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Jharkhand में 2500 युवाओं को मिलने वाला है रोजगार, लेकिन सरकार नहीं ले पा रही इसका क्रेडिट, जानें क्यों

रघुवर सरकार के कार्यकाल में जब शराब का खुदरा व्यापार

Akshay Kumar Jha

Ranchi: हेमंत सरकार की तरफ 2021-22 को नियुक्ति वर्ष घोषित किया गया था लेकिन नियुक्तियां नहीं हो पायी. इस मामले पर सरकार का कहना है कि कोरोना और पुरानी सरकार की नियुक्ति नियमावली में विसंगती की वजह से नौकरियां नहीं दी जा सकीं. फिलहाल सरकार का जोर नियुक्ति नियमावली सुधारने और ज्यादा से ज्यादा नौकरी देने पर है. इन बातों को खुद सीएम हेमंत सोरेन ने बजट सत्र के दौरान कहा.

वहीं दूसरी तरफ सरकार की तरफ से रोजगार के अवसर तो दिए जा रहे हैं, लेकिन सरकार इसका क्रेडिट नहीं लेना चाह रही है. बहरहाल सरकार की तरफ से इस रोजगार का ढिंढोरा नहीं पीटा जा रहा है. झारखंड के करीब 2500 बेरोजगारों को रोजगार मिलने वाला है. आने वाले दो महीने में ऐसा हो पाएगा.

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जानें कौन सा रोजगार मिलने वाला है

बीते बुधवार को सरकार की कैबिनेट बैठक में शराब कारोबार की नयी नीति पर मुहर लगी. शराब नीति में कई तरह के परिवर्तन देखने को मिले. एक बार फिर से सरकार की तरफ से शराब बेची जाएगी. थोक शराब का कारोबार सरकार की देख-रेख में प्राइवेट हाथों में होगा तो, वहीं खुदरा शराब का कारोबार सरकार करेगी.

इसका मतलब खुदरा दुकान और दुकान में शराब सरकार की होगी, लेकिन बेचने वाले प्राइवेट आउटसोर्सिंग कंपनी के कर्मी रहेंगे. ऐसा रघुवर सरकार के कार्यकाल में भी हुआ है. फिलहाल राज्य भर में खुदरा शराब दुकानों की संख्या 750 है. इन्हें सरकार की तरफ से बढ़ा कर 1500 करने की योजना है.

एक खुदरा शराब दुकान में तीन कर्मियों की जरूरत पड़ती है. इस लिहाज से नयी खुलने वाले दुकानों में करीब 2500 लोगों की जरूरत पड़ेगी. इसकी पूर्ति सरकार आउटसोर्सिंग कंपनियों के जरिए करेगी. इस लिहाज से करीब 2500 बेरोजगारों को रोजगार मिलने की व्यवस्था सरकार ने कर दी है. कारोबार शराब से जुड़े होने की वजह से सरकार इन रोजगारों का क्रेडिट लेने से बच रही है.

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शोमुख और फ्रंटलाइन करते थे पहले आउटसोर्सिंग

रघुवर सरकार के कार्यकाल में जब शराब का खुदरा व्यापार खुद सरकार कर रही थी तो भी यही व्यवस्था थी. लेकिन पूरे कार्यकाल के दौरान शोमुख और फ्रंटलाइन नाम ती दोनों कंपनियां विवादों में रहीं. कभी ज्यादा रेट पर शराब बेचने की वजह से तो कभी कर्मियों को समय पर पगार ना देने की वजह से इन दोनों कंपनियों पर आरोप लगते रहे. साथ ही शराब के कारोबार में सरकार को जबरदस्त नुकसान भी उठाना पड़ा. अब एक बार फिर से आउटसोर्सिंग के कंपनियां शराब के कारोबार को संभालने वाली हैं. देखना दिलचस्प होगा कि सरकार को कितना मुनाफा होता है.

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