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हर माह 32 करोड़ नुकसान की भरपाई कर रहे 47 लाख बिजली उपभोक्ता, सीएम ने मानी व्यवस्था में खामी

राष्ट्रीय मानक से आठ फीसदी अधिक होता है झारखंड में बिजली का नुकसान, राष्ट्रीय मानक है 24 फीसदी और झारखंड में 32 फीसदी नुकसान

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Ranchi : राज्य के 47 लाख बिजली उपभोक्ताओं को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है. बिजली कंपनी को नुकसान हो रहा है, उसकी भी भरपाई उपभोक्ता ही कर रहे हैं. गुरुवार को हुई राज्य विकास परिषद की बैठक में मुख्यमंत्री रघुवर दास ने भी माना कि बिजली वितरण व्यवस्था में खामी है, जितना सुधार होना चाहिये था वह नहीं हो पाया है. उपभोक्ताओं को गुणवत्ता युक्त बिजली नहीं मिल पा रही है. राष्ट्रीय मानक से 8 फीसदी अधिक बिजली का नुकसान झारखंड में हो रहा है. राष्ट्रीय मानक 24 फीसदी है, जबकि झारखंड में लाइन लॉस 32 फीसदी है.

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हर महीने 32 करोड़ का नुकसान की भरपाई भी कर रहे कंज्यूमर

लचर बिजली वितरण व्यवस्था के कारण हर महीने 32 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है. इसकी भरपाई भी उपभोक्ता ही कर रहे हैं. वहीं प्रदेश में लो और हाई वोल्टेज की समस्या के कारण हर साल घरेलू उपभोक्ताओं को 60 करोड़ रुपये का नुकसान होता है. अगर एक फीसदी नुकसान कम हो तो हर महीने चार करोड़ रुपये की बचत होगी. सबसे अधिक बिजली का नुकसान जम्मू-कश्मीर में होता है. बिजली नुकसान के मामले में झारखंड छठे पायदान पर है, इसकी भी भरपाई बिजली के उपभोक्ता ही कर रहे हैं.

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नियामक आयोग का निर्देश भी नहीं मानता वितरण निगम

झारखंड में राज्य विद्युत नियामक आयोग का भी निर्देश झारखंड राज्य बिजली वितरण निगम नहीं मानता है. विद्युत नियामक आयोग ने लाइन लॉस 15 फीसदी तक लाने का निर्देश दिया है. इससे पहले 16 फीसदी तक लाने का निर्देश दिया था. प्रावधान के मुताबिक हर साल बिजली दर निर्धारण के समय आयोग बिजली नुकसान में कमी लाने का निर्देश देता है. आज तक वितरण निगम आयोग के निर्देश का पालन नहीं कर सका है.

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कैसे उपभोक्ताओं पर पड़ती है दोहरी मार

एक उपभोक्ता को सिंगल फेज मीटर लगाने के लिये में लगभग 1000-1200 रुपये खर्च आता है. वहीं औद्योगिक घरानों को बिजली लेने और मीटरिंग में लगभग एक लाख रुपये का खर्च आता है. वहीं घरेलू और औद्योगिक उपभोक्ताओं को तार के लिये भी पैसे देने पड़ते हैं.

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इस तरह मिलता है कनेक्शन

घरेलू उपभोक्ता
आवेदन- 20 रुपये
सिंगल फेज मीटर व लेबर चार्ज-155 रुपये
सिक्यूरिटी- 600 से 650 रुपये

मीटर रेंट नहीं देने पर उपभोक्ता को खुद खरीदना होता है मीटर,
सिंग फेज मीटर की कीमत 800 से 1500 रुपये
थ्री फेज मीटर की कीमत 3500 से 6000 रुपये

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कॉमर्शियल उपभोक्ता
एलटी उपभोक्ता, आवेदन- 50 रुपये
एचटी उपभोक्ता, आवेदन- 100 रुपये
एचटी उपभोक्ता का प्रति माह किराया- 1200 रुपये

मीटरिंग यूनिट लगाने में लगभग एक लाख रुपये खर्च आता है.

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किस राज्य में कितना फीसदी होता है नुकसान

राज्य का नाम कितना फीसदी है लाइन लॉस
जम्मू कश्मीर 62
अरूणाचल प्रदेश 49
बिहार 44
मणिपुर 40
मध्यप्रदेश 35
झारखंड 32
चंढ़ीगढ़ 31
उत्तरप्रदेश 31
राजस्थान 27
मिजोरम 27
सिक्किम 26
पश्चिमबंगाल 25
असम 24
हरियाणा 24
उत्तराखंड 22
कर्नाटक 22
त्रिपुरा 22
तमिलनाडू 21
महाराष्ट्र 21
केरल 18
गुजरात 18
आंध्रप्रदेश 16
पांडिचेरी 12
हिमाचल प्रदेश 11

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