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राज्य के 100 छोटे-बड़े खदानों का नक्शा नहीं, सरकार में प्रभावी IAS जांच के दायरे में, एक लाख करोड़ के प्रोजेक्ट पर ग्रहण

उरमा कोल ब्लॉक, मौर्या कोल ब्लॉक और बनहर्दी सहित 62 खदानें जांच के दायरे में

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Ravi Bharti

Ranchi: झारखंड के छोटे-बड़े (खनिज, आयरन ओर सहित कोल ब्लॉक) 100 खदानों का नक्शा ही नहीं है. इसकी वजह यह है कि इन खदानों का अब तक माइनिंग प्लान ही नहीं बना. उरमा कोल ब्लॉक, मौर्या कोल ब्लॉक सहित छोटे-बड़े 62 खदानें जांच के दायरे में हैं. इसमें वर्तमान में सरकार में प्रभावी भूमिका निभाने वाले आईएएस अफसर भी जांच के दायरे में आ गये हैं.

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प्रभावी आईएएस पहले खान सचिव भी रहे थे. मामला फंसता देख वे स्टडी लीव पर भी डेढ़ साल के लिये चले गये थे. इससे पहले पूर्व खान सचिव एके सरकार ने 62 खदानों से अवैध खनन के लिये एफआईआर भी करायी थी. इस मामले पर अब लीपापोती करने की तैयारी भी चल रही है.

पेंच के कारण 22 एमओयू भी हो गये जमींदोज

सरकार के रवैये और कंपनियों की उदासीनता के कारण 22 एमओयू भी रद्द हो गये. इसके कारण लगभग एक लाख करोड़ के प्रोजेक्ट पर ग्रहण लग गया. झारखंड ने 75 हजार करोड़ के निवेश से हाथ भी धोया. फिलहाल सरकार को सालाना 1200 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है. राज्य में 80.36 बिलियन टन कोयला रिजर्व है. सीसीएल को आवंटित खदानों में 42.37 बिलियन टन कोयला रिजर्व है. बीसीसीएल को आवंटित खदानों में 19.43 बिलियन कोयला रिजर्व है. ईसीएल को आवंटित खदानों में 18.56 बिलियन टन कोयला रिजर्व है.

आयरन ओर के लीजधारकों के पास हजारों करोड़ बकाया

21 आयरन ओर के खदानों का लीज तो रद्द कर दिया गया. लेकिन लीजधारकों के पास 2040 करोड़ का बकाया है. इन लीज धारकों ने खनन की शर्तों का अनुपालन नहीं किया. आयकर रिटर्न और वाणिज्यकर भी नहीं चुका है. फॉरेस्ट एक्ट का भी उल्लंघन किया गया.

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सरकारी और निजी क्षेत्र के ये कोल ब्लॉक नहीं हुए शुरू

तासरा, पकरीबरवाडीह, महल, गोंदुल पाड़ा, सुगिया, रउता, बुढ़ाखाप, तलाईपाली, किरानडेरी, चट्टी बरियातू, दुलंगा, दामिनी, छिछरो, पस्तीमल, पिंडार-देवीपुर, सरिया, लातेहार, बनहर्दी, राजबार, सीतनाला, पतरातू, राबोध, जगेशर, तेनुघाट झिरकी, लालगढ़, मोइत्रा, वृंदा, मेराल, चिरपुर, दक्षिणी डाडू, बुंडू, चकला, जितपुर, चोरीटांड़, रोहणे, हुटार, राजहारा, माकरूदा और मे्दिनीराय प्रमुख रूप से शामिल हैं.

एक लाख लोग रोजगार से भी हो गये वंचित

राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार, एक कोल ब्लॉक में दो हजार लोगों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रुप से रोजगार मिलता है. इस हिसाब से 40 कोल ब्लॉक शुरू होने पर 80 हजार से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रुप से रोजगार मिलता. वहीं अबतक 19 कंपनियों को ही प्रोस्पेंटिंग लाइसेंस (खनन से पहले ड्रील कर खनिज का पता लगाना) मिला है. इसके अलावा ओएनजीसी, आईओसी को हजारीबाग, बोकारो और धनबाद में कोल बिड मिथेन के लिए पेट्रोलियम एक्सप्लोजन का लाइसेंस मिला है.

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