबह पुलिस बलों रीडिंग व बुरुटोला जंगल इलाके में हुए आइईडी ब्लास्ट में 15 जवान घायल हो गये थे जिनमें एक जवान की इलाज के दौरान कोलकाता में मौत हो गयी थी.
  • 14 जून 2019: सरायकेला जिले के चांडिल के पास तिरुलडीह थाना क्षेत्र के कुकडु साप्ताहिक हाट में शाम 5.45 बजे नक्सलियों ने पुलिस के गश्ती दल पर हमला कर दिया. इसमें दो एएसआइ सहित पांच जवान शहीद हो गये.शहीद हुए जवानों में एएसआई मनोधन हासदां,एएसआई गोवर्धन पासवान, कांस्टेबल युधिष्ठिर मालुवा,कांस्टेबल धनेश्वर महतो औरकांस्टेबल डिबरू पूर्ति का नाम शामिल थे.
  • 4 अक्टूबर 2019: रांची के दशम फॉल जंगल में पुलिस और नक्सलियों के बीच हुए मुठभेड़ में झारखंड जगुआर के दो जवान खंजन कुमार महतो और अखिलेश राम शहीद हो गये.

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