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रांची में 30 चिकन और मछली व्यापारी ही लाइसेंसी, बाकी सभी दुकानें गैर लाइसेंसी

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  • स्वास्थ्य विभाग और निगम में तालमेल का अभाव
  • रांची एसडीओ ने कहा- टीम बनाकर चलाया जायेगा अभियान
  • एसीएमओ ने तीन और फूड सिक्योरिटी ऑफिसर ने दिया 27 को लाइसेंस
  • एनओसी दिये बिना ही कइयों का बना लाइसेंस
  • निगम ने बनायी थी ऐसी दुकानों के लिए नियमावली, नहीं हो रहा पालन
  • फूड सिक्योरिटी ऑफिसर ने माना- प्रज्ञा केंद्रों से रजिस्ट्रेशन होना है बड़ी परेशानी

Ranchi : रांची शहर के कई इलाकों में आज भी स्वास्थ्य मानकों का पालन किये बिना चिकन, मछली धड़ल्ले से बेचे जा रहे हैं. इसका कारण रांची नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग के आपसी तालमेल की कमी के कारण ऐसी दुकानों का अंधाधुंध रजिस्ट्रेशन किया जाना है. इन दुकानों में न तो साफ-सफाई की कोई विशेष व्यवस्था है, न ही डीप फ्रीजर की व्यवस्था. सबसे आश्चर्य की बात यह है कि रांची नगर निगम कार्यालय के पास ही ऐसी कई चिकन की दुकानें हैं, जो स्वास्थ्य मानकों की अनदेखी की जा रही है. जानकारी के मुताबिक, शहर में करीब 400 दुकानों का रजिस्ट्रेशन किया गया है. रजिस्ट्रेशन के बाद लाइसेंस लेने की बात करें, तो फूड सिक्योरिटी ऑफिसर के मुताबिक शहर में अब तक 27 लोगों को ही (36 से 55 वार्डों तक) लाइसेंस दिया गया है. रांची के असि‍स्टेंट चीफ मेडिकल ऑफिसर (एसीएमओ) का कहना है कि जब तक लाइसेंस देने का काम उनके जिम्मे था, तो उनके द्वारा केवल तीन दुकानों को ही लाइसेंस दिया गया है. ऐसे में अब तक केवल 30 दुकानों को ही लाइसेंस दिये जाने की बात सामने आ रही है. वहीं, निगम की स्वास्थ्य पदाधिकारी का कहना है कि निगम जब तक ऐसी दुकानों को एनओसी नहीं दे देता है, तब तक खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी की तरफ से लाइसेंस नहीं दिया जा सकता. लेकिन, एनओसी दिये बिना ही आज लाइसेंस दिया जा रहा है.

बनी थी नियमावली, अब की जा रही अवहेलना

मालूम हो कि पूर्व नगर आयुक्त प्रशांत कुमार ने अपने कार्यकाल में चिकन, मछली विक्रेताओं को लाइसेंस देने के लिए निगम की ओर से नियमावली बनाये जाने की बात कही थी. उन्होंने कहा था कि कैबिनेट से सहमति मिलते ही नियमावली पास हो जायेगी. जब तक कैबिनेट से सहमति नहीं मिलती है, तब तक लाइसेंस जारी नहीं होगा. इसके उलट आज भी शहर में कई दुकानें चल रही हैं.

स्वच्छता सर्वेक्षण में बन सकता है चुनौती

राजधानी में इन दिनों स्वच्छता सर्वेक्षण-2019 का काम तेजी से चल रहा है. सफाई व्यवस्था को लेकर निगम बोर्ड बैठक में कई प्रस्तावों पर सहमति भी बनी है. लेकिन, इसके उलट इन दुकानों के पास फैलती गंदगी सर्वेक्षण पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर रही है.

बिना एनओसी के दिया जा रहा लाइसेंस, किया जायेगा फील्ड वेरिफिकेशन : किरण कुमारी

निगम की स्वास्थ्य पदाधिकारी किरण कुमारी का कहना है कि ऐसी दुकानों के लिए निगम से एनओसी लेना जरूरी है. लेकिन, स्वास्थ्य विभाग और निगम के बीच आपसी तालमेल नहीं होने के कारण चिकन दुकान संचालित हैं. उन्होंने स्वीकार कि ऐसी दुकानें संचालित करनेवाले लोग स्वास्थ्य मानकों का अनुपालन नहीं कर रहे हैं. अब जल्द ही निगम अपने स्तर पर एक फील्ड वेरिफिकेशन करेगा, ताकि ऐसी दुकानों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाये.

अपने स्तर पर तीन दुकानों को ही दिया था लाइसेंस : एसीएमओ

पूर्व में लाइसेंस देने का काम कर रहीं असिस्टेंट चीफ मेडिकल ऑफिसर (एसीएमओ) नीलिमा चौधरी ने कहा है कि उन्होंने अपने अधिकार के दौरान शहर के तीन लोगों को ही लाइसेंस दिया था. अब लाइसेंस देने की जिम्मेदारी खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी एलबी सिंह की है, जो रांची एसडीओ ऑफिस के अंतर्गत आते हैं. पहले उनके द्वारा समय-समय पर ऐसी दुकानों के विरुद्ध कार्रवाई की जाती रही है. लाइसेंस देने से पहले निगम के अंतर्गत दुकानों को एनओसी दिया जाता है. उसके बाद ही लाइसेंस जारी किया जा सकता है. लेकिन, शहर में जिस तरह से दुकानें चल रही हैं, उससे पता चलता है कि कई दुकानदारों ने लाइसेंस नहीं लिया है.

प्रज्ञा केंद्रों में रजिस्ट्रेशन होने से हो रही परेशानी : एलबी सिंह

रांची के फूड सिक्योरिटी ऑफिसर एलबी सिंह ने बताया कि निगम के एनओसी देने के बाद ऐसी दुकानों को लाइसेंस देने का प्रावधान है. इसके उलट आज जिस तरह से बिना स्वास्थ्य मानकों का पालन किये दुकानें खुली हैं, उसका कारण प्रज्ञा केंद्रों द्वारा ऐसी दुकानों का रजिस्ट्रेशन किया जाना है. रजिस्ट्रेशन मिलने के बाद चिकन विक्रेता ऐसी दुकान को खोल देते हैं, जबकि वे दुकानों का लाइसेंस लेना उचित नहीं समझते. प्रज्ञा केंद्रों में ऐसे दुकानदार अपना पता ऐसे लिखवाते हैं, जिससे कि उन्हें खोजने में कई बार परेशानी होती है. जैसे कि हरमू रोड का पता लिखवाकर दुकान का रजिस्ट्रेशन करवाना.

जांच के लिए जल्द बनेगी टीम : गरिमा सिंह

ऐसी चिकन और मछली दुकानों के खिलाफ की जानेवाली कार्रवाई के सवाल पर रांची की अनुमंडल पदाधिकारी गरिमा सिंह ने कहा कि जल्द ही इसके लिए एक टीम बनाकर अभियान चलाया जायेगा. जिन दुकानों ने लाइसेंस नहीं लिया है या स्वास्थ्य मानकों का पालन नहीं किया है, उनका लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया पूरी की जायेगी.

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