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15 वर्षों बाद राज्य गौ सेवा आयोग की हुई बैठक में लाए गए 23 प्रस्ताव, हमारी गौ माता, हमारा दायित्व योजना की तैयारी

Ranchi: राज्य में जन जन के बीच गौ सेवा, गो पालन को प्रोत्साहित करने को हमारी गौ माता, हमारा दायित्व योजना लायी जायेगी. इसके लिए नव गठित राज्य गौ सेवा आयोग ने फैसला लिया है. नेपाल हाउस में बुधवार को आयोग की हुई पहली औपचारिक बैठक में इस पर सहमति बनी. आयोग के अध्यक्ष राजीव रंजन प्रसाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस संबंध में जानकारी देते कहा कि करीब 15 वर्षों बाद इस आयोग की बैठक हुई है. इससे पूर्व 23 सितंबर 2008 को तत्कालीन अध्यक्ष पुरुषोत्तम झुनझुनवाला की अध्यक्षता में इसकी बैठक हुई थी. हेमंत सोरेन सरकार ने संवेदनशीलता दिखाते आयोग का गठन करते उदाहरण पेश किया है. राजीव रंजन के मुताबिक आयोग की आज की बैठक में 23 प्रस्ताव लाए गये. गौ सेवा करने की इच्छा कईयों को होती है. पर शहरों में जगह की कमी और दूसरे कारणों से ऐसा संभव नहीं हो पाता. पर जल्द ही आयोग के स्तर से हमारी गौ माता, हमारा दायित्व योजना की लॉन्चिंग होगी. इससे गौ सेवा के इच्छुक लोग गौशालाओं के माध्यम से और अन्य तरीकों से इससे लाभान्वित हो सकते हैं. मौके पर आयोग के उपाध्यक्ष राजू गिरी, निबंधक डॉ मुकेश मिश्रा सहित अन्य भी उपस्थित थे.

बनेगा आय़ोग का ऑफिस और सभागार

राजीव रंजन ने जानकारी देते बताया कि गौ सेवा आयोग के पास अपना कार्यालय भवन, सभागार का अभाव है. इस संबंध में राज्य सरकार के पास प्रत्साव भेजा जायेगा जिसके बाद इस समस्या का जल्द निदान हो जायेगा. आयोग की पहचान केवल गौशालाओं को अनुदान देने की ना रहे, इसके लिए कई स्तरों पर काम होने हैं. गौशालाओं के सशक्तिकरण, रोजगार सृजन, गौ तस्करी की रोकथाम, मवेशियों के इलाज और अन्य पहलुओं पर भी काम होगा. राज्य में केवल 23 गौशाला ही निबंधित हैं. 8 जिले तो ऐसे हैं जिनमें एक भी गौशाला निबंधित नहीं हैं. इनमें खूंटी, गुमला, गढ़वा जैसे जिले भी हैं. ऐसे में यहां के गौशालाओं का भी निबंधन कराया जायेगा.

गौशालाओं में रखे जाने वाले मवेशियों के लिए खुराकी दर (प्रति) 100 रुपये अभी है, इसे 150 रुपये तक किए जाने का प्रस्ताव सरकार को दिया जायेगा. एक वर्ष की बजाये 2 वर्ष के लिए इस राशि को दिलाए जाने की कोशिश है. गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने की योजना है. गोबर जनित प्रोडक्ट की डिमांड बढ़ी है. स्टार्ट अप का जमाना है. इसे देखते आयोग निकट भविष्य में कुछ एमओयू भी करेगा. सखी मंडलों के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाए जाएंगे. रोजगार सृजन के अवसर बनेंगे. गौशाला के मवेशियों के लिए स्वास्थ्य रक्षा कवच प्रदान किया जायेगा. दवाईयां दी जाएंगी. लंपी वायरस से बचाव किया जायेगा. नंदी शाला का निर्माण गौशालाओं में होगा. गौशालाओं से वर्मी कंपोस्ट, गौ मूत्र की सीधी खरीद के लिए सरकार को प्रस्ताव दिया जायेगा.

सड़कों पर भटकती गायों (गौ वंशीय) को दुर्घटना, बीमारी से बचाव के लिए 10 कैटल रेस्क्यू वैन की खरीद की तैयारी है. सरकार के स्तर से इस पर निर्णय लिया गया है. इसका संचालन गौशालाओं के जरिये होगा. इसके लिए टोल फ्री नंबर जारी होंगे. कृषि बाजार समिति के जरिये पशुओं की खरीद बिक्री होती है. इसका 5 फीसदी आयोग को मिले, इसका प्रयास है. बायोगैस प्लांट तैयार कराए जाने का भी निर्णय आयोग की बैठक में लिया गया है. आयोग का अपना खाता भी खोले जाने का विचार बना है. इससे दान, उपहार, सीएसआर के मिले सहयोग का उपयोग करने में आसानी होगी.

जिलों में गोचर भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित किए जाने को सभी जिला प्रशासन से सहयोग मांगा गया है. इससे पशु तस्करी से बचाये गये मवेशियों के रख-रखाव में आसानी होगी. गौशालओं पर से भार कम होगा. स्वदेशी नस्ल के दुधारू गायों के पालन, क्रय पर जोर दिया जायेगा. पशु मेला का निबंधन से स्थानीय प्रशासन को उसके नियंत्रण में आसानी होगी, राजस्व भी मिलेगा.

राजीव रंजन ने जानकारी देते बताया कि जल्द ही आयोग की अपनी वेबसाइट तैयार हो जायेगी. इससे किसी भी जिले से गौशालाओं का रजिस्ट्रेशन कराना आसान होगा. गौशालाओं को दी जाने वाली मदद और मॉनिटरिंग सहित दूसरे कार्यों के संचालन में आसानी होगी. एक सवाल के जवाब में राजीव ने बताया कि जिन गौशालाओं में जमीन का उपयोग मूल कार्यों को छोड़कर दूसरी गतिविधियों के संचालन के लिए किया जायेगा, उसे प्रतिबंधित सूची में डाल दिया जायेगा. इससे संबंधित विवरण की मांग आयोग के स्तर से की गयी है.

 

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