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13साल 306 करोड़ बजट+सात मंजिला भवन+500 बेड+राज्य का सबसे बड़ा सदर अस्पताल =सुविधा नदारद

Kumar Gaurav

Ranchi : 306 करोड़ के बजट वाला चारों तरफ शीशा से सजा सात मंजिला भवन. 500 बेड की उपलब्धता, राज्य का सबसे बड़ा और स्पेशियलिटी सदर अस्पताल. यहां तक सुनकर किसी को भी लग सकता है कि यह पूरी तरह सुविधाओं से लैस होगा. हर तरह की बीमारियों का ईलाज होता होगा. जहां किसी भी तरह जांच की सुविधा मिल जाती होगी. मरीजों को इधर उधर भटकना नहीं पड़ता होगा.

हां, ऐसा ही होता अगर इसके लिये तैयार हुई योजना पूरी ईमानदारी से धरातल पर उतार ली जाती. पर ऐसा हो नहीं पाया. 13 साल में 7 मंजिला भवन तो तैयार हो गया पर अबतक 500 के बजाय 200 बेड पर ईलाज की सुविधा मिल रही है. विशेषकर दो विभागों में. पहला स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग, दूसरा शिशु रोग विभाग. इसके अलावा ईएनटी, आइ और आर्थो के भी मरीज आते हैं.

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500 बेड की क्षमता पर 200 बेड पर ही इलाज

सदर अस्पताल को 500 बेड की क्षमता का अस्पताल बनाया जाना है. पर अभी 200 बेड पर ही ईलाज संभव हो पा रहा है. सदर अस्पताल के डॉक्टर एस मंडल ने बताया कि 200 बेड में 160 बेड में गाइनी के मरीज ही भर्ती रहते है. अन्य में आर्थो ईएनटी और आई विभाग के मरीजों का ईलाज होता है. हालांकि सदर अस्पताल में 52 डॉक्टर और 250 पारा मेडिकल स्टॉफ हैं. इसके अलावा सदर अस्पताल के पास अब भी कई तरह के उपकरण नहीं हैं. इस सबसे बड़े अस्पताल में जिसे सुपरस्पेशलियटी अस्पताल बनाया जाना है वहां एक सिटी स्कैन मशीन तक नहीं है. जरूरी जांच के लिये भी मशीन नहीं हैं.

चार सर्विस लिफ्ट हैं पर चारों बंद

गाइनी के सबसे अधिक मरीज होने के बावजूद उनके लिये भी सुविधा पूरी तरह से नदारद है. प्रसुति के लिये जो महिलाएं सदर आती हैं उन्हें भी सीढ़ी से चढ़कर ही पहले तल्ले तक जाना होता है. पूरे बिल्डिंग में चार सर्विस लिफ्ट हैं पर चारों बंद पड़े हैं. एक छोटी लिफ्ट है जिसमें ट्रॉली फिट नहीं आती. लिफ्ट चालू नहीं होने के कारण का पता करने पर कंस्ट्रक्शन कंपनी ने बताया कि जबतक बकाया पैसा नहीं मिल जाता लिफ्ट चालू नहीं हो सकेगा. अबतक हुए काम का 12 करोड़ का भुगतान बाकी है.

2007 में एनबीसीसी को दिया गया था काम, 127 करोड़ की योजना का एमओयू हुआ था. 2013 में कंपनी से काम वापस ले लिया गया. हाईकोर्ट में हुए पीआईएल के बाद कोर्ट के आदेश से 200 बेड का अस्पताल चालू कर दिया गया. बाकी 300 बेड का काम पूरा करने के लिए 179 करोड़ की रिवाइजड योजना तैयार की गयी. 28 नवंबर 2017 को काम विजेता कंस्ट्रक्शन को दिया गया. योजना स्वीकृति के बाद स्वास्थ्य विभाग ने इंपावर्ड कमिटी बनायी. कमिटि ने रिपोर्ट में बताया कि निर्माण एमसीआई के अनुरुप नहीं है. इंटरनल चेंज की जरुरत होगी. 2018 मे रिवाइज्ड ड्राइंग अप्रूव किया गया. मेजर इंटरनल चेंज किये गये. 2019 में डिसमेंटलिंग का काम पूरा किया गया. अक्टूबर 2020 तक काम पूरा कर लेना था. कोरोना के कारण चार महीने काम बाधित रहा. अभी तक डेविएशन एस्टिमेंट को अप्रूवल नहीं मिला है. जिसका मतलब है कि कई सारे काम अभी भी बाकी हैं.

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रांची में हो जाएंगे दो सरकारी स्पेशियलिटी अस्पताल

सदर अस्पताल में पुरी तरह से 500 बेड चालू हो जाने पर यहां स्पेशियलिटी विंग स्थापित की जाएगी. यहां न्यूरोलॉजी, कार्डियोलॉजी, नेफ्रोलॉजी और गेस्ट्रोलॉजी के अलावा कई विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध हो जाएंगे. जिसके बाद राजधानी में दो सरकारी स्पेशियलिटी अस्पतालों की सुविधा मिलेगी.

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